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अब किसानी उसकी, जिसके पास ज्ञानी है: नरेंद्र तोमर

Sun, 11 Feb 2024 01:49 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 11 Feb 2024 01:49 AM IST
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Now farming belongs to the one who has knowledge: Narendra Tomar
अमर उजाला ब्यूरो
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झांसी। मध्य प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि पहले कहावत थी कि किसानी उसी की, जिसके पास पानी है। मगर विज्ञान, अनुसंधान ने इस कहावत को बदल दिया है। अब किसानी उसकी है, जिसके पास ज्ञानी है। बोले कि कृषि विश्वविद्यालय मास्टर और वैज्ञानिक बना रहे हैं। मगर अब किसान भी तैयार करने होंगे। वह रानी लक्ष्मीबाई केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय में उत्तर क्षेत्रीय किसान मेला और प्रदर्शनी के समापन समारोह को संबोधित कर रहे थे।
उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड देश में पलायन के लिए जाना जाता था। यहां की जमीन जितनी उपजाऊ होनी चाहिए, उतनी नहीं थी। सिंचाई के साधन नहीं थे। हर साल यहां के लोग पलायन करते थे। किसानों की हालत दयनीय थी। जैसे ही क्षेत्र में केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय की स्थापना हुई और कृषि विज्ञान केंद्र की महत्ता बढ़ी तो लगातार दिनों दिन यूपी, एमपी के बुंदेलखंड में प्रगति की क्रांति आई है। किसान का जीवन बदलना शुरू हुआ है। दलहन, तिलहन की खेती के लिए बुंदेलखंड मुफीद माना जाता था। आज ऐसी कोई फसल नहीं जो बुंदेलखंड में न हो रही हो। जैविक, प्राकृतिक खेती की दृष्टि से इस क्षेत्र में रुझान बढ़ा है। अगर कृषि विश्वविद्यालय काम करे तो बुंदेलखंड ऑर्गेनिक खेती का हब बन जाएगा। बोले कि देश की आबादी 140 करोड़ है, जो कि 2050 तब बहुत बढ़ने वाली है। देशवासियों के भोजन की जिम्मेदारी कृषि वैज्ञानिक, किसान और कृषि मंत्रालय की है। कहा कि भारत पहले मांगने वाला देश था मगर अब आधी दुनिया हिंदुस्तान के सहारे है। मित्र देशों का पेट भरने की जिम्मेदारी भी देश के कृषि वैज्ञानिक, किसानों की है। इसके लिए नई पीढ़ी को भी कृषि के लिए आकर्षित करना होगा। कार्यक्रम में कुलाधिपति डॉ. पंजाब सिंह, मेयर बिहारी लाल आर्य, कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव सैमुएल परवीन कुमार, भारत सरकार के निदेशक प्रसार डॉ. एसके मिश्रा ने भी विचार रखे। मेला संयोजक डॉ. एसएस सिंह ने अतिथियों को सम्मानित किया। कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह ने मेले की जानकारी देते हुए कहा कि इसमें 15000 किसान जुड़ गए हैं। कृषि विश्वविद्यालय से संबद्ध दतिया के मत्स्य एवं पशु महाविद्यालय, मुरैना के उद्यानिकी काॅलेज का शनिवार को उद्घाटन हुआ। संचालन डॉ. अर्तिका सिंह ने किया। इस दौरान डॉ. एसके चतुर्वेदी, डॉ. अनिल कुमार, डाॅ. साधना पांडेय, डाॅ. केशव, डॉ. अलका जैन, डॉ. प्रियंका शर्मा, डाॅ. आरके सिंह, डॉ. वीपी सिंह, डाॅ. वीके बेहेरा, डॉ. मनमोहन डोवरयाल मौजूद रहे।
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कृषि छात्र किसान बनें तो विवि की भूमिका निभाएंगे
तोमर ने कहा कि कृषि छात्र वैज्ञानिक बनने की जगह किसान बन जाएं तो जहां वो खेती करेगा, उसके आसपास विश्वविद्यालय की भूमिका निभाने में सफल होंगे। बोले कि किसी भी विधा के क्षेत्र में शिक्षा ग्रहण करने वाला छात्र वैज्ञानिक या फिर मास्टर बनना चाहता है। कहा कि ओलंपिक में पदक लेने वाला नहीं होगा मगर दूसरे खिलाड़ियों को पदक मिले, उसके लिए मार्गदर्शन करने वाले मास्टर जरूर मिलेंगे। कृषि के क्षेत्र में भी यही अनुभव करता हूं। विश्वविद्यालय को वैज्ञानिक, शिक्षक के साथ किसान भी तैयार करना चाहिए। कहा कि कई कृषि विशेषज्ञों का पहले मार्गदर्शक, सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन और बाद में बड़े शहर में निवास ही उद्देश्य है। मगर कृषि वैज्ञानिक किसी क्षेत्र में खेती करने का संकल्प कर ले तो आसपास की तस्वीर बदल सकता है।
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इनका हुआ सम्मान
कार्यक्रम में एफपीओ, किसानों को सम्मानित किया गया, इसमें अर्जुन सिंह पटेल, सूरज सिंह, जमुना प्रसाद, मुदित चिरवरिया, हरिमोहन दुबे, आंचल मेहता, भूनना सहरिया, राजेश साहू, डुंडा सिंह, दर्शन कुमार शामिल हैं। पुष्प प्रदर्शनी के विजेता अनूप अग्रवाल, फूलों की सजावट में श्रुति माथुर, वार्षिक फूलों की सजावट में अनिल कुमार शर्मा आदि को प्रमाणप़त्र देकर सम्मानित किया। श्री अन्न प्रशिक्षण एवं पकवान प्रदर्शनी के विजेताओं में भोजन वर्ग में बुंदेली थाली के लिए डॉ. स्वप्निल मोदी को प्रथम, होटल ग्रैंड तुलसी को द्वितीय, रीना कुमारी मेहता को तृतीय पुरस्कार मिला। नाश्ता वर्ग में होटल नटराज सरोवर प्रथम, होटल लेमन ट्री द्वितीय, रामश्री गुप्ता तृतीय स्थान पर रहीं। मिष्ठान वर्ग में चायवाला फाउंडेशन (आनंदी महिला सहायता समूह, उरई) के ज्वार के रसगुल्ले को प्रथम, जायदा परवीन की रागी टर्किश आइसक्रीम को द्वितीय एवं नेहा सिंह को तृतीय पुरस्कार मिला। कई अन्य को भी पुरस्कृत किया गया।
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