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रेलवे को बारह सौ करोड़ का नुकसान
ब्यूराे/अमर उजाला
Updated Fri, 10 Jul 2015 01:44 AM IST
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झांसी। मध्य प्रदेश के इटारसी रेलवे जंक्शन पर 17 जून को रूट रिले केबिन में लगी आग के कारण जहां रेल यातायात अभी तक बेपटरी बना हुआ है वहीं रेलवे को इस घटना से अब तक बारह सौ करोड़ का नुकसान हुआ है। इसमें झांसी रेल मंडल का प्रतिदिन आठ से दस लाख का नुकसान शामिल है। विशेषज्ञों ने इसे रेलवे के इतिहास का सबसे बड़ा संकट बताया है, जिससे पूरे देश में रेलगाड़ियों का आवागमन प्रभावित हुआ है।
इटारसी एक केंद्रीय रेलवे जंक्शन है। न केवल मुंबई-भोपाल- झांसी- दिल्ली से बल्कि पटना, भोपाल- नागपुर और मुंबई जबलपुर-इलाहाबाद- कानपुर मार्ग की गाड़ियां इस स्टेशन से होकर गुजरती हैं। पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण रेलमार्ग के इंटर सेक्शन पर यह देश के सबसे बड़े रेलवे जंक्शनों में एक स्टेशन है। यह मध्य प्रदेश का एकमात्र रेलवे जंक्शन है, जहां 300 से अधिक गाड़ियों का रोजाना ठहराव होता है।
रेल यातायात में बाधा की इस बड़ी घटना के कारण गाड़ियों में विलंब होने, रद होने, मार्ग परिवर्तन और गाड़ियों की स्थिति संबंधी सूचना नहीं मिलने के कारण झांसी व ग्वालियर के यात्रियों के बीच खलबली पैदा हो गई है। अधिकांश यात्रियों को अभी तक उस जटिलता का पता नहीं है, जिसके कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई, क्योंकि अधिकतर लोगों को रूट रिले इंटर लॉकिंग प्रणाली की कार्य पद्धति और राष्ट्रव्यापी रेलवे यातायात का चक्का जाम होने के कारणों की जानकारी नहीं है।
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यह होता है रूट रिले इंटर लॉकिंग रूम नियंत्रण कक्ष
रूट- रिले इंटर लॉकिंग रूम नियंत्रण कक्ष का सबसे महत्वपूर्ण सिस्टम कंट्रोल रूम होता है, जहां से ट्रेनों के सिग्नलों और क्रॉसिंग का प्रबंधन किया जाता है। यह एक ऐसी प्रणाली है जिसके द्वारा जंक्शन स्टेशन पर मार्ग परिवर्तन के लिए केंद्रीय रूप में एक केबिल से सभी सिग्नलों और प्वाइंटों/ क्रॉसिंग का विद्युत उपकरणों के माध्यम से संचालन होता है। इस तरह की प्रणाली में काफी सघन वायरिंग और सर्किट लूप शामिल रहती हैं और हाल में इटारसी स्टेशन की घटना की तरह किसी प्रकार का शार्ट सर्किट या आग लगने के कारण परिचालन प्रणाली पूरी तरह ठप हो सकती है, जिसका असर ट्रेनों के आवागमन पर पड़ता है। वर्तमान स्थिति में रेलवे ने इटारसी स्टेशन पर अस्थायी पैनल लगाया है, जिसके माध्यम से अभी वह हर रोज करीब 100 ट्रेनों को पार कराने की कोशिश कर रहे हैं।
स्मोक डिटेक्टर लगा होता तो टल सकता था हादसा
इटारसी में ट्रेनों का आवागमन बाधित होने से समय-समय पर इस तरह की प्रौद्योगिकी प्रणालियों में बदलाव करने की आवश्यकता उजागर हुई है। इटारसी में घटित हाल में व्यवधान के विश्लेषण से यह बात सामने आती है कि यदि वहां स्मोक डिटेक्टर (धूम्र सूचक यंत्र) लगा होता तो इस स्थिति को टाला जा सकता था। हालांकि, यह व्यवधान तात्कालिक है, उम्मीद है कि शीघ्र की नया पैनल लग जाएगा और रेल यातायात पटरी पर लौट आएगा।
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इटारसी एक केंद्रीय रेलवे जंक्शन है। न केवल मुंबई-भोपाल- झांसी- दिल्ली से बल्कि पटना, भोपाल- नागपुर और मुंबई जबलपुर-इलाहाबाद- कानपुर मार्ग की गाड़ियां इस स्टेशन से होकर गुजरती हैं। पूर्व-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण रेलमार्ग के इंटर सेक्शन पर यह देश के सबसे बड़े रेलवे जंक्शनों में एक स्टेशन है। यह मध्य प्रदेश का एकमात्र रेलवे जंक्शन है, जहां 300 से अधिक गाड़ियों का रोजाना ठहराव होता है।
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रेल यातायात में बाधा की इस बड़ी घटना के कारण गाड़ियों में विलंब होने, रद होने, मार्ग परिवर्तन और गाड़ियों की स्थिति संबंधी सूचना नहीं मिलने के कारण झांसी व ग्वालियर के यात्रियों के बीच खलबली पैदा हो गई है। अधिकांश यात्रियों को अभी तक उस जटिलता का पता नहीं है, जिसके कारण ऐसी स्थिति पैदा हुई, क्योंकि अधिकतर लोगों को रूट रिले इंटर लॉकिंग प्रणाली की कार्य पद्धति और राष्ट्रव्यापी रेलवे यातायात का चक्का जाम होने के कारणों की जानकारी नहीं है।
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यह होता है रूट रिले इंटर लॉकिंग रूम नियंत्रण कक्ष
रूट- रिले इंटर लॉकिंग रूम नियंत्रण कक्ष का सबसे महत्वपूर्ण सिस्टम कंट्रोल रूम होता है, जहां से ट्रेनों के सिग्नलों और क्रॉसिंग का प्रबंधन किया जाता है। यह एक ऐसी प्रणाली है जिसके द्वारा जंक्शन स्टेशन पर मार्ग परिवर्तन के लिए केंद्रीय रूप में एक केबिल से सभी सिग्नलों और प्वाइंटों/ क्रॉसिंग का विद्युत उपकरणों के माध्यम से संचालन होता है। इस तरह की प्रणाली में काफी सघन वायरिंग और सर्किट लूप शामिल रहती हैं और हाल में इटारसी स्टेशन की घटना की तरह किसी प्रकार का शार्ट सर्किट या आग लगने के कारण परिचालन प्रणाली पूरी तरह ठप हो सकती है, जिसका असर ट्रेनों के आवागमन पर पड़ता है। वर्तमान स्थिति में रेलवे ने इटारसी स्टेशन पर अस्थायी पैनल लगाया है, जिसके माध्यम से अभी वह हर रोज करीब 100 ट्रेनों को पार कराने की कोशिश कर रहे हैं।
स्मोक डिटेक्टर लगा होता तो टल सकता था हादसा
इटारसी में ट्रेनों का आवागमन बाधित होने से समय-समय पर इस तरह की प्रौद्योगिकी प्रणालियों में बदलाव करने की आवश्यकता उजागर हुई है। इटारसी में घटित हाल में व्यवधान के विश्लेषण से यह बात सामने आती है कि यदि वहां स्मोक डिटेक्टर (धूम्र सूचक यंत्र) लगा होता तो इस स्थिति को टाला जा सकता था। हालांकि, यह व्यवधान तात्कालिक है, उम्मीद है कि शीघ्र की नया पैनल लग जाएगा और रेल यातायात पटरी पर लौट आएगा।