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हर-हर महादेव के उद्घोष के साथ फिरंगी सेना पर टूट पड़ीं थीं रानी

Sat, 06 Mar 2021 01:41 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 06 Mar 2021 01:41 AM IST
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Rani attack Firangi sena speach har har mahadev
किले में स्थित प्राचीन शिव मंदिर।
झांसी। भगवान शिव की भक्ति के मामले में झांसी का समृद्ध इतिहास है। तीन शताब्दी पहले मराठा शासनकाल में झांसी के ऐतिहासिक दुर्ग के भीतर शिव मंदिर का निर्माण कराया गया था। वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई प्रतिदिन यहां शिवजी का पूजन - अर्चन करती थीं। इतना ही नहीं, सन 1857 में स्वतंत्रता संग्राम में कूदने से पहले रानी ने शिवजी के दर्शन किए थे। और हर-हर महादेव का उदघोष करते हुए रानी की सेना फिरंगियों पर टूट पड़ी थी।
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झांसी के किले का निर्माण ओरछा नरेश वीर सिंह जूदेव ने सन 1613 से 1619 के बीच कराया था। बाद में ये किला मराठाओं को दे दिया गया था। झांसी के पहले मराठा सूबेदार नारोशंकर थे। उन्होंने सन 1727 किले में शिव मंदिर का निर्माण कराया था। किले के जिस हिस्से में शिव मंदिर स्थित है, उस क्षेत्र को शंकरगढ़ के नाम से आज भी जाना जाता है। मराठा शिवजी के अनन्य भक्त माने जाते थे। परिवार की इस परंपरा को महारानी लक्ष्मीबाई ने भी कायम रखा। रानी के दौर में शिवरात्रि पर किले के भीतर स्थित शिव मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना होती थी, जिसमें आम जनमानस को भी शामिल होने का मौका मिलता था। ये परंपरा अब भी कायम है। हर शिवरात्रि पर किले के इर्दगिर्द मेला लगता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु किले में पहुंचकर शिवजी के दर्शन करते हैं। सुबह से लेकर शाम तक भक्तों का जमावड़ा बना रहता है। अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान के उपाध्यक्ष व इतिहासकार हरगोविंद कुशवाहा के अनुसार सन 1857 के संग्राम में रानी की सेना हर - हर महादेव का उदघोष करते हुए फिरंगी सेना पर टूट पड़ी थी। युद्ध में जाने से पहले रानी ने भी शिवजी का अभिषेक किया था।
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अनदेखी का शिकार है शंकरगढ़
झांसी। किले के भीतर का शंकरगढ़ का हिस्सा अनदेखी का शिकार है। मंदिर तक पहुंचने के रास्ते का रखरखाव न होने की वजह से ये जीर्णशीर्ण होता जा रहा है। फिसलन होने की वजह से मंदिर की ओर जाने वाली सीढ़ियों से गिरने का लोगों को हर समय खतरा बना रहता है। इसके अलावा मंदिर के पीछे की ओर साफ - सफाई न होने की वजह से झाड़ियां उग आईं हैं, जो यहां आने वाले पर्यटकों को निराश करती हैं।
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