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पुलिस ने लीपापोती कर ठंडे बस्ते में डाली डकैती की वारदात
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झांसी। पांच साल पहले दवा कारोबारी के घर हुई डकैती की सनसनीखेज वारदात ने सुरक्षा व्यवस्था की धज्जियां उड़ाकर रख दीं थीं। घटना के विरोध में व्यापारियों से लेकर राजनीतिक दलों के नुमाइंदे तक सड़कों पर उतर आए थे, जबकि शहर के लोग सहम से गए थे। पुलिस के माथे पर भी बल पड़ गए थे और सक्रियता दिखाते हुए हाथ-पैर मारने शुरू कर दिए थे। लेकिन, पुलिस अपराधियों तक नहीं पहुंच पाई थी। यहां तक कि सुराग भी नहीं लगा पाई थी। जबकि, घटना की पड़ताल के लिए पुलिस की ओर से 73 पर्चे काटे गए थे और एक के बाद एक तीन विवेचक बदले थे। लेकिन, नतीजा सिफर ही रहा था। दो साल बाद पुलिस की ओर से पीड़ित को बताया गया था कि लखनऊ में एसटीएफ ने बदमाशों को धर दबोचा है। लेकिन, लूट का माल बरामद नहीं हो पाया है। लेकिन, पुलिस के इस दावे पर पीड़ित परिवार अब भी इत्तेफाक नहीं रखता है। उनका कहना है कि पुलिस ने लीपापोती कर घटना को ठंडे बस्ते में डाल दिया।
आठ बदमाश हुए थे दाखिल, बंधक बनाकर की थी मारपीट
सिविल लाइन में चंदा होटल के पीछे निवासी दवा कारोबारी अनिल और विनय दरगढ़ के घर 24 जुलाई 2016 की रात तकरीबन दो बजे एक के बाद एक आठ नकाबपोश बदमाश दाखिल हो गए थे। इससे पहले कि परिवार के लोग कुछ समय पाते, चाकू और तमंचों से लैस बदमाशों ने दवा कारोबारी और उनके परिवार के सदस्यों को बंधक बनाकर बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी थी। परिजनों के मुंह में कपड़े ठूंस दिए गए थे और हाथों को पीछे बांध दिया गया था। तिजोरियां और अलमारियां खोलकर बदमाशों ने सात-आठ लाख रुपये नकद और 20-22 लाख रुपये के जेवर समेट लिए थे। एक घंटे से अधिक समय तक बदमाश बेखौफ अंदाज में दवा कारोबारी के घर घटना को अंजाम देते रहे थे। पड़ोसी को इसकी भनक लगी तो उन्होंने बाहर आकर बदमाशों को ललकारा, लेकिन वे पड़ोसियों पर फायर झोंकते हुए बेधड़क मौके से निकल गए थे।
पुलिस ने कई बार दोहराया क्राइम सीन, 30 से पूछताछ, नतीजा सिफर
घनी आबादी के बीच घटी इस घटना से पुलिस बेहद दबाव में आ गई थी। पुलिस के उच्चाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए थे। उप्र व मप्र के कई जिलों की पुलिस से संपर्क साधा गया था। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने कई बार क्राइम सीन दोहराया था। तीस लोगों को पूछताछ के लिए उठाया भी था। लेकिन, नतीजा सिफर ही रहा था। पुलिस अपराधियों का सुराग तक नहीं लगा पाई। 2018 में पुलिस को ओर से पीड़ित परिवार को सूचना दी गई थी, अपराधियों को एसटीएफ ने लखनऊ में धर दबोचा है। लेकिन, न तो पीड़ित पक्ष से शिनाख्त कराई गई और न ही लूट का माल पुलिस बरामद कर पाई।
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पुलिस ने किया खुलासे का खेल: दरगढ़
दवा कारोबारी विनय दरगढ़ ने बताया कि पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने का दावा तो जरूर किया, परंतु उनकी शिनाख्त नहीं कराई गई। इतना ही नहीं, लूट का माल भी पुलिस बरामद नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मामले की लीपापोती कर पल्ला झाड़ लिया। पूरी उम्मीद है कि घटना को अंजाम देने वाले अब भी बेखौफ घूम रहे होंगे और अपराधों को अंजाम दे रहे होंगे। उन्होंने कहा कि घटना को याद कर पांच साल बाद भी परिवार के लोग सहम उठते हैं।
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आठ बदमाश हुए थे दाखिल, बंधक बनाकर की थी मारपीट
सिविल लाइन में चंदा होटल के पीछे निवासी दवा कारोबारी अनिल और विनय दरगढ़ के घर 24 जुलाई 2016 की रात तकरीबन दो बजे एक के बाद एक आठ नकाबपोश बदमाश दाखिल हो गए थे। इससे पहले कि परिवार के लोग कुछ समय पाते, चाकू और तमंचों से लैस बदमाशों ने दवा कारोबारी और उनके परिवार के सदस्यों को बंधक बनाकर बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी थी। परिजनों के मुंह में कपड़े ठूंस दिए गए थे और हाथों को पीछे बांध दिया गया था। तिजोरियां और अलमारियां खोलकर बदमाशों ने सात-आठ लाख रुपये नकद और 20-22 लाख रुपये के जेवर समेट लिए थे। एक घंटे से अधिक समय तक बदमाश बेखौफ अंदाज में दवा कारोबारी के घर घटना को अंजाम देते रहे थे। पड़ोसी को इसकी भनक लगी तो उन्होंने बाहर आकर बदमाशों को ललकारा, लेकिन वे पड़ोसियों पर फायर झोंकते हुए बेधड़क मौके से निकल गए थे।
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पुलिस ने कई बार दोहराया क्राइम सीन, 30 से पूछताछ, नतीजा सिफर
घनी आबादी के बीच घटी इस घटना से पुलिस बेहद दबाव में आ गई थी। पुलिस के उच्चाधिकारी भी मौके पर पहुंच गए थे। उप्र व मप्र के कई जिलों की पुलिस से संपर्क साधा गया था। मौके पर पहुंचकर पुलिस ने कई बार क्राइम सीन दोहराया था। तीस लोगों को पूछताछ के लिए उठाया भी था। लेकिन, नतीजा सिफर ही रहा था। पुलिस अपराधियों का सुराग तक नहीं लगा पाई। 2018 में पुलिस को ओर से पीड़ित परिवार को सूचना दी गई थी, अपराधियों को एसटीएफ ने लखनऊ में धर दबोचा है। लेकिन, न तो पीड़ित पक्ष से शिनाख्त कराई गई और न ही लूट का माल पुलिस बरामद कर पाई।
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पुलिस ने किया खुलासे का खेल: दरगढ़
दवा कारोबारी विनय दरगढ़ ने बताया कि पुलिस ने अपराधियों को पकड़ने का दावा तो जरूर किया, परंतु उनकी शिनाख्त नहीं कराई गई। इतना ही नहीं, लूट का माल भी पुलिस बरामद नहीं कर पाई। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मामले की लीपापोती कर पल्ला झाड़ लिया। पूरी उम्मीद है कि घटना को अंजाम देने वाले अब भी बेखौफ घूम रहे होंगे और अपराधों को अंजाम दे रहे होंगे। उन्होंने कहा कि घटना को याद कर पांच साल बाद भी परिवार के लोग सहम उठते हैं।