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झांसी में सिर्फ दो शव वाहन, एंबुलेंस से ढोए जा रहे शव
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झांसी। जिले में नियमों को ताक पर रखकर एंबुलेंस से शवों को ढोया जा रहा है। जबकि, एंबुलेंस से सिर्फ मरीजों को लाया-ले जाया जा सकता है। कई निजी एंबुलेंस चालक शव को उतारने के बाद सैनिटाइजेशन भी नहीं करते हैं। इससे दूसरे रोगियों में संक्रमण फैलने का डर रहता है।
झांसी में सिर्फ दो शव वाहन परिवहन विभाग में पंजीकृत हैं। जबकि, 95 एंबुलेंस का रजिस्ट्रेशन है। इसमें 20 सरकारी एंबुलेंस शामिल हैं। रोजाना सरकार और प्राइवेट अस्पताल में इन एंबुलेंस से सैकड़ों मरीज भर्ती होने के लिए आते हैं। वहीं, कई मरीजों की इलाज अथवा दुर्घटना के दौरान मौत हो जाने पर एंबुलेंस ही शव को घर या फिर श्मशान घाट तक लेकर जाते हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक ये नियमों के खिलाफ है। एंबुलेंस सिर्फ मरीजों के लिए होती है और शव वाहन डेड बॉडी को ले जाने के लिए। जिले में कई निजी एंबुलेंस चालक शवों को ढोने के बाद तुरंत मरीजों को लेने पहुंच जाते हैं। ऐसे में वो एंबुलेंस को सैनिटाइज नहीं करते। डॉक्टरों का कहना है कि डेडबॉडी के बाद उसी जगह पर किसी मरीज को लिटाने पर संक्रमण हो सकता है।
सीधे चालान करने का है नियम
एआरटीओ सत्येंद्र कुमार ने बताया कि यदि एंबुलेंस चालक शव को लाते-ले जाते मिलते हैं तो सीधे चालान करने का नियम है। चालान जमा न करने पर वाहन को सीज भी किया जा सकता है। अभियान चलाकर एंबुलेंस की जांच की जाएगी।
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शव वाहन से ही डेड बॉडी लाई और ले जाई जा सकती है। यदि एंबुलेंस से अस्पताल या घर ले जाते समय मरीज की मौत हो जाती है तो सैनिटाइजेशन करना चाहिए, वरना दूसरे मरीज को संक्रमण हो सकता है। शव वाहन के अलावा कोई भी एंबुलेंस चालक डेड बॉडी ले जाता मिला तो कार्रवाई होगी। - डॉ. सुधाकर पांडेय, सीएमओ।
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झांसी में सिर्फ दो शव वाहन परिवहन विभाग में पंजीकृत हैं। जबकि, 95 एंबुलेंस का रजिस्ट्रेशन है। इसमें 20 सरकारी एंबुलेंस शामिल हैं। रोजाना सरकार और प्राइवेट अस्पताल में इन एंबुलेंस से सैकड़ों मरीज भर्ती होने के लिए आते हैं। वहीं, कई मरीजों की इलाज अथवा दुर्घटना के दौरान मौत हो जाने पर एंबुलेंस ही शव को घर या फिर श्मशान घाट तक लेकर जाते हैं। परिवहन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक ये नियमों के खिलाफ है। एंबुलेंस सिर्फ मरीजों के लिए होती है और शव वाहन डेड बॉडी को ले जाने के लिए। जिले में कई निजी एंबुलेंस चालक शवों को ढोने के बाद तुरंत मरीजों को लेने पहुंच जाते हैं। ऐसे में वो एंबुलेंस को सैनिटाइज नहीं करते। डॉक्टरों का कहना है कि डेडबॉडी के बाद उसी जगह पर किसी मरीज को लिटाने पर संक्रमण हो सकता है।
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सीधे चालान करने का है नियम
एआरटीओ सत्येंद्र कुमार ने बताया कि यदि एंबुलेंस चालक शव को लाते-ले जाते मिलते हैं तो सीधे चालान करने का नियम है। चालान जमा न करने पर वाहन को सीज भी किया जा सकता है। अभियान चलाकर एंबुलेंस की जांच की जाएगी।
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शव वाहन से ही डेड बॉडी लाई और ले जाई जा सकती है। यदि एंबुलेंस से अस्पताल या घर ले जाते समय मरीज की मौत हो जाती है तो सैनिटाइजेशन करना चाहिए, वरना दूसरे मरीज को संक्रमण हो सकता है। शव वाहन के अलावा कोई भी एंबुलेंस चालक डेड बॉडी ले जाता मिला तो कार्रवाई होगी। - डॉ. सुधाकर पांडेय, सीएमओ।