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Jhansi News: जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए मिल रही सिर्फ तारीख

Tue, 03 Sep 2024 06:19 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Tue, 03 Sep 2024 06:19 AM IST
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Only date available for making birth and death certificate
- किसी का प्रवेश तो किसी का बीमा का पैसा फंसा, संपत्ति हस्तांतरण तक नहीं हो पा रहा
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अमर उजाला ब्यूरो
कॉमन इंट्रो
झांसी। नगर निगम में जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए लोग छह-छह महीने से चक्कर काटने को मजबूर हैं। उन्हें सिर्फ तारीख पर तारीख मिल रही है। हाल यह है कि जन्म प्रमाणपत्र के न बन पाने से बच्चों का स्कूल में प्रवेश नहीं हो पा रहा है। दूसरी तरफ, मृत्यु प्रमाणपत्र न बन पाने से किसी का संपत्ति हस्तांतरण लटका हुआ है तो किसी को बीमा का पैसा नहीं मिल पा रहा है। लोग परेशान हैं और बार-बार निगम की दौड़भाग करने से उनका पैसा भी खर्च हो रहा है। हर बार लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है। पेश है ये रिपोर्ट।

फरवरी में किया आवेदन, नहीं बना प्रमाणपत्र
आठ साल की बेटी नाव्या का जन्म प्रमाणपत्र नहीं बन पा रहा है। जबकि, फरवरी में नगर निगम में आवेदन किया था। तब से अब तक दस बार नगर निगम के चक्कर काट चुकी हूं। स्टाफ हर बार कह देता है कि मोबाइल पर मैसेज आएगा, तब आना। - रितु, तालपुरा।
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बेटे के प्रवेश के लिए मिला आठ दिन का समय
बेटे का स्कूल में प्रवेश होना है। स्कूल प्रबंधन ने जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अब आठ दिन का समय दिया है। जबकि, प्रमाणपत्र बनवाने के लिए अप्रैल में नगर निगम में आवेदन कर चुका हूं। चार महीने बाद भी प्रमाणपत्र नहीं बना है। - उचित कुमार मिश्रा, सीपरी बाजार।
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बेटे का स्कूल में नहीं हो पा रहा प्रवेश
नगर निगम में 12 अप्रैल को 13 वर्षीय बेटे का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। तब से अब तक प्रमाणपत्र नहीं बन पाया है। बेटे का स्कूल में प्रवेश नहीं हो पा रहा है। पूछने पर स्टाफ बताता है कि अब तक उसके पास फाइल नहीं आई है। - कमलेश कुमार, हंसारी।


पिता का मृत्यु प्रमाणपत्र नहीं बन पाया
पिता चेतराम का निधन एक जुलाई को झांसी में हो गया था। दो अगस्त को नगर निगम में मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया। अब तक प्रमाणपत्र नहीं बना है। बीमा का क्लेम मिलना है। संपत्ति का हस्तांतरण भी होना है। सब फंसा पड़ा है। - संजय कुमार, टीकमगढ़।


पांच बार नगर निगम के काट चुका हूं चक्कर

पांच महीने की बेटी का जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए नौ जुलाई को नगर निगम में फार्म भरकर दस्तावेज के साथ जमा किया था। तब से पांच बार निगम के चक्कर काट चुका हूं। मगर अब तक प्रमाणपत्र नहीं मिल पाया है। - सचिन प्रजापति, हंसारी।

बरुआसागर से झांसी तक करनी पड़ती भागदौड़
इसी साल पांच मई को बेटी का जन्म हुआ था। 25 मई को नगर निगम में जन्म प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन किया था। तब से कई बार चक्कर काट चुका हूं। तीन महीने बाद भी प्रमाणपत्र नहीं मिल पाया है। बरुआसागर से झांसी तक भागदौड़ करनी पड़ती है। - सुभाष चतुर्वेदी, बरुआसागर।



तीन महीने पहले सॉफ्टवेयर अपडेट होने के बाद जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्र बनने की गति धीमी हो गई है। पहले जहां 60 से 70 प्रमाणपत्र एक दिन में बन जाते थे। अब करीब 20 प्रमाणपत्र बन पा रहे हैं। हालांकि, छह-छह महीने तक प्रमाणपत्र लंबित होना संभव नहीं है। अगर आवेदक ने सभी प्रक्रिया पूरी की है और स्टाफ लापरवाही बरत रहा है तो मामला संज्ञान में आने पर कार्रवाई की जाएगी। - मो. कमर, अपर नगर आयुक्त।
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