{"_id":"420213675932f0043d94fff6018a6363","slug":"on-the-way-to-education-came-six-daughters-hindi-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"शिक्षा की राह पर चल निकलीं छह बेटियां","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
शिक्षा की राह पर चल निकलीं छह बेटियां
झांसी / ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jul 2015 12:37 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बुधवार को गुदरी क्षेत्र में अमर उजाला का ‘बेटी ही बचाएगी’ अभियान
विज्ञापन
बेसिक शिक्षा विभाग के सहयोग से चलाया गया। इस दौरान शिक्षा से वंचित 11
बच्चों को विद्यालयों में ऑन स्पॉट प्रवेश दिलाया गया। कई परिवारों के
लोगों ने अपने बच्चों की पढ़ाई में गरीबी व घरेलू कामकाज को रोड़ा बताया।
बृहस्पतिवार को प्राथमिक विद्यालय उन्नाव गेट कन्या/बालक से सुबह नौ बजे से
अभियान चलाया जाएगा।
गुदरी स्थित प्राथमिक विद्यालय से आर्य समाज कन्या, शारदा सदन और प्राथमिक विद्यालय डरू भौडे़ला के साथ ही भैरो निकुं ज प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने हाथों में शिक्षा संबंधी नारे लिखे बैनर व तख्तियां लेकर रैली निकाली। इस दौरान शिक्षकों में एबीआरसी चौधरी धर्मेंद्र, दीपचंद, वीना तिवारी, कांती देवी, प्रकाश वाला द्विवेदी, संजीव राय, शकुंतला देवी, सोनिया अग्रवाल, जाहिदा खातून, ममता मिश्रा, उर्मिला सेन, रामकुमारी सोनी व विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्षों व सदस्यों ने नामांकन पखवाड़ा व प्रवेश उत्सव के तहत बुलावा टोलियां बनाकर अमर उजाला टीम के साथ गुदरी, सूजे खां खिड़की बडापुरा, शंकर सिंह का बगीचा, गणेश मढ़िया आदि क्षेत्रों में भ्रमण किया और शिक्षा से वंचित बच्चों के अभिभावकों को शिक्षा का अधिकार सहित विभिन्न शैक्षिक बिंदुओं पर बातचीत कर 11 बच्चों को ऑन स्पॉट प्रवेश दिलाया।
इस दौरान कई परिवारों ने आर्थिक संकट को उनके बच्चों की पढ़ाई में रोड़ा बनने की मुख्य वजह बताया। कक्षा पांच के पश्चात पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हुई रानी की मां लीला बीड़ी श्रमिक हैं। उन्होंने बताया कि महंगाई ने उनकी बेटी की पढ़ाई छुड़वाई है। दिन भर बीड़ी बना कर वह मात्र 20 से 30 रुपये ही कमा पाती हैं। रानी के पिता बाहर काम करते हैं। ऐसे में बेटी की पढ़ाई कैसे संभव है। वहीं कक्षा नौ के पश्चात पढ़ाई छोड़ने वाली उमा भारती की मां रज्जो ने बताया कि अगल-बगल किसी लड़की के स्कूल नहीं जाने पर उसे अकेले भेजने में हिचक होती है। ऐसे में घर में बीड़ी बनाकर कम से कम परिवार चलाने में मदद तो करती है।
इन बच्चों का हुआ ऑन स्पॉट प्रवेश
बुधवार को चले अभियान में 11 लड़के-लड़कियों का ऑन स्पॉट प्रवेश कराया गया। बेटियों में पूजा, प्रीति, रानी, प्रियंका, श्वेता, आरती हैं। वहीं बालकों में अनिकेत, अमित, यश, रोहित, कृष्णा शामिल हैं।
खुद के साथ बहन का भी प्रवेश कराया
