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रेडियोधर्मी पदार्थ के शरीर में जाने से रोकने का प्रयास हो
Jhansi
Updated Sat, 09 Dec 2017 02:00 AM IST
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- फोटो : demo
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बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में रेडियो केमिस्ट्री एंड एप्लीकेशन ऑफ रेडियो आईसोटोप विषयक राष्ट्रीय कार्यशाला में भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आरवी कोलेकर ने विकिरण से बचाव विषय पर व्याख्यान देते हुए कहा कि आज प्रयास होना चाहिए कि रेडियोधर्मी पदार्थ शरीर के अंदर न जा पाए।
रसायन विभाग और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के रेडियो रसायन अनुभाग की इंडियन एसोसिएशन ऑफ न्यूक्लियर केमिस्ट्स एंड एलाईड साइंटिस्ट के संयुक्त तत्वावधान में हुई कार्यशाला में उन्होंने कहा कि विकिरण से दो प्रकार की हानियां होती हैं। पहली जब विकिरण श्रोत पाउडर या अन्य रूप में मानव शरीर के अंदर हो। रेडियोधर्मी पदार्थों से काम करते हुए समय दूरी और अवरोधन अहम अवयव हैं। देश में विकिरण से संबंधित आपदा प्रबंधन के लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के रूप में सक्षम नोडल एजेंसी है। भाभा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. माधव आलिया ने कृषि और खाद्य पदार्थ संरक्षण में विकिरण की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। कहा कि विकिरण के उपयोग से बीजों की गुणवत्ता बढ़ाकर फसलों की पैदावार बढ़ाई जा सकती है। विकिरण के उपयोग से खाद्य सामग्री, मसाले आदि में मौजूद बैक्टीरिया का विकिर्णित करके उसे नष्ट होने अथवा सड़ने से बचाया जा सकता है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रघुनाथ आचार्य ने न्यूक्लियर एनेलिटिकल तकनीकों का विश्लेषक रसायनिकी में उपयोगिता के बारे में बताया। कहा कि किसी पदार्थ को जब न्यूट्रान या अन्य किसी आवेषित कण जैसे प्रोटोन से प्रकीर्णित करते हैं, तो परमाणु का नाभिक अस्थिर नाभिक में बदल जाता है। गामा और एक्स किरणें उत्सर्जित करने लगता है। इन नाभिकों के प्रकीर्णन के लिए न्यूट्रान श्रोत जैसे परमाणु भट्टी या त्वरण की जरूरत होती है।
कार्यशाला संयोजक डॉ. नंदलाल मिश्रा और आयोजन सचिव डॉ. रेखा लगरखा ने बताया कि भाभा केंद्र के वैज्ञानिकों ने कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे से मुलाकात कर कार्यशाला की जानकारी दी।
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रसायन विभाग और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के रेडियो रसायन अनुभाग की इंडियन एसोसिएशन ऑफ न्यूक्लियर केमिस्ट्स एंड एलाईड साइंटिस्ट के संयुक्त तत्वावधान में हुई कार्यशाला में उन्होंने कहा कि विकिरण से दो प्रकार की हानियां होती हैं। पहली जब विकिरण श्रोत पाउडर या अन्य रूप में मानव शरीर के अंदर हो। रेडियोधर्मी पदार्थों से काम करते हुए समय दूरी और अवरोधन अहम अवयव हैं। देश में विकिरण से संबंधित आपदा प्रबंधन के लिए भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के रूप में सक्षम नोडल एजेंसी है। भाभा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. माधव आलिया ने कृषि और खाद्य पदार्थ संरक्षण में विकिरण की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। कहा कि विकिरण के उपयोग से बीजों की गुणवत्ता बढ़ाकर फसलों की पैदावार बढ़ाई जा सकती है। विकिरण के उपयोग से खाद्य सामग्री, मसाले आदि में मौजूद बैक्टीरिया का विकिर्णित करके उसे नष्ट होने अथवा सड़ने से बचाया जा सकता है। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रघुनाथ आचार्य ने न्यूक्लियर एनेलिटिकल तकनीकों का विश्लेषक रसायनिकी में उपयोगिता के बारे में बताया। कहा कि किसी पदार्थ को जब न्यूट्रान या अन्य किसी आवेषित कण जैसे प्रोटोन से प्रकीर्णित करते हैं, तो परमाणु का नाभिक अस्थिर नाभिक में बदल जाता है। गामा और एक्स किरणें उत्सर्जित करने लगता है। इन नाभिकों के प्रकीर्णन के लिए न्यूट्रान श्रोत जैसे परमाणु भट्टी या त्वरण की जरूरत होती है।
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कार्यशाला संयोजक डॉ. नंदलाल मिश्रा और आयोजन सचिव डॉ. रेखा लगरखा ने बताया कि भाभा केंद्र के वैज्ञानिकों ने कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे से मुलाकात कर कार्यशाला की जानकारी दी।
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