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Jhansi News: पौने दो करोड़ के पैनिक बटन, मजाक-मजाक में दबाकर दे रहे रहे टशन
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बीकेडी चौराहा पर लगा पैनिक बटन
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झांसी। हैलो, मैं कंट्रोल रूम से बोल रहा हूं, आपने पैनिक बटन (इमरजेंसी कॉल बॉक्स) दबाकर सहायता मांगी है। बताइये, हम आपकी क्या सहायता कर सकते हैं। कुछ देर बाद दूसरा आदमी बटन दबाता है और कंट्रोल रूम को बताता है कि साहब वो तो शराबी था, मजाक में बटन दबाकर चला गया। ये हाल है शहर में पौने दो करोड़ की लागत से 13 स्थानों पर डेढ़ साल पहले लगाए गए पैनिक बटन सेवा का।
इसे जानकारी का अभाव कहें या लोगों की अनदेखी, डेढ़ साल में मात्र 36 लोग ही इस सेवा का लाभ ले पाए हैं, जबकि 99 बार कभी शराबी ने तो कभी मजाक में लोग बटन दबाकर चले जाते हैं। कई बार झूठी सूचनाएं भी आ जाती हैं। जबकि कंट्रोल रूम के कर्मचारी इसे आपात स्थिति जानकर पुलिस को सूचना देते हैं, पुलिस को मौके पर जाकर पता चलता है कि किसी ने मजाक में बटन दबाया था।
राह चलते किसी के साथ कोई घटना-दुर्घटना, समस्या या आपात की कोई स्थिति हो तो लोगों को आसानी से मदद उपलब्ध हो सके, इसके लिए महानगर में पौने दो करोड़ रुपये की लागत से 13 प्रमुख जगहों पर पैनिक बटन लगाए गए थे। लेकिन, पिछले डेढ़ साल में इन्हें सिर्फ 135 लोगों ने ही दबाया है। इनमें 99 बार शराबियों और शरारतियों ने बटन दबाए और भाग गए। मात्र 36 लोगों ने आपात में सेवा प्राप्त की। 01 जुलाई 2021 को इन बटनों ने काम करना शुरू कर दिया था।
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24 घंटे काम करती है सेवा, फिर भी कारगर नहीं
शहर में पैनिक बटन इलाइट चौराहा, बीकेडी चौराहा, कचहरी चौराहा, बस स्टैंड, मेडिकल गेट नंबर एक, मिनर्वा चौराहा, जीवनशाह तिराहा, गोविंद तिराहा, बस बहार चौराहा, आवास विकास तिराहा, नगरा हाट, खंडेराव गेट व सदर बाजार में लगे है। इनमें किसी भी बटन को दबाते ही इमरजेंसी कॉल नगर निगम में बने कंट्रोल रूम में पहुंच जाती है और वहां से मदद उपलब्ध कराने के लिए ऑपरेटर की आवाज आने लगती है। ये सेवा 24 घंटे काम करती है। इसके लिए कंट्रोल रूम में अलग से दो ऑपरेटर भी तैनात हैं, जिनके वेतन पर हर माह लगभग तीस हजार रुपये की धनराशि खर्च की जाती है। बावजूद इसके आपात स्थिति में लोगों को तत्काल मदद पहुंचाने के लिए लगाए गए पैनिक बटन कारगर साबित नहीं हो पा रहे हैं।
पैनिक बटन आपात स्थिति में लोगों की मदद के लिए लगाए गए हैं। विभिन्न जरियों से इसका प्रचार-प्रसार भी किया गया है। बावजूद, इसका लोग सही इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। लोग बेवजह इसका इस्तेमाल करते हैं।
- अरुण कुमार, महाप्रबंधक - स्मार्ट सिटी
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इसे जानकारी का अभाव कहें या लोगों की अनदेखी, डेढ़ साल में मात्र 36 लोग ही इस सेवा का लाभ ले पाए हैं, जबकि 99 बार कभी शराबी ने तो कभी मजाक में लोग बटन दबाकर चले जाते हैं। कई बार झूठी सूचनाएं भी आ जाती हैं। जबकि कंट्रोल रूम के कर्मचारी इसे आपात स्थिति जानकर पुलिस को सूचना देते हैं, पुलिस को मौके पर जाकर पता चलता है कि किसी ने मजाक में बटन दबाया था।
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राह चलते किसी के साथ कोई घटना-दुर्घटना, समस्या या आपात की कोई स्थिति हो तो लोगों को आसानी से मदद उपलब्ध हो सके, इसके लिए महानगर में पौने दो करोड़ रुपये की लागत से 13 प्रमुख जगहों पर पैनिक बटन लगाए गए थे। लेकिन, पिछले डेढ़ साल में इन्हें सिर्फ 135 लोगों ने ही दबाया है। इनमें 99 बार शराबियों और शरारतियों ने बटन दबाए और भाग गए। मात्र 36 लोगों ने आपात में सेवा प्राप्त की। 01 जुलाई 2021 को इन बटनों ने काम करना शुरू कर दिया था।
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24 घंटे काम करती है सेवा, फिर भी कारगर नहीं
शहर में पैनिक बटन इलाइट चौराहा, बीकेडी चौराहा, कचहरी चौराहा, बस स्टैंड, मेडिकल गेट नंबर एक, मिनर्वा चौराहा, जीवनशाह तिराहा, गोविंद तिराहा, बस बहार चौराहा, आवास विकास तिराहा, नगरा हाट, खंडेराव गेट व सदर बाजार में लगे है। इनमें किसी भी बटन को दबाते ही इमरजेंसी कॉल नगर निगम में बने कंट्रोल रूम में पहुंच जाती है और वहां से मदद उपलब्ध कराने के लिए ऑपरेटर की आवाज आने लगती है। ये सेवा 24 घंटे काम करती है। इसके लिए कंट्रोल रूम में अलग से दो ऑपरेटर भी तैनात हैं, जिनके वेतन पर हर माह लगभग तीस हजार रुपये की धनराशि खर्च की जाती है। बावजूद इसके आपात स्थिति में लोगों को तत्काल मदद पहुंचाने के लिए लगाए गए पैनिक बटन कारगर साबित नहीं हो पा रहे हैं।
पैनिक बटन आपात स्थिति में लोगों की मदद के लिए लगाए गए हैं। विभिन्न जरियों से इसका प्रचार-प्रसार भी किया गया है। बावजूद, इसका लोग सही इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं। लोग बेवजह इसका इस्तेमाल करते हैं।
- अरुण कुमार, महाप्रबंधक - स्मार्ट सिटी