{"_id":"5f8f448f8ebc3edc2069e76e","slug":"poshahar-vanchit-more-than-80-thousand-boys-jhansi-news-jhs179151329","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्सी हजार से अधिक बच्चे पोषाहार से वंचित","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्सी हजार से अधिक बच्चे पोषाहार से वंचित
विज्ञापन
झांसी। पोषाहार वितरण से जुड़ी कंपनियों के टेंडर निरस्त हो जाने का सीधा असर गर्भवती महिलाओं एवं बच्चों पर पड़ रहा है। पिछले दो माह से उनको पोषाहार नहीं मिल रहा। अधिकारियों का कहना है वैकल्पिक व्यवस्था न होने से दिसंबर तक इसका इंतजार करना पड़ सकता है। इस वजह से करीब 80 हजार छोटे बच्चों समेत 22 हजार गर्भवती महिलाओं को पोषाहार से वंचित होना पड़ रहा है।
कुपोषण से निपटने को विभिन्न आयुवर्ग के बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को पोषाहार मुहैया कराया जाता था लेकिन, इसकी आपूर्ति में ही कई गड़बड़ियां प्रकाश में आने लगीं। पोषाहार आपूर्ति कपंनियों के एकाधिकार का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। तमाम शिकायतें मिलने पर सरकार ने पंजीरी कंपनियों की टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर दी। इसके निरस्त होने से अगस्त माह तक ही पोषाहार वितरित किया जा सका। इसके बाद सितंबर माह से यहां पोषाहार वितरण बंद हो गया। अधिकारियों के मुताबिक पंजीरी कंपनियों के वर्चस्व को खत्म करने को सरकार नई रणनीति तैयार कर रही।
यह काम स्वयं सहायता समूहों को देने की तैयारी हो रही लेकिन, सरकार ने पोषाहार वितरण की कोई वैकल्पिक व्यवस्था ही तैयार नहीं की। इस वजह से पोषाहार वितरण पिछले माह से पूरी तरह ठप है। अधिकारियों का कहना है दिसंबर तक यह काम दुबारा शुरू हो सकेगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक झांसी में छह माह से तीन वर्ष के 53864 बच्चे, तीन वर्ष से छह वर्ष तक के 34093 बच्चे सहित 22161 गर्भवती महिलाओं को पोषाहार वितरित किया जाता था। लॉकडॉउन के दौरान गांव वापस आने वालों में 1700 बच्चे एवं महिलाओं को पोषाहार दिए गए।
विज्ञापन
पोषाहार के लिए नई व्यवस्था बनाई जा रही है। उसके माध्यम से ही वितरण कराया जाएगा। अभी कोई वैकल्पिक व्यवस्था हमारे पास नहीं है।
- नरेंद्र कुमार जिला कार्यक्रम अधिकारी
विज्ञापन
कुपोषण से निपटने को विभिन्न आयुवर्ग के बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं को पोषाहार मुहैया कराया जाता था लेकिन, इसकी आपूर्ति में ही कई गड़बड़ियां प्रकाश में आने लगीं। पोषाहार आपूर्ति कपंनियों के एकाधिकार का मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा। तमाम शिकायतें मिलने पर सरकार ने पंजीरी कंपनियों की टेंडर प्रक्रिया निरस्त कर दी। इसके निरस्त होने से अगस्त माह तक ही पोषाहार वितरित किया जा सका। इसके बाद सितंबर माह से यहां पोषाहार वितरण बंद हो गया। अधिकारियों के मुताबिक पंजीरी कंपनियों के वर्चस्व को खत्म करने को सरकार नई रणनीति तैयार कर रही।
विज्ञापन
यह काम स्वयं सहायता समूहों को देने की तैयारी हो रही लेकिन, सरकार ने पोषाहार वितरण की कोई वैकल्पिक व्यवस्था ही तैयार नहीं की। इस वजह से पोषाहार वितरण पिछले माह से पूरी तरह ठप है। अधिकारियों का कहना है दिसंबर तक यह काम दुबारा शुरू हो सकेगा। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक झांसी में छह माह से तीन वर्ष के 53864 बच्चे, तीन वर्ष से छह वर्ष तक के 34093 बच्चे सहित 22161 गर्भवती महिलाओं को पोषाहार वितरित किया जाता था। लॉकडॉउन के दौरान गांव वापस आने वालों में 1700 बच्चे एवं महिलाओं को पोषाहार दिए गए।
विज्ञापन
पोषाहार के लिए नई व्यवस्था बनाई जा रही है। उसके माध्यम से ही वितरण कराया जाएगा। अभी कोई वैकल्पिक व्यवस्था हमारे पास नहीं है।
- नरेंद्र कुमार जिला कार्यक्रम अधिकारी