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पहूज के पानी ने लांघी डूब क्षेत्र की सीमा, सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट
अमर उजाला ब्यूराो
Updated Sat, 14 Oct 2017 12:51 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : demo pic
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झांसी। झांसी मुख्यालय से कोई सात किलोमीटर दूर पहूज बांध का पानी अपने डूब क्षेत्र की सीमा लांघकर परवई, दातारनगर और आसपास के गांवों के खेतों में घुस गया। इससे सैकड़ों एकड़ फसल नष्ट हो गई। अब दुखी किसान ने मुआवजे की मांग कर रहे हैं। सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता का कहना है कि वह सर्वे करवाएंगे ताकि पता लग सके कि हकीकत क्या है।
जून-जुलाई में किसानों ने खेतों में धान, तिल, उर्द आदि फसलों की बुवाई की थी। किसानों की फसल लगभग तैयार हो चुकी थी। किसानों ने बताया कि एक हफ्ते पहले ही पहूज बांध भरा गया था। इस बार पानी डूब क्षेत्र की सीमा को पार करके किसानों के खेतों में भर गया। इस कारण कई किसानों की फसलें सड़ गई हैं। कुछ खेतों में पानी तो पांच फुट तक भर गया है। इससे फसल पूरी तरह डूब गई है। किसानों ने बताया कि पहूज बांध का पानी ओवरफ्लो होने से परवई, दातारनगर, करारी, पलींदा, ढीमरपुरा, डेली, पाली, लहार, खोड़न, नया गांव, सिमरधा आदि गांवों की कई एकड़ भूमि में खड़ी फसल नष्ट हो गई हैं। इससे किसानों को आर्थिक और मानसिक चोट पहुंची है।
बेतवा नहर प्रखंड के अधिशासी अभियंता संजय कुमार का कहना है कि पुराने और नए गेटों पर बांध का जलस्तर एक ही है। चूंकि, जब बांध का जलस्तर कम होता है तो कुछ किसान डूब क्षेत्र की भूमि पर खेती करना शुरू कर देते हैं। बांध बनने पर उनकी फसल डूब जाती है तो हल्ला मचाते हैं। अगर, ज्यादा जमीन डूबी है तो सर्वे करवाएंगे, ताकि पता चल सके प्रभावित गांव डूब क्षेत्र में हैं या नहीं।
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जून-जुलाई में किसानों ने खेतों में धान, तिल, उर्द आदि फसलों की बुवाई की थी। किसानों की फसल लगभग तैयार हो चुकी थी। किसानों ने बताया कि एक हफ्ते पहले ही पहूज बांध भरा गया था। इस बार पानी डूब क्षेत्र की सीमा को पार करके किसानों के खेतों में भर गया। इस कारण कई किसानों की फसलें सड़ गई हैं। कुछ खेतों में पानी तो पांच फुट तक भर गया है। इससे फसल पूरी तरह डूब गई है। किसानों ने बताया कि पहूज बांध का पानी ओवरफ्लो होने से परवई, दातारनगर, करारी, पलींदा, ढीमरपुरा, डेली, पाली, लहार, खोड़न, नया गांव, सिमरधा आदि गांवों की कई एकड़ भूमि में खड़ी फसल नष्ट हो गई हैं। इससे किसानों को आर्थिक और मानसिक चोट पहुंची है।
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बेतवा नहर प्रखंड के अधिशासी अभियंता संजय कुमार का कहना है कि पुराने और नए गेटों पर बांध का जलस्तर एक ही है। चूंकि, जब बांध का जलस्तर कम होता है तो कुछ किसान डूब क्षेत्र की भूमि पर खेती करना शुरू कर देते हैं। बांध बनने पर उनकी फसल डूब जाती है तो हल्ला मचाते हैं। अगर, ज्यादा जमीन डूबी है तो सर्वे करवाएंगे, ताकि पता चल सके प्रभावित गांव डूब क्षेत्र में हैं या नहीं।
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