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रेमडेसिविर को लेकर मचा हाहाकार, मेडिकल कॉलेज में सिर्फ 20 बचे
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झांसी। रेमडेसिविर इंजेक्शन को लेकर अभी भी हाहाकार मचा हुआ है। मेडिकल स्टोरों में तो इंजेक्शन आते ही बिक जाता है। मगर मेडिकल कॉलेज में भी महज 20 इंजेक्शन ही बचे हैं। जबकि, मेडिकल कॉलेज समेत नर्सिंगहोमों में भर्ती गंभीर मरीजों की संख्या 105 है।
कोरोना के इलाज में रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग तेजी से बढ़ी है। जबकि, इंजेक्शन का टोटा हो गया है। सरकारी अस्पतालों तक को इंजेक्शन की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति नहीं हो पा रही है। मेडिकल कॉलेज में शासन की तरफ से दो दिन पहले सवा सौ इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए थे। इसके अलावा रेलवे अस्पताल से भी लगभग 50 इंजेक्शन मिले थे। लेकिन कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों के कारण गंभीर मरीजों की संख्या में तेजी से उछाल आया है। ऐसे में रेमडेसिविर इंजेक्शन की भी मांग तेजी से बढ़ी है। कुछ मेडिकल स्टोर भी इंजेक्शन मंगवा रहे हैं। मेडिकल स्टोरों पर इंजेक्शन आते ही कुछ समय में खत्म हो जा रहे हैं। इसके लिए लोग एडवांस बुकिंग भी करा रहे हैं। मौजूदा समय में सिर्फ मेडिकल कॉलेज में 20 इंजेक्शन बचे हुए हैं। जबकि, झांसी में कोरोना के गंभीर मरीजों की संख्या 105 है। ऐसे में जल्द इंजेक्शन की आपूर्ति नहीं हुई तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।
पांच दिन का होता है कोर्स
डॉक्टरों के मुताबिक रेमडेसिविर इंजेक्शन का कोर्स पांच दिन का होता है। कोरोना मरीज का ऑक्सीजन लेबल 90-91 प्रतिशत के नीचे जाने पर उसे यह इंजेक्शन लगाया जाता है। पहले दिन दो इंजेक्शन लगते हैं, जबकि अन्य चार दिनों में एक-एक इंजेक्शन लगाया जाता है।
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इंजेक्शन नहीं तो स्टेरॉयड विकल्प
मेडिकल कॉलेज में कई दिनों तक एक भी रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं था तो डॉक्टरों ने हल्के और मध्यम लक्षण वाले 50 से अधिक कोरोना मरीजों को स्टेरॉयड देकर बिल्कुल दुरुस्त कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के हर मरीज के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन जरूरी नहीं है। बेवजह इंजेक्शन लगाने से इसके दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं।
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कोरोना के इलाज में रेमडेसिविर इंजेक्शन की मांग तेजी से बढ़ी है। जबकि, इंजेक्शन का टोटा हो गया है। सरकारी अस्पतालों तक को इंजेक्शन की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति नहीं हो पा रही है। मेडिकल कॉलेज में शासन की तरफ से दो दिन पहले सवा सौ इंजेक्शन उपलब्ध कराए गए थे। इसके अलावा रेलवे अस्पताल से भी लगभग 50 इंजेक्शन मिले थे। लेकिन कोरोना के लगातार बढ़ते मामलों के कारण गंभीर मरीजों की संख्या में तेजी से उछाल आया है। ऐसे में रेमडेसिविर इंजेक्शन की भी मांग तेजी से बढ़ी है। कुछ मेडिकल स्टोर भी इंजेक्शन मंगवा रहे हैं। मेडिकल स्टोरों पर इंजेक्शन आते ही कुछ समय में खत्म हो जा रहे हैं। इसके लिए लोग एडवांस बुकिंग भी करा रहे हैं। मौजूदा समय में सिर्फ मेडिकल कॉलेज में 20 इंजेक्शन बचे हुए हैं। जबकि, झांसी में कोरोना के गंभीर मरीजों की संख्या 105 है। ऐसे में जल्द इंजेक्शन की आपूर्ति नहीं हुई तो बड़ी समस्या खड़ी हो जाएगी।
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पांच दिन का होता है कोर्स
डॉक्टरों के मुताबिक रेमडेसिविर इंजेक्शन का कोर्स पांच दिन का होता है। कोरोना मरीज का ऑक्सीजन लेबल 90-91 प्रतिशत के नीचे जाने पर उसे यह इंजेक्शन लगाया जाता है। पहले दिन दो इंजेक्शन लगते हैं, जबकि अन्य चार दिनों में एक-एक इंजेक्शन लगाया जाता है।
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इंजेक्शन नहीं तो स्टेरॉयड विकल्प
मेडिकल कॉलेज में कई दिनों तक एक भी रेमडेसिविर इंजेक्शन नहीं था तो डॉक्टरों ने हल्के और मध्यम लक्षण वाले 50 से अधिक कोरोना मरीजों को स्टेरॉयड देकर बिल्कुल दुरुस्त कर दिया। डॉक्टरों का कहना है कि कोरोना के हर मरीज के लिए रेमडेसिविर इंजेक्शन जरूरी नहीं है। बेवजह इंजेक्शन लगाने से इसके दुष्परिणाम भी सामने आ सकते हैं।