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अपनी धरती-अपने लाल: राजकपूर ने कहा और गीतकार विट्ठल भाई ने लिख दिया, झूठ बोले कौवा काटे काले कौवे से डरियो..

Tue, 29 Jun 2021 05:45 AM IST
Vikas Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झांसी Published by: Vikas Kumar Updated Tue, 29 Jun 2021 05:45 AM IST
सार

लंबे समय तक पृथक बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के दौरान विट्ठल भाई पटेल के साथ रहे झांसी निवासी हरिमोहन विश्वकर्मा बताते हैं कि सत्तर के दशक में विट्ठल भाई की मुंबई की मायानगरी के क्षितिज पर धूम थी।

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raj kapoor said and lyricist vitthal bhai patel wrote jhut bole koa kate song
लाल घेरे में विट्ठल भाई पटेल - फोटो : amar ujala

विस्तार

राजकपूर ने कहा और गीतकार विट्ठल भाई पटेल ने लिख दिया, झूठ बोले कौवा काटे काले कौवे से डरियो, मैं मायके चली जाऊंगी तुम देखते रहियो। यूं तो बुंदेलखंड के सागर शहर के रहने वाले विट्ठल भाई पटेल ने पचास से ज्याद फिल्मों में सुपरहिट गीत लिखे पर फिल्म बॉबी के लिए लिखा गया उनकी जिंदगी का पहला गीत झूठ बोले कौवा काटे, काले कौवे से डरियो, मैं मायके चली जाऊंगी तुम देखते रहियो उनकी पहचान बनकर रह गया।

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लंबे समय तक पृथक बुंदेलखंड राज्य आंदोलन के दौरान विट्ठल भाई पटेल के साथ रहे झांसी निवासी हरिमोहन विश्वकर्मा बताते हैं कि सत्तर के दशक में विट्ठल भाई की मुंबई की मायानगरी के क्षितिज पर धूम थी। झूठ बोले कौवा काटे काले कौवे से डरियो के अलावा फिल्म संन्यासी का मनोज कुमार हेमा मालिनी पर फिल्माया गया गीत, बाली उमरिया भजन करूं कैसे, चढ़ती जवानी जुगन बनूं कैसे भी सुपरडुपर हिट रहा था। धर्मवीर फिल्म का गीत, बात को दिल में दबाए रखना, कुछ नहीं कह देना, चुप ही रहना, बंद हो मुट्ठी तो लाख की, खुल गई तो खाक की तथा न चाहूं सोन चांदी न चाहूं हीरा मोती, ये मेरे किस काम के, फिल्म दरिया दिल का गाना, वो कहते हैं हमसे अभी उमर नहीं है प्यार की, नादां हैं वो क्या जाने
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कब कली खिली बहार की। इन गीतों को भी खूब शोहरत मिली।

यशोमति मैया से बोले नंद लाला राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला..
हरिमोहन विश्वकर्मा बताते हैं कि विट्ठल भाई पटेल चर्चा के दौरान सत्यम शिवम सुंदरम फिल्म के गीत यशोमति मैया से बोले नंदलाला राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला के बारे में अक्सर यह वाकया बताते थे कि राजकपूर ने विट्ठल भाई पटेल से सत्यम शिवम सुंदरम का एक गीत लिखने को कहा और उन्होंने अपनी निजी जिंदगी के पति पत्नी के बीच होने वाली आम दिनों की चुहलबाजी को गीत की शक्ल दे दी। विट्ठल भाई जी सांवले रंग के थे और उनकी पत्नी गोरे रंग की। इसी बात को लेकर कभी-कभी वह अपनी मां से मजाक करते थे कि मां मैं क्यों काला हूं। यह चुहलबाजी जब, यशोमति मैया से बोले नंदलाला.. राधा क्यों गोरी मैं क्यों काला, के रूप में जनता के बीच गीत बनकर आई तो उसने धूम मचा दी।
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सजन क्यों झूठ न बोलें, कसम क्यों तीसरी खाई कविता ने बना दिया फिल्मी गीतकार सागर में विट्ठल भाई पटेल के बाद उनके दोनों बेटों की भी मृत्यु हो चुकी है, हमने उनके पड़ोस में रहने वाले वरिष्ठ पत्रकार अजय दुबे से बात की तो उन्होंने विट्ठल भाई पटेल के फिल्मी गीतकार बनने की संघर्ष यात्रा के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि सजन रे झूठ क्यों न बोलें, कसम क्यों तीसरी खाई, मुबारक दिन रुलाने को, उम्र की पाट भी खाई, राजकपूर के लिए लिखी गई कविता की इन चार लाइनों ने ही व्यवसायी विट्ठल भाई को फिल्मी गीतकार विट्ठलभाई पटेल बना दिया। वाकया साठ के दशक का है। विट्ठल भाई युवा अवस्था में गीतकार शैलेंद्र के दीवाने थे, अक्सर वे उन्हें चिट्ठियां लिखते रहते थे। एक बार वे उनसे मिलने मुंबई पहुंच गए। बंगले पर अंदर परची भिजवाई नाम पढ़ते ही शैलेंद्र ने अंदर बुला लिया। पहली मुलाकात में युवा विट्ठल को देखकर गीतकार शैलेंद्र प्रभावित हो गए। उनकी कुछ कविताएं भी सुनीं और आशीर्वाद देकर विट्ठल को विदा किया। आने जाने का सिलसिला चलता रहा। इसी दौरान शैलेंद्र अपनी तीसरी कसम फिल्म बनाने में व्यस्त हो गए, विट्ठल भाई इसी दौरान उनसे मिलने पहुंच गए। शैलेंद्र ने बताया कि गांव की पृष्ठभूमि पर फिल्म बना रहे हैं, इसकी शूटिंग बिहार में चल रही है। 