सिर्फ दस वर्ष की आयु में एक बेटी द्वारा परिवार का संचालन, यह आश्चर्य नहीं बल्कि सत्य है। शंकर सिंह का बगीचा स्थित दस वर्षीय श्वेता की भी अपनी कहानी है। मां के देहांत व पिता के व्यसनों में डूबने पर तीन बहनों में बड़ी श्वेता न सिर्फ अपनी बूढ़ी दादी गोमती, बल्कि छोटी बहनों का भी सहारा बनी। किराए के मकान में रहने वाली नन्हीं श्वेता जिसे शिक्षा की महत्ता बताने पर उसने न सिर्फ अपना ऑन स्पॉट प्रवेश कराया, बल्कि अपनी छोटी बहन प्रियंका का भी प्रवेश कराया। हालांकि उसकी एक बहन पढ़ने जाती है। उल्लेखनीय है कि दादी की पेंशन पर परिवार चलता है और परिवार की मुखिया दस वर्षीय श्वेता है।
गुदरी स्थित प्राथमिक विद्यालय से आर्य समाज कन्या, शारदा सदन और प्राथमिक विद्यालय डरू भौडे़ला के साथ ही भैरो निकुं ज प्राथमिक विद्यालय के विद्यार्थियों ने हाथों में शिक्षा संबंधी नारे लिखे बैनर व तख्तियां लेकर रैली निकाली। इस दौरान शिक्षकों में एबीआरसी चौधरी धर्मेंद्र, दीपचंद, वीना तिवारी, कांती देवी, प्रकाश वाला द्विवेदी, संजीव राय, शकुंतला देवी, सोनिया अग्रवाल, जाहिदा खातून, ममता मिश्रा, उर्मिला सेन, रामकुमारी सोनी व विद्यालय प्रबंध समिति के अध्यक्षों व सदस्यों ने नामांकन पखवाड़ा व प्रवेश उत्सव के तहत बुलावा टोलियां बनाकर अमर उजाला टीम के साथ गुदरी, सूजे खां खिड़की बडापुरा, शंकर सिंह का बगीचा, गणेश मढ़िया आदि क्षेत्रों में भ्रमण किया और शिक्षा से वंचित बच्चों के अभिभावकों को शिक्षा का अधिकार सहित विभिन्न शैक्षिक बिंदुओं पर बातचीत कर 11 बच्चों को ऑन स्पॉट प्रवेश दिलाया।
इस दौरान कई परिवारों ने आर्थिक संकट को उनके बच्चों की पढ़ाई में रोड़ा बनने की मुख्य वजह बताया। कक्षा पांच के पश्चात पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हुई रानी की मां लीला बीड़ी श्रमिक हैं। उन्होंने बताया कि महंगाई ने उनकी बेटी की पढ़ाई छुड़वाई है। दिन भर बीड़ी बना कर वह मात्र 20 से 30 रुपये ही कमा पाती हैं। रानी के पिता बाहर काम करते हैं। ऐसे में बेटी की पढ़ाई कैसे संभव है। वहीं कक्षा नौ के पश्चात पढ़ाई छोड़ने वाली उमा भारती की मां रज्जो ने बताया कि अगल-बगल किसी लड़की के स्कूल नहीं जाने पर उसे अकेले भेजने में हिचक होती है। ऐसे में घर में बीड़ी बनाकर कम से कम परिवार चलाने में मदद तो करती है।
इन बच्चों का हुआ ऑन स्पॉट प्रवेश
बुधवार को चले अभियान में 11 लड़के-लड़कियों का ऑन स्पॉट प्रवेश कराया गया। बेटियों में पूजा, प्रीति, रानी, प्रियंका, श्वेता, आरती हैं। वहीं बालकों में अनिकेत, अमित, यश, रोहित, कृष्णा शामिल हैं।
खुद के साथ बहन का भी प्रवेश कराया
सिर्फ दस वर्ष की आयु में एक बेटी द्वारा परिवार का संचालन, यह आश्चर्य नहीं बल्कि सत्य है। शंकर सिंह का बगीचा स्थित दस वर्षीय श्वेता की भी अपनी कहानी है। मां के देहांत व पिता के व्यसनों में डूबने पर तीन बहनों में बड़ी श्वेता न सिर्फ अपनी बूढ़ी दादी गोमती, बल्कि छोटी बहनों का भी सहारा बनी। किराए के मकान में रहने वाली नन्हीं श्वेता जिसे शिक्षा की महत्ता बताने पर उसने न सिर्फ अपना ऑन स्पॉट प्रवेश कराया, बल्कि अपनी छोटी बहन प्रियंका का भी प्रवेश कराया। हालांकि उसकी एक बहन पढ़ने जाती है। उल्लेखनीय है कि दादी की पेंशन पर परिवार चलता है और परिवार की मुखिया दस वर्षीय श्वेता है।