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सील इलाकों की एक लाख आबादी ने घर पर रहकर गुजारा समय
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झांसी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम की सुरक्षा की दृष्टि से शुक्रवार को किले की तलहटी के आसपास स्थित 20 से अधिक इलाकों को सील रखा गया। इन इलाकों में रहने वाली एक लाख से अधिक की आबादी छह घंटे तक अपने घर से नहीं निकल सकी। इन क्षेत्रों की अधिकांश दुकानें बंद रहीं। लोगों ने घर में रहकर पीएम मोदी के कार्यक्रम को टीवी पर देखा।
प्रधानमंत्री मोदी के आगमन को लेकर शहर में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए। कार्यक्रम स्थल के आसपास स्थित 20 से अधिक इलाकों में तो कर्फ्यू जैसे हालात बने रहे। इनमें जीवनशाह, खंडेराव गेट, पुरानी तहसील, बाबूलाल कारखाना, हाइडिल कॉलोनी, कुंज बिहारी कॉलोनी, शक्ति नगर, बीकेडी, पंचकुइयां, आशिक चौराहा, चंदा होटल के पास सिविल लाइन, एसपीआई इंटर कॉलेज समेत आसपास के मुहल्ले शामिल रहेे। इन इलाकों की गलियां जो मुख्य सड़क को जोड़ती थी उनको बैरिकेडिंग लगाकर बंद कर दिया गया। दोपहर तीन बजे के बाद इन गलियों से न तो वाहनों को आने जाने दिया गया और न ही लोगों को आगे बढ़ने दिया। सुबह से ही आंतिया तालाब, खंडेराव गेट, आशिक चौराहा, तहसील, जीवनशाह, बीकेडी समेत आसपास के बाजार में व्यापारियों ने अपनी स्वेच्छा से दुकानों को बंद रखा। इलाइट चौराहे के आसपास की भी तमाम दुकानें बंद रहीं। बाजार में ग्राहक भी दिखाई नहीं दिए। लोगों को आशंका बनी रही कि वह बाजार जाए और दुकान बंद मिली तो उनको बेवजह परेशान होना पड़ेगा। दूसरा परिवर्तित मार्ग की उलझन में फंसने से भी लोग बचते रहे। आम दिनों की तुलना में शहर की हर प्रमुख सड़क पर वाहनों की भागदौड़ बेहद कम रही। लोग अपने घरों में ही रहकर टीवी पर राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व कार्यक्रम देखते रहे। हर जगह केवल कार्यक्रम की चर्चा होती रही।
क्लॉक रूम में जमा कराया सामान
शहर क्षेत्र के तमाम ऐसे लोग जिनको शाम या रात में ट्रेन पकड़कर जाना था। इनमें कई परिवार दिन में ही स्टेशन पर पहुंच गए। कई लोग परेशानी से बचने के लिए अपना सामान पहले ही रेलवे स्टेशन के क्लॉक रूम में जमा करवा आए। इसके बाद वह ट्रेन आने के वक्त स्टेशन पर पहुंच गए और क्लॉक रूम से सामान निकालने के बाद यात्रा की।
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प्रधानमंत्री मोदी के आगमन को लेकर शहर में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए। कार्यक्रम स्थल के आसपास स्थित 20 से अधिक इलाकों में तो कर्फ्यू जैसे हालात बने रहे। इनमें जीवनशाह, खंडेराव गेट, पुरानी तहसील, बाबूलाल कारखाना, हाइडिल कॉलोनी, कुंज बिहारी कॉलोनी, शक्ति नगर, बीकेडी, पंचकुइयां, आशिक चौराहा, चंदा होटल के पास सिविल लाइन, एसपीआई इंटर कॉलेज समेत आसपास के मुहल्ले शामिल रहेे। इन इलाकों की गलियां जो मुख्य सड़क को जोड़ती थी उनको बैरिकेडिंग लगाकर बंद कर दिया गया। दोपहर तीन बजे के बाद इन गलियों से न तो वाहनों को आने जाने दिया गया और न ही लोगों को आगे बढ़ने दिया। सुबह से ही आंतिया तालाब, खंडेराव गेट, आशिक चौराहा, तहसील, जीवनशाह, बीकेडी समेत आसपास के बाजार में व्यापारियों ने अपनी स्वेच्छा से दुकानों को बंद रखा। इलाइट चौराहे के आसपास की भी तमाम दुकानें बंद रहीं। बाजार में ग्राहक भी दिखाई नहीं दिए। लोगों को आशंका बनी रही कि वह बाजार जाए और दुकान बंद मिली तो उनको बेवजह परेशान होना पड़ेगा। दूसरा परिवर्तित मार्ग की उलझन में फंसने से भी लोग बचते रहे। आम दिनों की तुलना में शहर की हर प्रमुख सड़क पर वाहनों की भागदौड़ बेहद कम रही। लोग अपने घरों में ही रहकर टीवी पर राष्ट्र रक्षा समर्पण पर्व कार्यक्रम देखते रहे। हर जगह केवल कार्यक्रम की चर्चा होती रही।
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क्लॉक रूम में जमा कराया सामान
शहर क्षेत्र के तमाम ऐसे लोग जिनको शाम या रात में ट्रेन पकड़कर जाना था। इनमें कई परिवार दिन में ही स्टेशन पर पहुंच गए। कई लोग परेशानी से बचने के लिए अपना सामान पहले ही रेलवे स्टेशन के क्लॉक रूम में जमा करवा आए। इसके बाद वह ट्रेन आने के वक्त स्टेशन पर पहुंच गए और क्लॉक रूम से सामान निकालने के बाद यात्रा की।
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