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राम लला गोविंद लला जा होली खेलें राम लला
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ओरछा (झांसी)। धार्मिक नगरी के श्री रामराजा मंदिर में राम लला गोविंद लला जा होरी खेलें राम लला और आज अवध में होरी रे रसिया जैसे पारंपरिक बुंदेली होली गीतों व श्री रामसभा के साथ रंग अबीर गुलाल सराबोर रामभक्तों ने रामराजा सरकार के साथ होली खेलकर रंगोत्सव का आनंद लिया ।
सुबह 5 बजे होने वाली मंगला आरती में देश भर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होने ओरछा पहुंचे। मंदिर में सोमवार रात 9 से 10 बजे के बीच होली उत्सव को पूरी राजशाही परंपरा के अनुसार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । मंदिर में प्राचीन समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार तीज सोमवार को दोपहर की राजभोग आरती के बाद रामराजा सरकार भक्तों से होली खेलने गर्भगृह से निकलकर सबसे आगे वाले चौक में विराजमान हुए । रंगों के इस महापर्व और भगवान से होली खेलने के लिए देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु ओरछा पहुंचे । इस मौके पर बुंदेली फ ागों के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की टोलियों ने भी मंदिर परिसर में भजन कीर्तन किया । इस अद्भुत नजारे को देखने समूचे बुंदेलखंड सहित बड़ी संख्या में देशी विदेशी सैलानी रामराजा मंदिर में मौजूद रहे। रंगोत्सव का आगाज वनवासी मंदिर में 8 बजे संध्या आरती के बाद रामसभा के साथ हुआ, इसमें बुंदेलखंड के प्रसिद्ध होली भजन गायक रजनीश दुबे, उमाशंकर नामदेव, लक्ष्मी कुशवाहा, मोहन परिहार ने होली भजनों की शानदार प्रस्तुति दी । इसके बाद मंदिर के आंगन में पीतल की बड़ी.बड़ी नादों में रंग और अबीर भरा गया और चाँदी की पिचकारी से श्रीरामराजा सरकार व भक्तों पर रंग और गुलाल डालकर होली खेली गई । सबसे पहले मंदिर के पुजारी रमाकांत शरण महाराज ने पिचकारी से रामलला पर रंग अबीर गुलाल बरसाकर होली महोत्सव की शुरूआत की । इसके बाद दूर.दूर से आए श्रद्धालुओं ने रामलला पर रंग डालकर होली उत्सव का भरपूर आनंद लिया।
सुबह 5 बजे मंगला आरती में शामिल होने पहुंचे हजारों लोग । हर साल की तरह मंगला आरती में शामिल होने के लिए एक दिन पहले से ही श्रद्धालु ओरछा पहुंचे। साल में दो बार होने वाली मंगला आरती के दर्शन करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर के प्रधान पुजारी श्रीरमाकांत शरण महाराज ने बताया कि मंगला आरती में शामिल होने से विशेष फ ल की प्राप्ति होती है। यदि जो भी प्राणी इस मंगला आरती में शामिल होगा तो उसे 501 गोदान का पुण्य फ ल प्राप्त होता है। प्रमुख अवसरों पर होने वाली मंगला आरती के दौरान मंदिर के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। रंगोत्सव के महापर्व पर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया ।
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सुबह 5 बजे होने वाली मंगला आरती में देश भर से हजारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल होने ओरछा पहुंचे। मंदिर में सोमवार रात 9 से 10 बजे के बीच होली उत्सव को पूरी राजशाही परंपरा के अनुसार बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया । मंदिर में प्राचीन समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार तीज सोमवार को दोपहर की राजभोग आरती के बाद रामराजा सरकार भक्तों से होली खेलने गर्भगृह से निकलकर सबसे आगे वाले चौक में विराजमान हुए । रंगों के इस महापर्व और भगवान से होली खेलने के लिए देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु ओरछा पहुंचे । इस मौके पर बुंदेली फ ागों के साथ आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की टोलियों ने भी मंदिर परिसर में भजन कीर्तन किया । इस अद्भुत नजारे को देखने समूचे बुंदेलखंड सहित बड़ी संख्या में देशी विदेशी सैलानी रामराजा मंदिर में मौजूद रहे। रंगोत्सव का आगाज वनवासी मंदिर में 8 बजे संध्या आरती के बाद रामसभा के साथ हुआ, इसमें बुंदेलखंड के प्रसिद्ध होली भजन गायक रजनीश दुबे, उमाशंकर नामदेव, लक्ष्मी कुशवाहा, मोहन परिहार ने होली भजनों की शानदार प्रस्तुति दी । इसके बाद मंदिर के आंगन में पीतल की बड़ी.बड़ी नादों में रंग और अबीर भरा गया और चाँदी की पिचकारी से श्रीरामराजा सरकार व भक्तों पर रंग और गुलाल डालकर होली खेली गई । सबसे पहले मंदिर के पुजारी रमाकांत शरण महाराज ने पिचकारी से रामलला पर रंग अबीर गुलाल बरसाकर होली महोत्सव की शुरूआत की । इसके बाद दूर.दूर से आए श्रद्धालुओं ने रामलला पर रंग डालकर होली उत्सव का भरपूर आनंद लिया।
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सुबह 5 बजे मंगला आरती में शामिल होने पहुंचे हजारों लोग । हर साल की तरह मंगला आरती में शामिल होने के लिए एक दिन पहले से ही श्रद्धालु ओरछा पहुंचे। साल में दो बार होने वाली मंगला आरती के दर्शन करने बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। मंदिर के प्रधान पुजारी श्रीरमाकांत शरण महाराज ने बताया कि मंगला आरती में शामिल होने से विशेष फ ल की प्राप्ति होती है। यदि जो भी प्राणी इस मंगला आरती में शामिल होगा तो उसे 501 गोदान का पुण्य फ ल प्राप्त होता है। प्रमुख अवसरों पर होने वाली मंगला आरती के दौरान मंदिर के आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए। आरती के बाद श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। रंगोत्सव के महापर्व पर मंदिर परिसर को आकर्षक ढंग से सजाया गया ।
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