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संवरेगी राजा गंगाधर राव की बारादरी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 12 Aug 2016 01:31 AM IST
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killa, jhansi news
- फोटो : amar ujala, jhansi news
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झांसी। रानी के ऐतिहासिक दुर्ग के उपेक्षित पड़े हिस्से को संवारने की तैयारी शुरू कर दी गई है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने इस दिशा में काम शुरू कर दिया गया है। जल्द ही यह इलाका भी चकाचक नजर आएगा। किले के भीतर स्थित बारादरी राजा गंगाधर राव का प्रिय स्थान था। उनके शासनकाल में बारादरी में लगातार नृत्य, संगीत व नाट्य कार्यक्रम आयोजित होते रहते थे। इसके अलावा गणेश मंदिर क्षेत्र के फर्श की भी मरम्मत होगी।
झांसी के किले का निर्माण चार सौ साल पहले हुआ था। यह किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षण में है। विभाग द्वारा समय-समय पर कराए गए मरम्मत कार्य के चलते इसका काफी हिस्सा अभी भी सुरक्षित है। लेकिन, गणेश मंदिर से आगे का हिस्सा उपेक्षित पड़ा हुआ है। इस हिस्से में बनी बारादरी जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच गई है। इसके अलावा इस हिस्से का फर्श भी खराब हो गया है। लेकिन, अब पुरातत्व विभाग द्वारा इस हिस्से को संवारा जा रहा है। बारादरी की मरम्मत कर इसे पुराने लुक में तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा फर्श व पिछले गेट की दीवारों की भी मरम्मत की जा रही है। इस पर काम शुरू कर दिया गया है।
जराय का मठ बनेगा टूरिस्ट प्लेस
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने जराय के मठ को टूरिस्ट प्लेस के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए विभाग ने योजना तैयार कर ली है, जिसके तहत जराय के मठ के पास पार्किंग, आधुनिक टायलेट, छोटा कैफेेटेरिया बनाया जाएगा, ताकि झांसी से सड़क मार्ग से खजुराहो जाने वाले पर्यटकों को यहां रोका जा सके। विभाग ने यह प्रस्ताव प्रदेश सरकार को दे दिया है। उल्लेखनीय है कि जराय का मठ झांसी से लगभग 20 किमी दूर झांसी-खजुराहो मार्ग पर स्थित है। नवीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर की बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं की आकृतियों को उकेरा गया है। यहां तत्कालीन उन्नत शिल्प कला देखने को मिलती है।
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‘जराय के मठ को टूरिस्ट प्लेस के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव प्रदेश शासन को दे दिया गया है। यह पर्यटकों को यहां रोकने में बेहद कारगर साबित होगा। इसके अलावा किले में भी मरम्मत कार्य जारी है।’
- एनके पाठक, अधीक्षण पुरातत्वविद - केंद्रीय पुरातत्व विभाग
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झांसी के किले का निर्माण चार सौ साल पहले हुआ था। यह किला भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के संरक्षण में है। विभाग द्वारा समय-समय पर कराए गए मरम्मत कार्य के चलते इसका काफी हिस्सा अभी भी सुरक्षित है। लेकिन, गणेश मंदिर से आगे का हिस्सा उपेक्षित पड़ा हुआ है। इस हिस्से में बनी बारादरी जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच गई है। इसके अलावा इस हिस्से का फर्श भी खराब हो गया है। लेकिन, अब पुरातत्व विभाग द्वारा इस हिस्से को संवारा जा रहा है। बारादरी की मरम्मत कर इसे पुराने लुक में तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा फर्श व पिछले गेट की दीवारों की भी मरम्मत की जा रही है। इस पर काम शुरू कर दिया गया है।
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जराय का मठ बनेगा टूरिस्ट प्लेस
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने जराय के मठ को टूरिस्ट प्लेस के रूप में विकसित करने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए विभाग ने योजना तैयार कर ली है, जिसके तहत जराय के मठ के पास पार्किंग, आधुनिक टायलेट, छोटा कैफेेटेरिया बनाया जाएगा, ताकि झांसी से सड़क मार्ग से खजुराहो जाने वाले पर्यटकों को यहां रोका जा सके। विभाग ने यह प्रस्ताव प्रदेश सरकार को दे दिया है। उल्लेखनीय है कि जराय का मठ झांसी से लगभग 20 किमी दूर झांसी-खजुराहो मार्ग पर स्थित है। नवीं शताब्दी में निर्मित इस मंदिर की बाहरी दीवारों पर देवी-देवताओं की आकृतियों को उकेरा गया है। यहां तत्कालीन उन्नत शिल्प कला देखने को मिलती है।
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‘जराय के मठ को टूरिस्ट प्लेस के रूप में विकसित करने का प्रस्ताव प्रदेश शासन को दे दिया गया है। यह पर्यटकों को यहां रोकने में बेहद कारगर साबित होगा। इसके अलावा किले में भी मरम्मत कार्य जारी है।’
- एनके पाठक, अधीक्षण पुरातत्वविद - केंद्रीय पुरातत्व विभाग