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1857 के संग्राम की ढाल का अस्तित्व खतरे में

Sat, 22 Aug 2020 01:15 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 22 Aug 2020 01:15 AM IST
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parkota nagar nigam jhansi
दरकता ऐतिहासिक परकोटा - फोटो : REPORTERS
झांसी। इतिहास की अनूठी इमारत झांसी के किले का परकोटे का अस्तित्व खतरे में है। देखरेख के अभाव में ये बुलंद इमारत लगातार दरकती जा रही है। खासतौर पर बारिश का मौसम झांसी के गौरवशाली इतिहास के इस गवाह पर भारी बैठता है। दीवारों में पानी बैठने की वजह से ये धराशायी हो जाती हैं। पिछले साल उनाव गेट पास परकोटे का एक बड़ा हिस्सा जमींदोज हो गया था। इस बार भी कई स्थानों पर ये खतरा बना हुआ है।
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झांसी के किले का निर्माण सन 1613-1619 के बीच हुआ था। जबकि, परकोटे का निर्माण 1755 में मराठा सूबेदार नारोशंकर ने कराया था। यह परकोटे पुराने शहर को चारों ओर से घेरे हुए हैं। शहर से बाहर आवागमन के लिए जगह-जगह विशाल दरवाजे और खिड़कियां (छोटे दरवाजे) बने हुए हैं। 1857 के संग्राम में ये परकोटा झांसी की ढाल बनाकर खड़ा रहा था। फिरंगी सेनाएं भी इसे नहीं भेद पाईं थीं। लेकिन, शासन-प्रशासन की अनदेखी की वजह से अब ये इमारत अपने वजूद को लेकर संघर्ष करती नजर आ रही है। दीवार को तोड़कर बड़े पैमाने पर अतिक्रमण कर लिया गया है। इसके अलावा जगह-जगह से ये परकोटा लगातार नमी बने रहने की वजह से खुद धराशायी होता जा रहा है। बारिश के इस मौसम में खतरा और भी बढ़ा हुआ है।
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परकोटे के गेट खतरनाक स्थिति में पहुंच चुके हैं। आए दिन इनसे बड़े-बड़े पत्थर गिरते रहते हैं। कभी भी कोई बढ़ी दुर्घटना हो सकती है।
- शौकत अली, अलीगोल
संरक्षण तो दूर की बात मरम्मत तक पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है। यही वजह है कि इतिहास की ये इमारत अपना अस्तित्व खोती जा रही है।
- बृजेश कुशवाहा, अलीगोल
दतिया गेट से अक्सर पत्थर गिरते रहते हैं। दो साल पहले बारिश के दिनों में यहां परकोटे का एक बड़ा हिस्सा ढह गया था। सुरक्षा की दृष्टि से इसकी मरम्मत कराई जानी चाहिए।
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- राजकुमार गौतम, दतिया गेट
परकोटा और इससे जुड़े दरवाजे घनी आबादी के बीचोंबीच हैं। इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए। इतिहास की इमारत के साथ-साथ लोगों को भी खतरे से बचाना चाहिए।
- मनोज कुमार, पठौरिया
परकोटे पर होने वाले अवैध निर्माणों के खिलाफ नगर निगम की ओर से लगातार कार्रवाई की जा रही है। जल्द ही विभिन्न विभागों से समन्वय बनाकर इसके विकास की योजना बनाई जाएगी।
- रामतीर्थ सिंघल, महापौर
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