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तभी मिलेगा आरक्षण, जब मिलेगी कंफर्म बर्थ
ब्यूरो
Updated Sun, 22 Nov 2015 12:59 AM IST
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झांसी। रेलवे ने ट्रेन आगमन के निर्धारित समय से आधे घंटे पूर्व तक आरक्षित टिकट जारी कर दूसरा चार्ट बनाने की व्यवस्था अवश्य लागू कर दी है, मगर इस अवधि में उसी स्थिति में आरक्षित टिकट बन रहा है, जब बर्थ कंफर्म मिल रही है। वहीं, आधे घंटे पूर्व रिफंड की व्यवस्था शुरू होने से यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। प्रतिदिन समय से आरक्षित टिकटों के निरस्त न होने के कारण दर्जनों यात्रियों का किराया रेलवे के खजाने को भर रहा है।
रेलवे बारह नवंबर से पहले ट्रेन आने के चार घंटे पूर्व तक आरक्षित टिकट जारी करता था। इसके बाद आरक्षण चार्ट जारी हो जाता था। मगर अब गाड़ी आने के निर्धारित समय के हिसाब से (समय सारिणी के अनुसार) आधे घंटे तक आरक्षित टिकट मिलने लगा है। हालांकि, अभी भी पहला चार्ट चार घंटे पहले ही बनता है।
जबकि दूसरा चार्ट आधे घंटे पहले बनने लगा है। पहला चार्ट जारी होने के बाद दूसरा चार्ट बनने से पहले तक केवल उसी स्थिति में टिकट जारी हो रहे हैं, जब ट्रेन में कंफर्म टिकट उपलब्ध हैं। इससे यात्रियों को कोई खास लाभ नहीं हो पा रहा है, क्योंकि अधिकांश ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट कभी पूरी कंफर्म नहीं होती है।
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दूसरा, रेलवे पहले ट्रेन जाने के दो घंटे तक कंफर्म टिकट व आरएसी तथा वेटिंग टिकट की स्थिति पर तीन घंटे तक किराए का रिफंड (निर्धारित चार्ज काटने के उपरांत) वापस कर देता था। मगर अब ट्रेन आने के आधे घंटे पहले तक ही रिफंड दिया जा रहा है।
इस कारण अंतिम समय यात्रा स्थगित करने अथवा ट्रेन छूटने पर यात्री को रिफंड के तौर पर एक फूटी कौड़ी भी रेलवे वापस नहीं कर रहा है। इससे रेलवे का खजाना तो खूब भर रहा है। मगर यात्रियों की जेब अवश्य ढीली हो रही है, जिसकी रेलवे को कोई परवाह नहीं है।
जनरल टिकट पर टीटीई नहीं दे सकेंगे बर्थ
नई व्यवस्था में ट्रेन पर चलने वाले चेकिंग स्टाफ के हाथ पूरी तरह बांध दिए गए हैं। अभी कोच में खाली बर्थ होने पर चेकिंग कर्मी जनरल टिकट पर आरक्षित किराए के अंतर की रसीद बनाकर यात्री को सीट एलॉट कर देते थे। मगर अब वह चाहकर भी ऐसा नही कर सकेंगे।
दरअसल, टिकट चेकिंग कर्मियों को एक हैंड- हेल्ड मशीन थमाई जा रही है, जिसमें हर खाली बर्थ का ब्यौरा भरना होगा। खाली बर्थ भरते ही प्रतीक्षा सूची में शामिल यात्री का टिकट कंफर्म हो जाएगा और यह मेसेज यात्री के मोबाइल में पहुंच जाएगा। यात्री भी अपनी वेटिंग लिस्ट की पोजीशन ले सकता है।
रात की ट्रेनों का नहीं बन पा रहा दूसरा चार्ट
रेलवे आरक्षण कार्यालय सुबह आठ बजे से रात दस बजे तक खुलता है। इस दौरान ट्रेन आगमन के आधे घंटे पूर्व जारी होने वाला दूसरा चार्ट तो बन जा रहा है। मगर जो ट्रेनें रात दस बजे के बाद व सुबह आठ बजे से पहले आ रही हैं, उनका दूसरा चार्ट जारी नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में सीनियर डीसीएम दुर्गेश दुबे ने बताया कि रात में चार्ट बनाने के लिए व्यवस्था की जा रही है।
यह है नियम
रेलवे नियम के अनुसार स्लीपर व एसी के आरक्षित कोचों में केवल कंफर्म टिकट वाले यात्री ही सफर कर सकते हैं। वेटिंग लिस्ट में शामिल यात्रियों को यात्रा करने की परमीशन नहीं है। अगर वह वेटिंग टिकट पर यात्रा कर रहे हैं तो रेलवे के नियम के हिसाब से वह बेटिकट हैं।
चूंकि, भारतीय रेल में वेटिंग लंबी जाती है और बर्थ के कंफर्म होने की स्थिति कम रहती है। इस कारण वेटिंग टिकट के यात्रियों को सहानुभूति के कारण ट्रेन से उतारा नहीं जाता है, और न ही चेकिंग के दौरान उनसे जुर्माना वसूल किया जाता है।
रेलवे को ईडीआर की व्यवस्था से मिली निजात
