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सात सौ रुपया महीना देने पर मिलता है रोजाना सिर्फ दस मिनट पानी

Sat, 04 Dec 2021 01:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sat, 04 Dec 2021 01:27 AM IST
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On giving seven hundred rupees a month, you get only ten minutes of water every day
झांसी। नगर निगम सीमा के दायरे में सिमरहा, भगवंतपुरा समेत आसपास के डेढ़ दर्जन इलाके बीस साल शामिल हो गए लेकिन, इन इलाकों की तस्वीर नहीं बदली। शहरी इलाके में आने के बावजूद सरकारी पाइपलाइन अभी तक यहां नहीं पहुंची। इसका फायदा इन इलाकों में सक्रिय पानी माफिया उठाते हैं। महज दस मिनट पानी देने के लिए हर घर से सात सौ रुपया महीना वसूला जाता है। यहां रहने वालों का कहना है शहरी सीमा में शामिल होने का उनको कोई फायदा नहीं हुआ।
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वर्ष 2002 में नगर निगम सीमा के भीतर 18 गांव शामिल हुए थे। इसके बाद यहां बसावट में तेजी आ गई। उम्मीद थी नगर निगम में शामिल होते ही पानी, बिजली, सड़क जैसी सुविधा बढ़ जाएगी। भगवंतपुरा इलाके की आबादी करीब आठ हजार है। यहां पानी का कोई सरकारी इंतजाम नहीं है। यहां दो किलोमीटर दूर से ठेकेदार बोरिंग के जरिए पानी पहुंचाते हैं।
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स्थिति यह है कि बिजली के तारों की तरह पाइपलाइन घरों के ऊपर से बिछाई गई है। पानी लेने के लिए हर महीने सात सौ रुपये इन ठेकेदारों को देना पड़ता है। इसमें सिर्फ दस मिनट ही पानी मिलता है। इतने समय में उनको पूरा पानी भरना होता है। सालों से यह व्यवस्था चल रही है।
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पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति भी दुरुस्त नहीं
झांसी। इन पूरे इलाके की बिजली आपूर्ति भी दुरुस्त नहीं हुई। स्थानीय लोगों के मुताबिक तार पुराने हो चुके हैं। खंभे भी नहीं बदले गए। इस वजह से अकसर तार टूटने की घटना होती है। कई बार शिकायत की जा चुकी लेकिन, बिजली विभाग के लोग नहीं आते। बिजली कटौती का भी समय तय नहीं है। कई-कई घंटे बिजली नहीं आती। पूरे इलाके में शहरी दर के मुताबिक बिजली बिल वसूला जाता है लेकिन, आपूर्ति ग्रामीण क्षेत्र के मुताबिक होती है।
नगर निगम भी इन दूर-दराज के इलाकों से कन्नी काटे हुए है। सिमराहा, कोछाभांवर, करगुवां आदि इलाकों के लोगों की शिकायत है कि यहां अभी तक घरों से कूड़ा नहीं उठवाया जा रहा। सड़क के किनारे बने अस्थाई कूड़ा घरों में कूड़ा डंप होता है। सफाई की व्यवस्था न होने से मलेरिया और डेंगू का की बीमारी आम है। गलियां क्षतिग्रस्त हो चुकीं लेकिन, यह भी नहीं बन रही हैं।
- इस पूरे इलाके की सबसे बड़ी समस्या पानी न मिलने की है। सात सौ रुपये देने के बाद भी पानी पर्याप्त नहीं मिलता है।
द्वारिका प्रसाद साहू
- नगर निगम के भीतर बीस साल पहले शामिल हो चुका लेकिन, न पानी मिल रहा न सफाई। यहां न हैंडपंप है न पीने की पाइप लाइन बिछाई गई।
मंशाराम पाल
- पानी की समस्या सबसे बड़ी है। कई बार शिकायत की गई। हम लोगों को उम्मीद थी कि नगर निगम में आने के बाद यहां सुविधाएं बढ़ेंगी लेकिन वह भी नहीं हुआ।
विमला
- सफाई के लिए कोई नहीं आता। कूड़ा मोहल्ले में ही पड़ा रहता है। नालियों की सफाई भी नहीं होती। इस वजह से बीमारियां भी फैलती हैं।
सपना
- बिजली के आने-जाने का कोई समय तय नहीं है। मनमाने तरीके से कटौती होती है। इस पूरे इलाके से शहरी दरों से बिजली का बिल लिया जाता है। गंगाराम
- घरों से कूड़ा उठाने कोई नहीं आता। मोहल्ले के लोगों को कूड़ा फेंकने की व्यवस्था खुद करनी पड़ती है।
पदम
न कोई डाकघर, न कोई पुलिस थाना
इस पूरे इलाके की आबादी करीब 30-35 हजार के करीब है लेकिन, निगम सीमा का दायरा बढ़ने के बावजूद यहां न तो नया डाकघर खुला न कोई पुलिस थाना। इसका अधिकांश हिस्सा सदर बाजार थाने के अंतर्गत आता है। इस इलाके से थाने की दूरी करीब छह किमी है। कोई घटना होने पर पुलिस को यहां पहुंचने में भी काफी समय लग जाता है।

हवा के रास्ते पहुंचाई गई है पाइपलाइन
अमूमन पीने का पाइपलाइन जमीनों पर बिछाए जाते हैं लेकिन, भगवंतपुरा समेत आसपास के तमाम मोहल्लों में यह पाइपलाइन जमीन में नहीं बल्कि बिजली के तारों की तरह ऊपर-ऊपर ले जाया गया है। यहां पाइपलाइन बिछाने का पूरा काम प्राइवेट लोगों ने कराया हुआ है। पानी चोरी न होने पाए इस वजह से यह पाइपलाइन ऊपर के रास्ते से लोगों के घरों तक पहुंचाया गया है।
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