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बेसमेंट में भी चल रहे हैं नर्सिंग होम, ऊपर आवास भी
jhansi
Updated Sun, 30 Jul 2017 01:02 AM IST
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प्रशासन
- फोटो : demo pic
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शनिवार को जांच के दौरान पता लगा कि नियमों और मानकों धता बताते हुए कई नर्सिंग होम बेसमेंट भी चल रहे हैं। फायर ब्रिगेड की टीम ब्यौरा इकट्ठा कर कर रही है और शीघ्र ही पूरी रिपोर्ट डीएम को दी जाएगी। इस बीच कुछ नर्सिंग होम संचालकों ने अग्निशमन यंत्र लगवाने का काम शुरू कर दिया है। उन्हें हिदायत दी गई है कि वे नियमानुसार नक्शा पास करवाएं। साथ ही अग्निशमन के पुख्ता इंतजाम करें।
फायर ब्रिगेड टीम ने शनिवार कोे मेडिकल कॉलेज के सामने और आसपास नर्सिंग होमो की जांच की। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) महावीर सिंह ने बताया कि जब वह टीम के साथ जांच के लिए शंकर हॉस्पिटल पहुंचे, तो वहां पर बेसमेंट तक में मरीज भर्ती थे, जो कि नियम विरुद्ध है। मुख्यत: बेसमेंट का इस्तेमाल पार्किंग के लिए होना चाहिए। इस हॉस्पिटल में पानी का टैंक तो है, लेकिन इसे जोड़ने वाली पाइप लाइन नहीं है। यदि आग लग गई तो पर्याप्त पानी मिलना मुश्किल है। नौ अग्निशमन यंत्र लगे हैं, लेकिन इसमें से चार की मियाद खत्म हो चुकी है।
अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि पहले भी सीएमओ को पत्र लिखकर बताया जा चुका है कि अस्पताल में आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। यहां पर होज पाइप और डाउन कमर सिस्टम भी नहीं है। राघवेंद्र नर्सिंग होम की जांच में पता लगा कि यहां अग्निशमन यंत्र लगे हैं। इस नर्सिंग होम के ऊपरी माले पर आवास बना है, जो नियमानुसार गलत है। इसी तरह जियालाल नर्सिंग होम में भी पानी का टैंक तो था, पर इससे जोड़ने के लिए पाइप लाइन नदारद थी। यहां लगे अग्निशमन यंत्रों में एक की मियाद खत्म हो चुकी है। कैलाश जैन अस्पताल में अग्निशमन यंत्र लगे मिले। यहां पर होज रील भी मिली। इसी प्रकार, आनंद अस्पताल में भी होज रील और अग्निशमन यंत्र लगे मिले। सीएफओ ने बताया कि नर्सिंग होम संचालकों से कहा गया है कि वे उन अग्निशमन यंत्रों को तत्काल बदलवा लें, जिनकी मियाद खत्म हो चुकी है। साथ ही जहां मानक के मुताबिक अग्निशमन यंत्र नहीं हैं, वहां उनकी संख्या भी बढ़वा लें। नर्सिंग होमों की जांच रिपोर्ट शीघ्र ही जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी और फिर उनके स्तर से कार्रवाई होगी।
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फायर ब्रिगेड टीम ने शनिवार कोे मेडिकल कॉलेज के सामने और आसपास नर्सिंग होमो की जांच की। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) महावीर सिंह ने बताया कि जब वह टीम के साथ जांच के लिए शंकर हॉस्पिटल पहुंचे, तो वहां पर बेसमेंट तक में मरीज भर्ती थे, जो कि नियम विरुद्ध है। मुख्यत: बेसमेंट का इस्तेमाल पार्किंग के लिए होना चाहिए। इस हॉस्पिटल में पानी का टैंक तो है, लेकिन इसे जोड़ने वाली पाइप लाइन नहीं है। यदि आग लग गई तो पर्याप्त पानी मिलना मुश्किल है। नौ अग्निशमन यंत्र लगे हैं, लेकिन इसमें से चार की मियाद खत्म हो चुकी है।
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अग्निशमन अधिकारी ने बताया कि पहले भी सीएमओ को पत्र लिखकर बताया जा चुका है कि अस्पताल में आग बुझाने के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। यहां पर होज पाइप और डाउन कमर सिस्टम भी नहीं है। राघवेंद्र नर्सिंग होम की जांच में पता लगा कि यहां अग्निशमन यंत्र लगे हैं। इस नर्सिंग होम के ऊपरी माले पर आवास बना है, जो नियमानुसार गलत है। इसी तरह जियालाल नर्सिंग होम में भी पानी का टैंक तो था, पर इससे जोड़ने के लिए पाइप लाइन नदारद थी। यहां लगे अग्निशमन यंत्रों में एक की मियाद खत्म हो चुकी है। कैलाश जैन अस्पताल में अग्निशमन यंत्र लगे मिले। यहां पर होज रील भी मिली। इसी प्रकार, आनंद अस्पताल में भी होज रील और अग्निशमन यंत्र लगे मिले। सीएफओ ने बताया कि नर्सिंग होम संचालकों से कहा गया है कि वे उन अग्निशमन यंत्रों को तत्काल बदलवा लें, जिनकी मियाद खत्म हो चुकी है। साथ ही जहां मानक के मुताबिक अग्निशमन यंत्र नहीं हैं, वहां उनकी संख्या भी बढ़वा लें। नर्सिंग होमों की जांच रिपोर्ट शीघ्र ही जिलाधिकारी को सौंपी जाएगी और फिर उनके स्तर से कार्रवाई होगी।
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