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आस्थावान चोर: मंदिर पहुंचकर भगवान को चढ़ाया प्रसाद, फिर चुरा लिया भगवान का मुकुट-जेवरात; भाभी का कराना था इलाज
Wed, 13 Sep 2023 09:23 PM IST
श्याम जी.
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
अमर उजाला नेटवर्क, झांसी
Published by: श्याम जी.
Updated Wed, 13 Sep 2023 09:23 PM IST
सार
चोर ने प्रसाद लेने के बाद भगवान से प्रार्थना करते हुए कहा कि आज तेरे घर पर चोरी करुंगा। दूसरी जगह चोरी करने से अच्छा है, जितने पैसों जरूरत है आप ही दे दो। इसके बाद उसने जरूरत भर के चांदी के जेवरात चुरा लिए।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : social media
विस्तार
जन्माष्टमी के दिन मोंठ के मुरली मनोहर मंदिर में भगवान कृष्ण के चांदी के मुकुट समेत अन्य जेवरात चोरी करने वाले चोर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। चोर ने खुद ही पूरी घटना के बारे में खुलासा करते हुए बताया कि बीमार भाभी के इलाज के लिए उसे 35-40 हजार रुपये की जरूरत थी। उसने यह पैसे भगवान से मांगे। उसके बाद जरूरत भर के चांदी के जेवरात चुरा लिए। मंदिर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद से वह पकड़ा गया। पुलिस ने उसकी निशानदेही पर चोरी गए गहने उसके घर के अंदर से बरामद कर लिए हैं।
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एसपी ग्रामीण गोपीनाथ सोनी के मुताबिक, छह सितंबर की रात मुरली मनोहर मंदिर से चोर दो छत्र, दो मुकुट, एक कुंडल समेत अन्य चांदी के गहने चुरा ले गया था। पुलिस ने मंदिर के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की पड़ताल की। मालूम चला मंदिर के पास रहने वाला रंजीत ताम्रकार (35) पुत्र लालाराम रात 12:40 बजे घर से मंदिर आया। फिर चोरी कर 1:15 बजे वापस घर चला गया। शक होने पर उसकी तलाश की जा रही थी। बुधवार को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में उसने चोरी की बात कुबूल कर ली।
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पूछताछ में उसने बताया कि छह सितंबर की शाम को मंदिर गया था। प्रसाद लेने के बाद भगवान से प्रार्थना करते हुए कहा कि आज तेरे घर पर चोरी करुंगा। दूसरी जगह चोरी करने से अच्छा है, जितने पैसों जरूरत है आप ही दे दो। रंजीत का कहना था कि उसे 35-40 हजार रुपये की जरूरत थी। इस वजह से उसने सिर्फ चांदी के गहने ही चुराए। मंदिर में सोने के गहने भी थे लेकिन, इन गहनों को उसने हाथ नहीं लगाया। मंदिर से चोरी करके गहने उसने अपने घर के आंगन में गाड़ दिया। गहनों को वह बेचने की फिराक में था।
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आरोपी रंजीत ने पुलिस पूछताछ में बताया कि भाई, भाभी, मां एवं भतीजों के इलाज के लिए उसने काफी पैसा उधार लिया था। वह एक कपड़े की दुकान में काम करता था, लेकिन इससे वह ब्याज भी नहीं चुका पा रहा था। भाभी के इलाज के लिए 35 हजार रुपये की जरूरत थी। यह पैसा उसे कहीं से मिल नहीं रहा था। इसके लिए उसने चोरी करने का मन बनाया। उसे दूसरी जगह चोरी करने से अच्छा पड़ोस के मंदिर में चोरी करना अधिक सुरक्षित लगा। इस वजह से उसने मंदिर में चोरी की।