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छोटों को सजा, बड़े ले रहे मजा
jhansi
Updated Tue, 11 Apr 2017 01:16 AM IST
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eletricity meater
- फोटो : demo
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बिजली चोरी रोकने के लिए विभागीय अफसरों की कार्रवाई का डंडा आम लोगों पर ही चल पाता है। छोटे चोर सजा पा जाते हैं, जबकि बड़े चोर मुफ्त की बिजली का मजा लेते हैं, जिनकी ऊंची पहुंच के कारण कार्रवाई नहीं होती है। महानगर में तीस फीसदी बिजली की चोरी हो रही है।
प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बिजली चोरी रोकने के लिए हर जिले में अलग थाने और विशेष न्यायालय बनाने की बात कही हैं। चार साल पहले सपा सरकार में इस तरह का थाना खोलने की योजना बनाई गई थी, लेकिन उसका क्रियान्वयन नहीं हो सका। बिजली चोरी रोकने के लिए नए नियम या व्यवस्थाएं बनाने की जरूरत नहीं है, जो कानून पहले से हैं, उन्हें बिना पक्षपात के कड़ाई से पालन कराने की जरूरत है। अभी भी हर जनपद में बिजली चोरी रोकने के लिए विजिलेंस की टीम काम कर रही हैं। लेकिन, आंकड़े यही बया कर रहे है विजिलेंस के हाथ सिर्फ गरीबों तक सीमित है।
पिछले एक साल में बिजली चोरी के नौ सौ मामले पकड़े गए, जिनमें गरीबों को ही आरोपी बनाया गया। इसके अलावा विद्युत कार्यालयों में बिल ठीक कराने, नया कनेक्शन लेने जैसे मामलों में भी अधिकांश गरीब ही हैं, जिनकी स्थिति को देखने के बाद उनकी समस्याओं को दूर करने की जगह सिर्फ आंकड़ेबाजी कर मोटी रकम वाले बिल थमा दिए जाते हैं। वहीं, बिजली चोरी की स्थिति जस की तस बनी हुई है। महानगर में यह आंकड़ा 30 और ग्रामीण क्षेत्रों में 50 फीसदी बना हुआ है।
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इंसेट
सबसे अधिक इस तरह के मामले
- बिना कनेक्शन के कच्चे घर मेें कटिया डालकर चोरी करते पकड़े जाना
- बकाये पर कटे कनेक्शन पर बिजली जलाते पकड़े जाना
- खेतों में चोरी की बिजली से सिंचाई की मोटर चलाते पकड़े जाना
- घरेलू कनेक्शन से घर में ही खुली दुकान में बिजली जलाते पाए जाना
- विद्युत नियमों की बाधा के कारण कनेक्शन न मिलने पर कटिया डालकर चोरी करते पकड़े जाना
ये है कानून
बिजली चोरी करते पाए जाने पर अगर अब तय शमन शुल्क जमा नहीं करते हैं तो निम्न धाराओं के अंतर्गत आपको तीन माह से पांच साल तक ही सजा हो सकती है।
- धारा 135 विद्युत अधिनियम: डायरेक्ट तारों पर कटिया डालकर, घर से दुकान में बिजली जलाने जैसे मामलों में।
- धारा 136 विद्युत अधिनियम: बिजली के सरकारी उपकरणों को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों में।
- धारा 137 विद्युत अधिनियम: विद्युत चोरी का सामान बरामद होने जैसे मामलों में।
- धारा 138 विद्युत अधिनियत: मीटर से छेड़छाड़, बकाये पर कटे कनेक्शन पर बिजली जलाने जैसे मामलों में।
- धारा 139 विद्युत अधिनियम: बिजली की बर्बादी करने जैसे मामलों में।
- धारा 140 विद्युत अधिनियम: बिजली के तार और अन्य उपकरण चोरी करने जैसे मामलों में।
- धारा 141 विद्युत अधिनियम: सरकारी लाइट के कनेक्शन से बिजली का उपभोग करने जैसे मामलों में।
जांच में होगी आसानी
अभियंता संघ के प्रदेश महासचिव राजीव सिंह ने बताया कि संघ अलग थाना खोलने की कई सालों से मांग कर रहा है। अभी रिपोर्ट दर्ज कराने में दिक्कत होती है। साथ ही जांच में और ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। बिजली मामलों के लिए अलग थाना बनने से अधिकारी सीधा जुड़ सकेंगे। इससे जांच में आसानी तो होगी ही मामलों का भी जल्द निस्तारण हो सकेगा।
पक्षपात का आरोप गलत
