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पटलों पर बाबुओं का कब्जा
ब्यूरो
Updated Tue, 12 Jan 2016 01:09 AM IST
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झांसी। राजभवन से जारी अध्यादेश की अनदेखी कर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में बाबुओं के पटल परिवर्तन नहीं किए जा रहे हैं। कई बाबू अपनी नियुक्ति के बाद से बराबर एक ही कुर्सी पर जमे हैं, जबकि हर तीन वर्ष में पटल परिवर्तन किए जाने का नियम है।
यूनिवर्सिटी के अध्यादेश में एक पटल पर बाबुओं के अधिकतम तीन वर्ष तक की तैनाती का नियम है। हर बात में अध्यादेश का हवाला देकर काम करने वाला विश्वविद्यालय प्रशासन बाबुओं के पटल परिवर्तन को लेकर इतना उदासीन रवैया अपनाए है कि उसे राजभवन की कोई चिंता नहीं है, जिस अध्यादेश पर खुद राजभवन अपनी मुहर लगा चुका है, उसकी अवहेलना करना विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है।
विश्वविद्यालय में कई विभागों में तीन साल से अधिक समय से पटलों पर बाबू जमे हैं। हाल यह है कि नियुक्ति की तारीख से कुछ बाबुओं की कुर्सी नहीं बदली गई है। इस दौरान विश्वविद्यालय में कई निजाम आए और चले गए, लेकिन यह बात समझ से परे है कि नियुक्ति की तारीख से बाबुओं का पटल परिवर्तन क्यों नहीं किया गया ? अब यूनिवर्सिटी के निजाम फिर बदल गए हैं, इनसे नियमों के अनुरूप बाबुओं के फेरबदल की उम्मीद लगाई जा रही है।
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‘सूची मंगवाकर देखा जाएगा कि किन विभागों/पटलों पर कर्मचारी तीन वर्ष से अधिक समय से तैनात हैं। इसके बाद शीघ्र ही अध्यादेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।’ - प्रो. सुरेंद्र दुबे, कुलपति
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यूनिवर्सिटी के अध्यादेश में एक पटल पर बाबुओं के अधिकतम तीन वर्ष तक की तैनाती का नियम है। हर बात में अध्यादेश का हवाला देकर काम करने वाला विश्वविद्यालय प्रशासन बाबुओं के पटल परिवर्तन को लेकर इतना उदासीन रवैया अपनाए है कि उसे राजभवन की कोई चिंता नहीं है, जिस अध्यादेश पर खुद राजभवन अपनी मुहर लगा चुका है, उसकी अवहेलना करना विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा रहा है।
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विश्वविद्यालय में कई विभागों में तीन साल से अधिक समय से पटलों पर बाबू जमे हैं। हाल यह है कि नियुक्ति की तारीख से कुछ बाबुओं की कुर्सी नहीं बदली गई है। इस दौरान विश्वविद्यालय में कई निजाम आए और चले गए, लेकिन यह बात समझ से परे है कि नियुक्ति की तारीख से बाबुओं का पटल परिवर्तन क्यों नहीं किया गया ? अब यूनिवर्सिटी के निजाम फिर बदल गए हैं, इनसे नियमों के अनुरूप बाबुओं के फेरबदल की उम्मीद लगाई जा रही है।
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‘सूची मंगवाकर देखा जाएगा कि किन विभागों/पटलों पर कर्मचारी तीन वर्ष से अधिक समय से तैनात हैं। इसके बाद शीघ्र ही अध्यादेश के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।’ - प्रो. सुरेंद्र दुबे, कुलपति