फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Jhansi News ›   Numbness injections in the spine behind the chest may reduce the risk of cesarean delivery

Jhansi News: छाती के पीछे रीढ़ में सुन्नता के इंजेक्शन से सिजेरियन डिलीवरी के जोखिम हुए कम

Sun, 29 Jun 2025 02:04 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 29 Jun 2025 02:04 AM IST
विज्ञापन
Numbness injections in the spine behind the chest may reduce the risk of cesarean delivery

विज्ञापन




अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। उच्च रक्तचाप प्रसव पीड़िता के ऑपरेशन के दौरान छाती के पीछे रीढ़ में सुन्नता के इंजेक्शन से ब्लड प्रेशर व हृदय गति नियंत्रित पाई गई। वहीं, कमर की रीढ़ में सुन्नता के इंजेक्शन से रक्तचाप गिरने का जोखिम तुलनात्मक रूप से ज्यादा पाया गया। ये तथ्य मेडिकल कॉलेज में पिछले 10 माह में 160 गर्भवती महिलाओं पर हुए शोध में सामने आए हैं, जो सीटीआरआई (क्लीनिकल ट्रायल रजिस्ट्री ऑफ इंडिया) में पंजीकृत हो गया है। जर्नल में प्रकाशन के लिए भेज दिया गया है।



शोधकर्ता एनेस्थिसिया विभाग के प्रोफेसर (डॉ.) अंशुल जैन ने बताया कि शोध में गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से पीड़ित 160 महिलाओं को शामिल किया गया। 80 महिलाओं को छाती के पीछे की रीढ़ (टी-8 व टी-10) में सुन्नता के इंजेक्शन दिए गए। इससे सिर्फ पेट व उसके आसपास हिस्सा सुन्न रहा। टांगों की मांसपेशियों में शक्ति (मोटर फंक्शन) बनी रही। ब्लड प्रेशर व ह्रदय गति स्थित रही। जटिलता भी काफी कम रही। वहीं, 80 महिलाओं को कमर की रीढ़ में सुन्नता के इंजेक्शन दिए गए। परिणाम से पता चला कि दोनों ग्रुप की महिलाओं में ऑपरेशन के दौरान सुन्नता सही रही। छाती की रीढ़ में सुन्नता का इंजेक्शन दिया गया तो रक्तचाप गिरने का जोखिम 11.7 फीसदी रहा। जबकि, कमर में सुन्नता का इंजेक्शन देने पर रक्तचाप गिरने का जोखिम 26.3 फीसदी रहा।
विज्ञापन


एनेस्थीसिया विभाग की एसोसिएट प्रोफेसर (डॉ.) शिवाली पांडेय ने बताया कि छाती के पीछे रीढ़ में सुन्नता (थोरैसिक तकनीक) से दर्द नियंत्रण (एनाल्जेसिया), मांसपेशियों की पर्याप्त शिथिलता (मसल रिलेक्सेशन) और कम जटिलताओं के साथ सर्जरी होती है। स्त्री एवं प्रसूति विभाग की एसोसिएशन प्रोफेसर (डॉ.) दिव्या जैन ने बताया कि गर्भावस्था के दौरान उच्च रक्तचाप आम है। ऐसे मरीजों का प्रबंधन कठिन होता है क्योंकि सूजन व उच्च रक्तचाप जैसी समस्याएं होती हैं। ऐसे में सुरक्षित और प्रभावशाली एनेस्थीसिया तकनीक की जरूरत होती है। शोध में डॉ. फहाद सुहैल, डॉ. सिप्पी अग्रवाल और डॉ. चारू ठाकुर (सीनियर रेजिडेंट) भी शामिल रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन




0- क्या होता है प्री-एक्लेम्पिया

यह गंभीर चिकित्सा स्थिति है, जो गर्भावस्था के करीब 20 सप्ताह बाद हो सकती है। इसमें गर्भवती को उच्च रक्तचाप, पेशाब में प्रोटीन, सूजन, सिरदर्द आदि की दिक्कत होती है। ये दिक्कतें प्रसव बाद सही हो जाती हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed