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खराब पड़ी मशीनों का भी कर दिया भुगतान
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झांसी। एक ओर सरकार नगर निकायों को बजट देने में कटौती करने के साथ खर्चों को कम करने के लिए कह रही है, तो दूसरी ओर नगर निगम के अधिकारी अनावश्यक खर्च कर रहे हैं। नगर निगम में सैनिटाइजेशन मशीनों की खरीद का मामला एक बार फिर से सवालों के घेरे में आ गया है। नगर निगम अधिकारियों ने सैनिटाइजेशन के लिए खरीदी गईं मशीनों का वारंटी सीमा में खराब होने के बाद भुगतान कर दिया। मामले में उपसभापति और पार्षदों ने सवाल उठाए हैं।
नगर निगम ने लॉकडाउन लागू होने के बाद महानगर में सैनिटाइजेशन का काम शुरू किया था। इसके लिए आनन-फानन में 60 पेट्रोल से चलने वाली सैनिटाइजेशन की मशीनों की खरीद की गई। जिसमें से करीब 30 मशीनें वारंटी सीमा में ही खराब हो गईं। इसके बाद बैटरी से चलने वालीं 40 मशीनों की खरीद की गई। नगर निगम अधिकारियों ने पिछले दिनों पेट्रोल से चलने वाली सैनिटाइजेशन मशीनों और फॉगिंग की मशीनों का 88 लाख रुपये का भुगतान किया है। बताया जाता है कि इनमें उन मशीनों का भी भुगतान कर दिया गया है, जो वारंटी सीमा में ही खराब हो गई हैं। जबकि इन मशीनों को बदलने या सही कराने के लिए कोई पहल नहीं की गई। खराब मशीनें नगर निगम की कर्मशाला में धूल फांक रही हैं। मामले को लेकर उपसभापति ने सवाल उठाए हैं। उपसभापति राजेश त्रिपाठी का कहना है कि सैनिटाइजेशन के लिए खरीदी गईं मशीनों की खरीद प्रक्रिया सांठ-गांठ से की गई है। खराब पड़ी मशीनों का भुगतान कर दिया गया। जबकि शासन ने खर्च में कटौती करने के लिए कहा है। मामले की जांच कराई जानी चाहिए।
प्रकरण संज्ञान में आया है। यदि वारंटी सीमा में मशीनें खराब हुईं हैं, तो मशीनों को बदलने या खराबी सही कराई जाएगी। इसके साथ ही जांच कराकर दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कराई जाएगी।
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अवनीश राय, नगर आयुक्त
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नगर निगम ने लॉकडाउन लागू होने के बाद महानगर में सैनिटाइजेशन का काम शुरू किया था। इसके लिए आनन-फानन में 60 पेट्रोल से चलने वाली सैनिटाइजेशन की मशीनों की खरीद की गई। जिसमें से करीब 30 मशीनें वारंटी सीमा में ही खराब हो गईं। इसके बाद बैटरी से चलने वालीं 40 मशीनों की खरीद की गई। नगर निगम अधिकारियों ने पिछले दिनों पेट्रोल से चलने वाली सैनिटाइजेशन मशीनों और फॉगिंग की मशीनों का 88 लाख रुपये का भुगतान किया है। बताया जाता है कि इनमें उन मशीनों का भी भुगतान कर दिया गया है, जो वारंटी सीमा में ही खराब हो गई हैं। जबकि इन मशीनों को बदलने या सही कराने के लिए कोई पहल नहीं की गई। खराब मशीनें नगर निगम की कर्मशाला में धूल फांक रही हैं। मामले को लेकर उपसभापति ने सवाल उठाए हैं। उपसभापति राजेश त्रिपाठी का कहना है कि सैनिटाइजेशन के लिए खरीदी गईं मशीनों की खरीद प्रक्रिया सांठ-गांठ से की गई है। खराब पड़ी मशीनों का भुगतान कर दिया गया। जबकि शासन ने खर्च में कटौती करने के लिए कहा है। मामले की जांच कराई जानी चाहिए।
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प्रकरण संज्ञान में आया है। यदि वारंटी सीमा में मशीनें खराब हुईं हैं, तो मशीनों को बदलने या खराबी सही कराई जाएगी। इसके साथ ही जांच कराकर दोषियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई कराई जाएगी।
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अवनीश राय, नगर आयुक्त