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अब सम्मान निधि लौटाने पहुंच रहे ‘किसान’
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झांसी। पीएम किसान सम्मान निधि वापस करने वाले किसान सामने आने लगे हैं। ऐसा पात्र किसानों की पड़ताल शुरू होने के बाद हुआ है। कई किसान कृषि कार्यालय अपनी सम्मान निधि खत्म कराने की मांग करते हुए पहुंच रहे हैं लेकिन, तकनीकी वजहों से उनकी सम्मान निधि खत्म नहीं हो रही।
पीएम किसान सम्मान निधि के जरिए किसानों को सालाना छह हजार रुपये दिए जाते हैं। शुरूआत में सीमांत किसानों को इसमें शामिल किया गया, लेकिन बाद में जिनके पास भी कृषि योग्य भूमि थी, उन सभी को इसमें जोड़ दिया गया। यहीं से गड़बड़ी आरंभ हो गई। लेखपालों ने सत्यापन के बजाए खतौनी के आधार पर ही सभी को किसान बताते हुए सूची भेज दी। इसी आधार पर बैंक खाते में सम्मान निधि आने लगी।
पिछले माह से सत्यापन शुरू हुआ, तो इनकी पोल खुलनी शुरू हुई। सत्यापन में मालूम चला कि डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे प्रोफेशनल्स तक सम्मान निधि ले रहे हैं। कई अफसर भी सामने आए, जिनके पास पुश्तैनी कृषि भूमि होने के नाते सम्मान निधि मिल रही थी, जबकि वे पात्रता से बाहर थे। पड़ताल शुरू होने के बाद किसान बने यह प्रोफेशनल्स अब सम्मान निधि वापस करना चाहते हैं लेकिन, रकम वापस करने में भी उनके पसीने छूट रहे हैं। अभी सिर्फ पोर्टल से उनके नाम अलग किए जा रहे, लेकिन पैसा वापस नहीं हो रहा। कई लोगों ने चालान जमा कर दिए, लेकिन इसके बाद भी उनके पास छठवीं किस्त आ गई। ऐसे में यह लोग अफसरों के चक्कर काट रहे हैं।
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वहीं, अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल से नाम हटने के बाद ही किस्त बंद होगी। यह नाम सेंट्रल पोर्टल से ही हटते हैं। अब तक 1,300 से अधिक अपात्र किए गए हैं। बता दें कि जनपद में कुल 2,46,150 किसान चिह्नित किए गए थे। प्रभारी उपनिदेशक केके सिंह का कहना है अपात्रों के नाम हटवाए जा रहे।
अब भरवाए जा रहे शपथ पत्र
अब जिन लाभार्थियों को किसान सम्मान निधि दी जा रही है, उनसे शपथ पत्र भरवाए जा रहे। लाभार्थी को यह बताना होगा कि परिवार में दो हेक्टेयर से अधिक जमीन, भूतपूर्व अथवा वर्तमान संवैधानिक पद धारक, परिवार में केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार, अर्ध सरकारी संस्थान, नियमित कर्मचारी, परिवार में किसी के आयकर भुगतान, डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, चार्टर्ड एकाउंटेंट अथवा आर्कीटेक्ट पेशे में न होने का शपथ पत्र देना होगा। गलत सूचना देने वालों से वसूली भी की जाएगी।
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पीएम किसान सम्मान निधि के जरिए किसानों को सालाना छह हजार रुपये दिए जाते हैं। शुरूआत में सीमांत किसानों को इसमें शामिल किया गया, लेकिन बाद में जिनके पास भी कृषि योग्य भूमि थी, उन सभी को इसमें जोड़ दिया गया। यहीं से गड़बड़ी आरंभ हो गई। लेखपालों ने सत्यापन के बजाए खतौनी के आधार पर ही सभी को किसान बताते हुए सूची भेज दी। इसी आधार पर बैंक खाते में सम्मान निधि आने लगी।
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पिछले माह से सत्यापन शुरू हुआ, तो इनकी पोल खुलनी शुरू हुई। सत्यापन में मालूम चला कि डॉक्टर, इंजीनियर, चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे प्रोफेशनल्स तक सम्मान निधि ले रहे हैं। कई अफसर भी सामने आए, जिनके पास पुश्तैनी कृषि भूमि होने के नाते सम्मान निधि मिल रही थी, जबकि वे पात्रता से बाहर थे। पड़ताल शुरू होने के बाद किसान बने यह प्रोफेशनल्स अब सम्मान निधि वापस करना चाहते हैं लेकिन, रकम वापस करने में भी उनके पसीने छूट रहे हैं। अभी सिर्फ पोर्टल से उनके नाम अलग किए जा रहे, लेकिन पैसा वापस नहीं हो रहा। कई लोगों ने चालान जमा कर दिए, लेकिन इसके बाद भी उनके पास छठवीं किस्त आ गई। ऐसे में यह लोग अफसरों के चक्कर काट रहे हैं।
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वहीं, अधिकारियों का कहना है कि पोर्टल से नाम हटने के बाद ही किस्त बंद होगी। यह नाम सेंट्रल पोर्टल से ही हटते हैं। अब तक 1,300 से अधिक अपात्र किए गए हैं। बता दें कि जनपद में कुल 2,46,150 किसान चिह्नित किए गए थे। प्रभारी उपनिदेशक केके सिंह का कहना है अपात्रों के नाम हटवाए जा रहे।
अब भरवाए जा रहे शपथ पत्र
अब जिन लाभार्थियों को किसान सम्मान निधि दी जा रही है, उनसे शपथ पत्र भरवाए जा रहे। लाभार्थी को यह बताना होगा कि परिवार में दो हेक्टेयर से अधिक जमीन, भूतपूर्व अथवा वर्तमान संवैधानिक पद धारक, परिवार में केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार, अर्ध सरकारी संस्थान, नियमित कर्मचारी, परिवार में किसी के आयकर भुगतान, डॉक्टर, इंजीनियर, अधिवक्ता, चार्टर्ड एकाउंटेंट अथवा आर्कीटेक्ट पेशे में न होने का शपथ पत्र देना होगा। गलत सूचना देने वालों से वसूली भी की जाएगी।