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तीन साल में बुंदेलखंड में पकड़े सिर्फ छह भ्रष्टाचारी
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Wed, 15 Mar 2017 12:52 AM IST
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तीन साल में बुंदेलखंड में पकड़े सिर्फ छह भ्रष्टाचारी
- फोटो : demo
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सरकारी तंत्र में व्याप्त भ्रष्टाचार का सामना गाहे बगाहे सभी को करना पड़ता है। इसके बावजूद लोग आवाज उठाने और शिकायत दर्ज करवाने से कतराते हैं। इसी का नतीजा है कि भ्रष्टाचार निवारण संगठन पिछले तीन साल के दरम्यान बुंदेलखंड के सात जिलों में सिर्फ छह भ्रष्टाचारियों को ही रंगे हाथों पकड़ पाया है।
अपराध अनुसंधान शाखा के भ्रष्टाचार निवारण संगठन में इक्का - दुक्का शिकायतें ही पहुंचती हैं, जिनकी पहले जांच की जाती है और उसके बाद घेराबंदी कर भ्रष्टाचार सरकारी कर्मचारी को रंगे हाथों पकड़ा जाता है। पिछले तीन साल के दरम्यान संगठन बुंदेलखंड के सातों जिलों में सिर्फ छह भ्रष्टाचारियों को ही रंगे हाथों पकड़ पाया है। इनमें 2016 में बांदा जिले में एक रोडवेज का लिपिक व शिक्षा विभाग का लेखाकार हत्थे चढ़ा था। 2015 में झांसी के गरौठा में एक कानूनगो व बांदा में एक सरकारी कर्मचारी पकड़ा था। जबकि, 2014 में ललितपुर के तालबेहट में एक सींचपाल और झांसी में एक लेखपाल को रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा गया था।
ऐसे पकड़े जाते हैं भ्रष्टाचारी
किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत जन सामान्य का कोई भी व्यक्ति कर सकता है। इसके लिए उसे शिवपुरी रोड पर नंदनपुरा मुक्तिधाम के पास स्थित भ्रष्टाचार निवारण संगठन के कार्यालय में लिखित एप्लीकेशन देनी होती है, जिसे गोपनीय रखते ही भ्रष्ट कर्मचारी की जांच की जाती है। भ्रष्टाचारी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए शासन से कार्रवाई की अनुमति ली जाती है। अनुमति लेने के बाद जिलाधिकारी से दो गवाह लिए जाते हैं, जो सरकारी कर्मचारी होते हैं। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम संबंधित कर्मचारी को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए दबोच लेती है। रिश्वत में दी जाने वाली रकम शिकायतकर्ता को ही देनी होती है। जो बाद में उसे वापस मिल जाती है। शिकायत करने वाले को कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगने का वाजिब कारण भी देना होता है।
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फोन पर भी कर सकते हैं शिकायत
भ्रष्टाचार की शिकायत फोन पर भी की जा सकती है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन के कार्यालय के फोन नंबर 0510-2380393 और मोबाइल नंबर 9454402489 और 9454401650 पर भी की जा सकती है।
‘शिकायत आने पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी जाती है। जांच में शिकायत की पुष्टि होने पर एक्शन लिया जाता है। कार्यालय में जन सामान्य का कोई भी व्यक्ति शिकायत कर सकता है। इसके अलावा फोन पर भी शिकायत की जा सकती है।’
- रफी अहमद सिद्दीकी, पुलिस उपाधीक्षक - भ्रष्टाचार निवारण संगठन
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अपराध अनुसंधान शाखा के भ्रष्टाचार निवारण संगठन में इक्का - दुक्का शिकायतें ही पहुंचती हैं, जिनकी पहले जांच की जाती है और उसके बाद घेराबंदी कर भ्रष्टाचार सरकारी कर्मचारी को रंगे हाथों पकड़ा जाता है। पिछले तीन साल के दरम्यान संगठन बुंदेलखंड के सातों जिलों में सिर्फ छह भ्रष्टाचारियों को ही रंगे हाथों पकड़ पाया है। इनमें 2016 में बांदा जिले में एक रोडवेज का लिपिक व शिक्षा विभाग का लेखाकार हत्थे चढ़ा था। 2015 में झांसी के गरौठा में एक कानूनगो व बांदा में एक सरकारी कर्मचारी पकड़ा था। जबकि, 2014 में ललितपुर के तालबेहट में एक सींचपाल और झांसी में एक लेखपाल को रंगे हाथों रिश्वत लेते पकड़ा गया था।
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ऐसे पकड़े जाते हैं भ्रष्टाचारी
किसी भी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत जन सामान्य का कोई भी व्यक्ति कर सकता है। इसके लिए उसे शिवपुरी रोड पर नंदनपुरा मुक्तिधाम के पास स्थित भ्रष्टाचार निवारण संगठन के कार्यालय में लिखित एप्लीकेशन देनी होती है, जिसे गोपनीय रखते ही भ्रष्ट कर्मचारी की जांच की जाती है। भ्रष्टाचारी को रंगे हाथ पकड़ने के लिए शासन से कार्रवाई की अनुमति ली जाती है। अनुमति लेने के बाद जिलाधिकारी से दो गवाह लिए जाते हैं, जो सरकारी कर्मचारी होते हैं। इसके बाद भ्रष्टाचार निवारण संगठन की टीम संबंधित कर्मचारी को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए दबोच लेती है। रिश्वत में दी जाने वाली रकम शिकायतकर्ता को ही देनी होती है। जो बाद में उसे वापस मिल जाती है। शिकायत करने वाले को कर्मचारी द्वारा रिश्वत मांगने का वाजिब कारण भी देना होता है।
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फोन पर भी कर सकते हैं शिकायत
भ्रष्टाचार की शिकायत फोन पर भी की जा सकती है। भ्रष्टाचार निवारण संगठन के कार्यालय के फोन नंबर 0510-2380393 और मोबाइल नंबर 9454402489 और 9454401650 पर भी की जा सकती है।
‘शिकायत आने पर तत्काल नियमानुसार कार्रवाई शुरू कर दी जाती है। जांच में शिकायत की पुष्टि होने पर एक्शन लिया जाता है। कार्यालय में जन सामान्य का कोई भी व्यक्ति शिकायत कर सकता है। इसके अलावा फोन पर भी शिकायत की जा सकती है।’
- रफी अहमद सिद्दीकी, पुलिस उपाधीक्षक - भ्रष्टाचार निवारण संगठन