बिजली चोरी रोकने के लिए नियमित प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले एक साल में हमने मंडल के तीनों जिलों में एक हजार से अधिक बिजली चोरी के मामले पकड़े हैं। जहां की भी शिकायत मिलती है कार्रवाई की जाती है। पक्षपात करने का आरोप गलत है।
सुरेंद्र सिंह, अवर अभियंता, प्रवर्तन दल, बिजली विभाग
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प्रदेश के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने बिजली चोरी रोकने के लिए हर जिले में अलग थाने और विशेष न्यायालय बनाने की बात कही हैं। चार साल पहले सपा सरकार में इस तरह का थाना खोलने की योजना बनाई गई थी, लेकिन उसका क्रियान्वयन नहीं हो सका। बिजली चोरी रोकने के लिए नए नियम या व्यवस्थाएं बनाने की जरूरत नहीं है, जो कानून पहले से हैं, उन्हें बिना पक्षपात के कड़ाई से पालन कराने की जरूरत है। अभी भी हर जनपद में बिजली चोरी रोकने के लिए विजिलेंस की टीम काम कर रही हैं। लेकिन, आंकड़े यही बया कर रहे है विजिलेंस के हाथ सिर्फ गरीबों तक सीमित है।
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पिछले एक साल में बिजली चोरी के नौ सौ मामले पकड़े गए, जिनमें गरीबों को ही आरोपी बनाया गया। इसके अलावा विद्युत कार्यालयों में बिल ठीक कराने, नया कनेक्शन लेने जैसे मामलों में भी अधिकांश गरीब ही हैं, जिनकी स्थिति को देखने के बाद उनकी समस्याओं को दूर करने की जगह सिर्फ आंकड़ेबाजी कर मोटी रकम वाले बिल थमा दिए जाते हैं। वहीं, बिजली चोरी की स्थिति जस की तस बनी हुई है। महानगर में यह आंकड़ा 30 और ग्रामीण क्षेत्रों में 50 फीसदी बना हुआ है।
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सबसे अधिक इस तरह के मामले
- बिना कनेक्शन के कच्चे घर मेें कटिया डालकर चोरी करते पकड़े जाना
- बकाये पर कटे कनेक्शन पर बिजली जलाते पकड़े जाना
- खेतों में चोरी की बिजली से सिंचाई की मोटर चलाते पकड़े जाना
- घरेलू कनेक्शन से घर में ही खुली दुकान में बिजली जलाते पाए जाना
- विद्युत नियमों की बाधा के कारण कनेक्शन न मिलने पर कटिया डालकर चोरी करते पकड़े जाना
ये है कानून
बिजली चोरी करते पाए जाने पर अगर अब तय शमन शुल्क जमा नहीं करते हैं तो निम्न धाराओं के अंतर्गत आपको तीन माह से पांच साल तक ही सजा हो सकती है।
- धारा 135 विद्युत अधिनियम: डायरेक्ट तारों पर कटिया डालकर, घर से दुकान में बिजली जलाने जैसे मामलों में।
- धारा 136 विद्युत अधिनियम: बिजली के सरकारी उपकरणों को नुकसान पहुंचाने जैसे मामलों में।
- धारा 137 विद्युत अधिनियम: विद्युत चोरी का सामान बरामद होने जैसे मामलों में।
- धारा 138 विद्युत अधिनियत: मीटर से छेड़छाड़, बकाये पर कटे कनेक्शन पर बिजली जलाने जैसे मामलों में।
- धारा 139 विद्युत अधिनियम: बिजली की बर्बादी करने जैसे मामलों में।
- धारा 140 विद्युत अधिनियम: बिजली के तार और अन्य उपकरण चोरी करने जैसे मामलों में।
- धारा 141 विद्युत अधिनियम: सरकारी लाइट के कनेक्शन से बिजली का उपभोग करने जैसे मामलों में।
जांच में होगी आसानी
अभियंता संघ के प्रदेश महासचिव राजीव सिंह ने बताया कि संघ अलग थाना खोलने की कई सालों से मांग कर रहा है। अभी रिपोर्ट दर्ज कराने में दिक्कत होती है। साथ ही जांच में और ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है। बिजली मामलों के लिए अलग थाना बनने से अधिकारी सीधा जुड़ सकेंगे। इससे जांच में आसानी तो होगी ही मामलों का भी जल्द निस्तारण हो सकेगा।
पक्षपात का आरोप गलत
बिजली चोरी रोकने के लिए नियमित प्रयास किए जा रहे हैं। पिछले एक साल में हमने मंडल के तीनों जिलों में एक हजार से अधिक बिजली चोरी के मामले पकड़े हैं। जहां की भी शिकायत मिलती है कार्रवाई की जाती है। पक्षपात करने का आरोप गलत है।
सुरेंद्र सिंह, अवर अभियंता, प्रवर्तन दल, बिजली विभाग