फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Pukrayan Incident: panic among all general

पुखरायां हादसा: दहशत के बीच सब सामान्य

Tue, 20 Dec 2016 12:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Updated Tue, 20 Dec 2016 12:58 AM IST
विज्ञापन
 Pukrayan Incident: panic among all general
train, jhansi news - फोटो : demo
पुखरायां और मलासा रेलवे ट्रैक पर यातायात सामान्य तो हो गया, लेकिन यहां ट्रेन में जरा सी आवाज अभी भी लोगों को दहशत दे देती है। इस ट्रैक पर इंदौर पटना एक्सप्रेस के दुर्घटनाग्रस्त होने को आज एक माह पूरा हो गया है। हादसा क्यों और कैसे हुआ, इसकी जानकारी के लिए रेलवे को जांच रिपोर्ट का इंतजार है। जांच रिपोर्ट मिलने के बाद रेलवे हादसे से बचने के कारणों पर मंथन करेगा।
विज्ञापन


20 नवंबर को तड़के 3.03 बजे पुखरायां और मलासा के बीच इंदौर-पटना एक्सप्रेस दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। 14 डिब्बे क्षतिग्रस्त हुए थे, इसमें 152 यात्रियों की मौत व 200 से अधिक जख्मी हो गए थे। जो हादसे के शिकार बने, उनके लिए जिंदगी भर उसका दर्द बना रहेगा। रेलवे ने भी मुआवजा देकर अपना फर्ज पूरा कर लिया। रेलवे ने कानपुर ट्रैक दुरुस्त करने का दावा कर फिर से इस लाइन पर 110 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से ट्रेनें दौड़ाना शुरू कर दिया है। मगर, एक माह बाद भी रेलवे की जांच हादसे के कारण के निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी है। 
विज्ञापन


एक हफ्ते पहले ही हर बिंदु पर जांच करने के उपरांत जांच प्रभारी मुख्य संरक्षा आयुक्त (पूर्वी परिमंडल) पीके आचार्य कोलकाता लौट गए थे, लेकिन उनके निर्देश पर दो दिन पूर्व फिर से दुर्घटनास्थल पर रखी क्षतिग्रस्त पटरियों की फोटोग्राफी कराई गई थी। साथ ही सोमवार को उन्होंने उत्तर मध्य रेलवे के कई अफसरों को कोलकाता बुलाया। इससे लगता है कि जांच रिपोर्ट का जल्द खुलासा नहीं होगा। ऐसे में पूर्व के हादसों की तरह ही यह जांच भी ठंडे बस्ते में न चली जाए। इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन



‘ जांच रिपोर्ट आने पर ही हादसे के कारण का पता हो सकेगा। वैसे ट्रेन संचालन में संरक्षा से जुड़े हर बिंदु का गंभीरता से ध्यान रखा जा रहा है।’
मनोज कुमार सिंह, पीआरओ। 

यह उठाए गए कदम 
- दस अल्ट्रासोनिक फ्ला डिटेक्टर मशीनों (यूएसएफडी) को कानपुर ट्रैक की पटरियों की जांच में लगाया। इन मशीनों की मदद से झांसी-कानपुर के मध्य 200 किलोमीटर ट्रैक की जांच की गई। 

- ट्रैक की जरूरत के अनुसार ट्रैक पर वेल्डिंग की गई और चाबियां कसी गईं। कई जगह पटरियों के पास गिट्टी बढ़ाने का काम हुआ।
- सतर्कता जांचने के लिए रात के समय ट्रेनों के इंजन में अफसरों की ड्यूटी लगाई जा रही है। गैर तकनीकी अधिकारियों की ड्यूटी क्रासिंग गेटों पर लगाई हैं।

इन पर नहीं दिया गया ध्यान 
रात में पटरियों पर पेट्रोलिंग के लिए ट्रैकमैनों (गैंगमैन) को पटरियों पर लगाया जाता है। मगर, हादसे वाले सेक्शन में पेट्रोलिंग नहीं हो रही थी। कर्मचारी रेलवे अफसरों के बंगलों पर काम कर रहे थे। अधिकांश सेक्शनों का एक सा ही हाल है। रेलवे कर्मचारी ट्रैकमेन एसोसिएशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी रवि के नेतृत्व में ट्रैकमैनों ने रेलमंत्री से मुलाकात कर अवगत कराया था कि बंगलों पर लगे ट्रैकमेन, चाबी मैन से जहां रेलवे को करोड़ों का नुकसान हो रहा है, वहीं संरक्षा से भी सीधा खिलवाड़ किया जा रहा है। इसके बाद भी रेल प्रशासन नहीं चेता। हालांकि, हादसे के बाद संबंधित सेक्शन में पेट्रोलिंग तो शुरू कर दी गई, मगर अब तक बंगलों में लगे ट्रैकमैनों को हटाने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed