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गरीबों को मिला ‘आयुष्मान’ का वरदान

Jhansi Bureauझांसी ब्यूरो Updated Fri, 20 Sep 2019 01:51 AM IST
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गरीबों को मिला ‘आयुष्मान’ का वरदान
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झांसी। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना आर्थिक रूप से कमजोर अनेकों मरीजों के लिए वरदान साबित हुई है। आर्थिक तंगी में इलाज न करा पाने की वजह से चलने-फिरने में असमर्थ हो गए मरीजों को आयुष्मान योजना ने दोबारा पैरों पर खड़ा करने का काम किया है। सरकारी चिकित्सालय में डॉक्टरों ने मरीजों का सफल इलाज किया। मरीजों का एक रुपये भी खर्च नहीं हुआ।
केस-1
बांदा निवासी ज्योति चौरसिया (32) को एक महीने से पेट में भीषण दर्द हो रहा था। एक निजी अस्पताल में उपचार कराने के बावजूद वह ठीक नहीं हो पा रही थीं। जांच के दौरान ज्योति को पित्त की थैली में पथरी के बारे में जानकारी मिली। ज्योति के पास आगे का इलाज कराने के पैसे नहीं थे। दर्द में कराहते हुए पिछले महीने वह आयुष्मान योजना का गोल्डन कार्ड लेकर महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज पहुंचीं। उन्हें सर्जरी विभाग में इलाज के लिए भर्ती कर लिया गया। सर्जरी विभाग के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. पंकज सोनकिया ने ज्योति का दूरबीन विधि से सफल ऑपरेशन किया। ज्योति के इलाज में एक भी पैसा खर्च नहीं हुआ। अब वह पूरी तरह ठीक हैं।
केस-2
छतरपुर के लवकुश तहसील निवासी राकेश अहिरवार (32) पुत्र रामदीन अहिरवार पिछले दो सालों से दाएं कूल्हे की चोट से परेशान थे। राकेश पहले एक निजी अस्पताल में कूल्हे का ऑपरेशन करा चुके थे लेकिन सफल नहीं होने की वजह से चलने-फिरने में असमर्थ हो गए थे। राकेश के पास आगे का इलाज कराने के लिए पैसा नहीं था। आखिर में राकेश महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज पहुंचे। उनका आयुष्मान योजना का गोल्डन कार्ड बना हुआ था। अस्थि रोग विभाग में उन्हें भर्ती किया गया। विभागाध्यक्ष डॉ. पारस गुप्ता ने राकेश के कूल्हे का प्रत्यारोपण किया। नि:शुल्क इलाज होने के बाद अब राकेश अपने पैरों पर खड़े हैं और अपनी जीविका चल पा रहे हैं।
केस-3
बिजली सुधारने का काम करने वाले शिवाजी नगर के पंकज (35) के कूल्हे के दोनों जोड़ खराब हो चुके थे। वह चलने फिरने में असमर्थ थे। किसी तरह पंकज ने सरकारी अस्पताल में एक कूल्हे का तो ऑपरेशन करा लिया लेकिन दूसरे कूल्हे के इलाज के लिए पैसे नहीं बचे। उन्होंने मेडिकल कॉलेज अस्थि रोग विभाग में संपर्क किया। डॉक्टरों ने उनकी आर्थिक स्थिति देखकर पूछा कि आयुष्मान योजना का गोल्डन कार्ड बना है या नहीं। पंकज ने कहा कि उसे योजना की जानकारी ही नहीं है। इस पर डॉ. अमित सहगल और डॉ. प्रवीण सरावगी ने सूची देखकर नाम मिलने पर पंकज का गोल्डन कार्ड बनवाया। दूसरे कूल्हे का सफल ऑपरेशन भी किया। अब वह स्वस्थ हैं।
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