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पहुज बांध और गढ़मऊ झील में नहीं दिख रहे परिंदे
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पहुज बांध में कम आरहे पक्षी। अमर उजाला
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झांसी। देशभर में जहां बर्डफ्लू से लगातार पक्षियों की मौत हो रही है। वहीं, झांसी के कई जलाशयों और बांध से अचानक पक्षियों का कलरव कम हो गया है। हालांकि इन जलाशयों और बांध पर किसी पक्षी के मरने की पुष्टि नहीं हो सकी है। पिछले दिनों जरूर जिले में कौवों और कबूतरों की मौत के मामले सामने आए थे लेकिन जांच के दौरान बर्डफ्लू की पुष्टि नहीं हुई थी। बांध और जलाशयों में पक्षियों की घटती तादाद के पीछे लोग बर्डफ्लू की आशंका जता रहे हैं।
जिले में पहुज बांध, गढ़मऊ झील, पारीछा बांध और बिजौली झील समेत तमाम ऐसे स्थान हैं, जहां हर समय पक्षियों का बसेरा रहता है। पहाड़ों और घनी हरियाली के साथ जलाशयों और बांध पर पक्षियों का कलरव पर्यटकों को लुभाता रहा है। शहर से सटे पहुज बांध पर अधिकतर कौवों का शोर रहता है, लेकिन पिछले कई दिनों से यहां पर पक्षी नजर ही नहीं आ रहे हैं। इक्का-दुक्का पक्षियों को छोड़ दें, तो अपनी उड़ान से लोगों को मोहित करने वाला पक्षियों का झुंड नहीं दिखने से पर्यटक भी मायूस हैं। इसके साथ ही गढ़मऊ झील पर भी कुछ ऐसा ही हाल है। यहां भी परिंदों की तादाद कम हो गई है।
इन स्थानों पर अब तक पक्षियों के मरने का कोई मामला बेशक सामने नहीं आया है, लेकिन पक्षियों की घटती तादाद चिंता का विषय बन रही है। उधर, बर्ड फ्लू को लेकर पशुपालन विभाग की भी जलाशयों और बांध पर नजर है। विभाग की टीमें लगातार इन स्थानों का सर्वे कर रही हैं। इसके साथ ही मरा पक्षी मिलने पर लोगों को सूचना देने के लिए जागरूक किया जा रहा है। पहुज बांध पर आने वाले रामसेवक का कहना है कि पहले बांध पर तमाम परिंदे रहते थे। कौवे सबसे अधिक आते थे, लेकिन अब कुछ दिन से पक्षी कम नजर आ रहे हैं। पशुपालक होतीलाल बताते हैं कि बांध पर कोई पक्षी मरा नहीं मिला है, लेकिन पक्षी कम होने लगे हैं। पहले पक्षी उड़ान भरते थे, तो अच्छा लगता था।
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जिले में पहुज बांध, गढ़मऊ झील, पारीछा बांध और बिजौली झील समेत तमाम ऐसे स्थान हैं, जहां हर समय पक्षियों का बसेरा रहता है। पहाड़ों और घनी हरियाली के साथ जलाशयों और बांध पर पक्षियों का कलरव पर्यटकों को लुभाता रहा है। शहर से सटे पहुज बांध पर अधिकतर कौवों का शोर रहता है, लेकिन पिछले कई दिनों से यहां पर पक्षी नजर ही नहीं आ रहे हैं। इक्का-दुक्का पक्षियों को छोड़ दें, तो अपनी उड़ान से लोगों को मोहित करने वाला पक्षियों का झुंड नहीं दिखने से पर्यटक भी मायूस हैं। इसके साथ ही गढ़मऊ झील पर भी कुछ ऐसा ही हाल है। यहां भी परिंदों की तादाद कम हो गई है।
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इन स्थानों पर अब तक पक्षियों के मरने का कोई मामला बेशक सामने नहीं आया है, लेकिन पक्षियों की घटती तादाद चिंता का विषय बन रही है। उधर, बर्ड फ्लू को लेकर पशुपालन विभाग की भी जलाशयों और बांध पर नजर है। विभाग की टीमें लगातार इन स्थानों का सर्वे कर रही हैं। इसके साथ ही मरा पक्षी मिलने पर लोगों को सूचना देने के लिए जागरूक किया जा रहा है। पहुज बांध पर आने वाले रामसेवक का कहना है कि पहले बांध पर तमाम परिंदे रहते थे। कौवे सबसे अधिक आते थे, लेकिन अब कुछ दिन से पक्षी कम नजर आ रहे हैं। पशुपालक होतीलाल बताते हैं कि बांध पर कोई पक्षी मरा नहीं मिला है, लेकिन पक्षी कम होने लगे हैं। पहले पक्षी उड़ान भरते थे, तो अच्छा लगता था।
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