अभी ट्रेन में यात्रा के दौरान अगर कोई यात्री अपनी बर्थ पर नहीं आता था तो चेकिंग कर्मी एक स्टेशन गुजरने के बाद दूसरे यात्री को बर्थ एलॉट कर देते थे। इसके बाद अपने अभिलेखों में यात्री को नोट टर्न अप दिखा देते थे। बाद में ईडीआर (एक्सपेंशन डाटा रिपोर्ट) फीडिंग में दिखा दिया जाता था कि यात्री ने यात्रा नहीं की। इसके बाद यात्री के खाते में बचे रुपये भेज दिए जाते थे। मगर अब नया नियम लागू होने से ईडीआर की व्यवस्था स्वत: समाप्त हो गई है।
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रेलवे बारह नवंबर से पहले ट्रेन आने के चार घंटे पूर्व तक आरक्षित टिकट जारी करता था। इसके बाद आरक्षण चार्ट जारी हो जाता था। मगर अब गाड़ी आने के निर्धारित समय के हिसाब से (समय सारिणी के अनुसार) आधे घंटे तक आरक्षित टिकट मिलने लगा है। हालांकि, अभी भी पहला चार्ट चार घंटे पहले ही बनता है।
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जबकि दूसरा चार्ट आधे घंटे पहले बनने लगा है। पहला चार्ट जारी होने के बाद दूसरा चार्ट बनने से पहले तक केवल उसी स्थिति में टिकट जारी हो रहे हैं, जब ट्रेन में कंफर्म टिकट उपलब्ध हैं। इससे यात्रियों को कोई खास लाभ नहीं हो पा रहा है, क्योंकि अधिकांश ट्रेनों में वेटिंग लिस्ट कभी पूरी कंफर्म नहीं होती है।
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दूसरा, रेलवे पहले ट्रेन जाने के दो घंटे तक कंफर्म टिकट व आरएसी तथा वेटिंग टिकट की स्थिति पर तीन घंटे तक किराए का रिफंड (निर्धारित चार्ज काटने के उपरांत) वापस कर देता था। मगर अब ट्रेन आने के आधे घंटे पहले तक ही रिफंड दिया जा रहा है।
इस कारण अंतिम समय यात्रा स्थगित करने अथवा ट्रेन छूटने पर यात्री को रिफंड के तौर पर एक फूटी कौड़ी भी रेलवे वापस नहीं कर रहा है। इससे रेलवे का खजाना तो खूब भर रहा है। मगर यात्रियों की जेब अवश्य ढीली हो रही है, जिसकी रेलवे को कोई परवाह नहीं है।
जनरल टिकट पर टीटीई नहीं दे सकेंगे बर्थ
नई व्यवस्था में ट्रेन पर चलने वाले चेकिंग स्टाफ के हाथ पूरी तरह बांध दिए गए हैं। अभी कोच में खाली बर्थ होने पर चेकिंग कर्मी जनरल टिकट पर आरक्षित किराए के अंतर की रसीद बनाकर यात्री को सीट एलॉट कर देते थे। मगर अब वह चाहकर भी ऐसा नही कर सकेंगे।
दरअसल, टिकट चेकिंग कर्मियों को एक हैंड- हेल्ड मशीन थमाई जा रही है, जिसमें हर खाली बर्थ का ब्यौरा भरना होगा। खाली बर्थ भरते ही प्रतीक्षा सूची में शामिल यात्री का टिकट कंफर्म हो जाएगा और यह मेसेज यात्री के मोबाइल में पहुंच जाएगा। यात्री भी अपनी वेटिंग लिस्ट की पोजीशन ले सकता है।
रात की ट्रेनों का नहीं बन पा रहा दूसरा चार्ट
रेलवे आरक्षण कार्यालय सुबह आठ बजे से रात दस बजे तक खुलता है। इस दौरान ट्रेन आगमन के आधे घंटे पूर्व जारी होने वाला दूसरा चार्ट तो बन जा रहा है। मगर जो ट्रेनें रात दस बजे के बाद व सुबह आठ बजे से पहले आ रही हैं, उनका दूसरा चार्ट जारी नहीं हो पा रहा है। इस संबंध में सीनियर डीसीएम दुर्गेश दुबे ने बताया कि रात में चार्ट बनाने के लिए व्यवस्था की जा रही है।
यह है नियम
रेलवे नियम के अनुसार स्लीपर व एसी के आरक्षित कोचों में केवल कंफर्म टिकट वाले यात्री ही सफर कर सकते हैं। वेटिंग लिस्ट में शामिल यात्रियों को यात्रा करने की परमीशन नहीं है। अगर वह वेटिंग टिकट पर यात्रा कर रहे हैं तो रेलवे के नियम के हिसाब से वह बेटिकट हैं।
चूंकि, भारतीय रेल में वेटिंग लंबी जाती है और बर्थ के कंफर्म होने की स्थिति कम रहती है। इस कारण वेटिंग टिकट के यात्रियों को सहानुभूति के कारण ट्रेन से उतारा नहीं जाता है, और न ही चेकिंग के दौरान उनसे जुर्माना वसूल किया जाता है।
रेलवे को ईडीआर की व्यवस्था से मिली निजात
अभी ट्रेन में यात्रा के दौरान अगर कोई यात्री अपनी बर्थ पर नहीं आता था तो चेकिंग कर्मी एक स्टेशन गुजरने के बाद दूसरे यात्री को बर्थ एलॉट कर देते थे। इसके बाद अपने अभिलेखों में यात्री को नोट टर्न अप दिखा देते थे। बाद में ईडीआर (एक्सपेंशन डाटा रिपोर्ट) फीडिंग में दिखा दिया जाता था कि यात्री ने यात्रा नहीं की। इसके बाद यात्री के खाते में बचे रुपये भेज दिए जाते थे। मगर अब नया नियम लागू होने से ईडीआर की व्यवस्था स्वत: समाप्त हो गई है।