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महज बीस रुपये में कदम-कदम पर बिक रही पुच्ची

Wed, 17 Mar 2021 01:16 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 17 Mar 2021 01:16 AM IST
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Only 20 rupees get wine
झांसी। समय करीब दोपहर के डेढ़ बजे। जगह सूती मिल के थोड़ा आगे पॉल कॉलोनी। ग्रामीण परिवेश की कुछ महिलाएं एक कार्टून को कपड़े से ढककर बैठी हुई हैं। आसपास कुछ युवक और अधेड़ पहले से मौजूद हैं। थोड़ी देर में दो युवक साइकिल से पहुंचते हैं और सीधे महिलाओं को बीस रुपये के दो नोट थमाकर शराब मांगते हैं। महिलाएं बिना कुछ कहे दो पाउच (पुच्ची) उनके हवाले कर देती हैं। युवक इसे लेकर सीधे वहां से निकल जाते हैं। यह सिलसिला पूरे दिन यहां चलता रहता है।
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यह महिलाएं कच्ची शराब बेच रही थीं। यह दृश्य सिर्फ पॉल कॉलोनी का नहीं बल्कि शहर के कई जगहों पर यह नजारे आम हैं। आबकारी और पुलिस महकमे की मिलीभगत से यहां कच्ची शराब का कारोबार बेखौफ चल रहा है। महज बीस रुपये में मिलने वाले एक पौव्वे के लिए नशे के शौकीन सुबह से इन ठिकानों के आसपास मंडराने लगते हैं। इन दिनों बह रही चुनावी बयार ने भी इनकी खपत कई गुना बढ़ा दी है। ऐसे में यहां भी प्रयागराज और प्रतापगढ़ सरीखी घटना से इंकार नहीं किया जा सकता।
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कच्ची शराब का निम्न आय वर्ग के लोग अधिक सेवन करते हैं। कच्ची शराब की खपत कम करने को बीच में सरकार ने देशी शराब के दाम घटाए थे लेकिन, धीरे-धीरे देशी शराब का दाम इसके करीब तीन गुने तक पहुंच चुका। देशी शराब का एक पौव्वा जहां 55-60 रुपये के बीच मिलता है वहीं, कच्ची शराब का पौव्वा महज बीस रुपये में ही मिल जाता है। वहीं, आबकारी महकमा भी कच्ची शराब विक्रेताओं के साथ खासी रहमदिली दिखाता है। इस वजह से यह कारोबार कभी खत्म नहीं हो पाता।
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कच्ची शराब बिकने के ये हैं अड्डे
सूती मिल के पास, पाल कॉलोनी के इर्द-गिर्द, अटल चौराहे के पीछे, उनाव गेट क्रासिंग के पास, बड़ा पुल, मथनपुरा, बस स्टैंड के पास, कानपुर लाइन, पहाड़िया के पास, राजघाट नहर आवास विकास कॉलोनी के नजदीक, कांशीराम पार्क के पीछे, हंसारी कुम्हार टोली के पास, करगुंवा मंदिर के समीप समेत कई इलाकों में खुलेआम कच्ची शराब बेची जाती है।
मेथिल एल्कोहल में तब्दील होने से जहरीली हो जाती है शराब
कच्ची शराब बनाने वाले प्रशिक्षित नहीं होते। वह अपने अनुभव के आधार पर कच्ची शराब बनाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है अंग्रेजी एवं देशी शराब को खास तापमान में डिस्टिल्ड किया जाता है। इस वजह से वह एथिल एल्कोहल रहती है। बीयू में रसायन विज्ञान विभाग के डा.कमलेश बिलगंइया का कहना है कई बार तीव्रता बढ़ाने के लिए यूरिया अथवा स्प्रिरिट की मात्रा अधिक कर दी जाती है। अलग तापमान में इनका अनुपात बिगड़ने से यह एथिल अल्कोहल की जगह मेथिल अल्कोहल में तब्दील हो जाती है और जानलेवा साबित होती है। कई बार इसके सेवन से आंधापन हो जाता है।

मौत के लिए सिर्फ 150 एमएल ही काफी
शराब मेें अगर मेथिल अल्कोहल की मात्रा है तब उसकी महज 150 एमएल मात्रा ही मौत के लिए पर्याप्त है। विशेषज्ञों का कहना है कि मेथिल अल्कोहल शरीर में पहुंचते ही सबसे पहले लीवर को प्रभावित करने के साथ ही श्वांस नली को भी सिकोड़ देती है। ऐसे में आदमी की मौत हो जाती है। शरीर के दूसरे अंदरूनी भाग को भी विषैली कच्ची शराब बुरी तरह प्रभावित करती है। इससे आदमी का बच माना मुश्किल हो जाता है।
आबकारी विभाग की ओर से कार्रवाई की जाती है। पिछले दिनों ही शहरी इलाकों के भीतर छापेमारी की गई थी। जहां शिकायत मिल रही वहां आगे कार्रवाई की जाएगी।
प्रमोद कुमार गोयल, जिला आबकारी अधिकारी
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