विट्ठल ने आग्रह किया कि इसका कुछ हिस्सा बुंदेलखंड के सागर क्षेत्र के गांवों में शूट करें तो बहुत सुंदर होगा। शैलेंद्र ने उनका आग्रह स्वीकार कर लिया तथा अपनी यूनिट के साथ बुंदेलखंड की धरती की तरफ रुख किया। राजकपूर, वहीदा रहमान सभी सागर शहर में आकर रुक गए। शूटिंग पास के ही गांव खिलमासा में शुरू हुई। बैलगाड़ी से लेकर खाने पीने तक की व्यवस्था युवा विट्ठल के हाथ में थी। बुंदेलखंड के खिलमासा गांव में तीसरी कसम का गाना, लाली डुलिया में लाली रे दुल्हनियां, पिया की प्यारी भोलीभाली रे दुल्हनियां शूट किया गया। इसमें राजकपूर बैलगाड़ी चला रहे थे और वहीदा रहमान उसमें बैठीं थीं। शूटिंग की व्यवस्था लाजवाब थी, इसे देखकर फिल्म के नायक राजकपूर तो विट्ठल भाई के कायल हो गए। शूटिंग के बाद फिल्म रिलीज हुई और उस समय फ्लॉप साबित हो गई, सब कुछ लुटा चुके शैलेंद्र की इस सदमे ने जान ले ली। अपने आदर्श शैलेंद्र की मौत पर विट्ठल भाई भी मुंबई उनके निवास पर पहुंचे, यहां राजकपूर समेत अन्य लोग भी मौजूद थे। यह एक संयोग ही था कि जिस दिन शैलेंद्र की मृत्यु हुई, उसी 14 दिसंबर को राजकपूर का जन्मदिन भी था। विट्ठल ने भरी आंखों से शैलेंद्र को श्रद्धांजलि दी और एक कागज का टुकड़ा राजकपूर को थमा दिया। इसमें लिखा था, सजन क्यों झूठ न बोलें, कसम क्यों तीसरी खाई, मुबारक दिन रुलाने को उम्र की पाट भी खाई। इसे पढ़कर राजकपूर ने नम आंखों के बीच इसे अपनी जेब में रख लिया। वक्त गुजरा राजकपूर बॉबी फिल्म बना रहे थे, उन्होंने विट्ठल भाई को बुलाकर कहा तुम्हें इस फिल्म के गीत लिखना है।
 

ऐसे लिखा गया झूठ बोले कौवा काटे..

raj kapoor said and lyricist vitthal bhai patel wrote jhut bole koa kate song
रविप्रकाश शर्मा अधिवक्ता पृथक बुंदेलखंड आंदोलन के दिनों के विट्ठल भाई पटेल के साथी - फोटो : amar ujala

विट्ठल भाई पटेल के साथ पृथक बुंदेलखंड आंदोलन में साथ रहे अधिवक्ता रवि प्रकाश शर्मा बताते हैं कि विट्ठल भाई अक्सर बताया करते थे कि उन्होंने बॉबी फिल्म के लिए राजकपूर को गीत लिखकर दिया, मैं मायके चली जाऊंगी तुम देखते रहियो, राजकपूर ने कहा मुखड़े में मजा नहीं आया। कई दिन गुजर गए। एक दिन राजकपूर के ऑफिस में मिलने सिम्मी ग्रेवाल आईं, किसी बात पर राजकपूर ने कहा सिम्मी अगर झूठ बोलेगी तो तुझे काला कौवा काट खाएगा और विट्ठल भाई
को मिल गया अपने गाने का मुखड़ा।

चलो भूल जाएं जहां को यहां दो घड़ी, बीते हुए पल नहीं लौटते फिर कभी ..
पचास से अधिक फिल्म के गाने लिखने के बाद इतनी ही फिल्मों के गाने उनके हाथ में थे, पर अचानक उन्हें अपनी धरती बुंदेलखंड की याद आई और वे घर वापस आ गए, वह सागर जिले से दो बार विधायक रहे और एक बार मध्यप्रदेश के उद्योगमंत्री। जीवन पर्यंत पृथक बुंदेलखंड प्रांत निर्माण आंदोलन से जुड़े रहे। 21 मई 1936 को सागर के व्यवसायी लल्लू भाई पटेल के यहां जन्मे विट्ठल भाई पटेल 7 सितंबर 2013 को अपनी बुंदेलखंड की ही धरती सागर में पंचतत्व में विलीन हो गए। याद रह गया उनका यह नगमा, चलो भूल जाएं जहां को यहां दो घड़ी, बीते हुए पल नहीं लौटते फिर कभी।

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