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राहत: बरसात होने से पेयजल की डिमांड घटी
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झांसी। अच्छी बरसात होने से पेयजल की डिमांड कम हो गई है। पहले जिस क्षेत्र में दस से बारह टैंकर पानी की आपूर्ति कर रहे थे, अब घटकर सात से आठ रह गए हैं। इतना ही नहीं अब पानी के लिए वैसी मारामारी भी नहीं है, जैसे जुलाई के पहले और दूसरे सप्ताह में थी। पानी की डिमांड कम होने से जलसंस्थान ने राहत की सांस ली है।
अप्रैल में महानगर में चालीस टैंकरों से जलापूर्ति शुरू हुई थी। टैंकरों से पानी की आपूर्ति के लिए चार- चार चक्कर लगाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन, जैसे - जैसे पानी की किल्लत बढ़ी, टैंकरों के फेरे बढ़ाए जाने लगे और स्थिति यह हो गई कि किसी टैंकर से दस तो किसी से बारह चक्कर लगाए जाने लगे। बड़ागांव गेट बाहर पानी की मांग पूरी करने के लिए टैंकरों ने 80 से 85 तक चक्कर लगाए, क्योंकि यह क्षेत्र पानी के लिए सबसे संकटग्रस्त है। इसके अलावा लहरगिर्द, सूजे खां खिड़की, भगवंतपुरा, सिमराहा, ओरछा गेट, सिजरिया कॉलोनी, भांडेरी गेट, मसीहागंज, ईसाई टोला समेत अन्य क्षेत्रों में पानी की भारी किल्लत के कारण टैंकरों से चार से पांच फेरे लगाए जा रहे थे।
पिछले सप्ताह तक गर्मी चरम पर थी, जिससे सभी टैंकर मिलकर लगभग चार सौ चक्कर लगा रहे थे। गर्मी के कारण लोग दो- दो बार नहा रहे थे। घरों के बाहर पानी का छिड़काव कर रहे थे। इससे पानी की खपत अधिक हो रही थी। लेकिन, पानी बरसने से लोगों ने राहत की सांस ली है। पिछले एक सप्ताह से पानी लगातार बरस रहा है। इससे पानी की डिमांड दस से पंद्रह फीसदी तक बढ़ गई है।
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बृहस्पतिवार को दिन भर झमाझम पानी बरसा। इसका असर एक- दो दिन में दिखाई देने लगेगा। अब लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही हैंडपंपों में पानी आ जाएगा और अब उन्हें पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
ट्यूबवेल में आया पानी
बड़ागांव गेट बाहर ट्यूबवेल में पानी का स्तर बढ़ गया है। पहले जहां ट्यूबवेल पंद्रह से बीस मिनट चल रहा था, अब आधा घंटा से भी अधिक समय के लिए चल रहा है।
बरसात होने से पानी की मांग कम हो जाना स्वाभाविक है। दस से पंद्रह फीसदी तक डिमांड घट गई है। अब पानी के लिए मारामारी की स्थिति नहीं है। यदि ऐसी ही बरसात होती रही तो जल्द ही पानी का स्तर सुधर जाएगा।
- कुलदीप सिंह, महाप्रबंधक
जलसंस्थान
बरसात हो जाने के कारण बड़ी राहत है। पानी के लिए बहुत परेशान था। गर्मियों में तो बूंद- बूंद पानी के लिए तरस गए।
-राकेश अहिरवार
बड़ी राहत महसूस कर रहे हैं। दो महीने का समय जिस तरह से काटा है, उसे हम ही जानते हैं। पानी की बहुत परेशानी झेली है।
- अनिकेत मिश्रा
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अप्रैल में महानगर में चालीस टैंकरों से जलापूर्ति शुरू हुई थी। टैंकरों से पानी की आपूर्ति के लिए चार- चार चक्कर लगाने का लक्ष्य रखा गया था। लेकिन, जैसे - जैसे पानी की किल्लत बढ़ी, टैंकरों के फेरे बढ़ाए जाने लगे और स्थिति यह हो गई कि किसी टैंकर से दस तो किसी से बारह चक्कर लगाए जाने लगे। बड़ागांव गेट बाहर पानी की मांग पूरी करने के लिए टैंकरों ने 80 से 85 तक चक्कर लगाए, क्योंकि यह क्षेत्र पानी के लिए सबसे संकटग्रस्त है। इसके अलावा लहरगिर्द, सूजे खां खिड़की, भगवंतपुरा, सिमराहा, ओरछा गेट, सिजरिया कॉलोनी, भांडेरी गेट, मसीहागंज, ईसाई टोला समेत अन्य क्षेत्रों में पानी की भारी किल्लत के कारण टैंकरों से चार से पांच फेरे लगाए जा रहे थे।
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पिछले सप्ताह तक गर्मी चरम पर थी, जिससे सभी टैंकर मिलकर लगभग चार सौ चक्कर लगा रहे थे। गर्मी के कारण लोग दो- दो बार नहा रहे थे। घरों के बाहर पानी का छिड़काव कर रहे थे। इससे पानी की खपत अधिक हो रही थी। लेकिन, पानी बरसने से लोगों ने राहत की सांस ली है। पिछले एक सप्ताह से पानी लगातार बरस रहा है। इससे पानी की डिमांड दस से पंद्रह फीसदी तक बढ़ गई है।
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बृहस्पतिवार को दिन भर झमाझम पानी बरसा। इसका असर एक- दो दिन में दिखाई देने लगेगा। अब लोगों को उम्मीद है कि जल्द ही हैंडपंपों में पानी आ जाएगा और अब उन्हें पानी के लिए परेशान नहीं होना पड़ेगा।
ट्यूबवेल में आया पानी
बड़ागांव गेट बाहर ट्यूबवेल में पानी का स्तर बढ़ गया है। पहले जहां ट्यूबवेल पंद्रह से बीस मिनट चल रहा था, अब आधा घंटा से भी अधिक समय के लिए चल रहा है।
बरसात होने से पानी की मांग कम हो जाना स्वाभाविक है। दस से पंद्रह फीसदी तक डिमांड घट गई है। अब पानी के लिए मारामारी की स्थिति नहीं है। यदि ऐसी ही बरसात होती रही तो जल्द ही पानी का स्तर सुधर जाएगा।
- कुलदीप सिंह, महाप्रबंधक
जलसंस्थान
बरसात हो जाने के कारण बड़ी राहत है। पानी के लिए बहुत परेशान था। गर्मियों में तो बूंद- बूंद पानी के लिए तरस गए।
-राकेश अहिरवार
बड़ी राहत महसूस कर रहे हैं। दो महीने का समय जिस तरह से काटा है, उसे हम ही जानते हैं। पानी की बहुत परेशानी झेली है।
- अनिकेत मिश्रा