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नहीं मिल रही बिजली, घरों पर लटक रहे ताले
झांसी/ब्यूरो
Updated Tue, 16 Feb 2016 01:16 AM IST
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झांसी। कालोनाइजर जगह-जगह प्लाटिंग कर कालोनियां तो बसाते जा रहे हैं, मगर कॉलोनी में बिजली विभाग के मानक पूरे न होने के कारण लोगों को कनेक्शन नहीं मिल पा रहे हैं। कनेक्शन न मिलने से कई नए घरों में ताले लटके हुए हैं।
दो दिन पूर्व झांसी दौरे पर आए मुख्य सचिव को महेंद्र पुरी कॉलोनी के पीछे व एफसीआई गोदाम के समीप डेवलप हो रही कॉलोनी में रहने वाले एक दर्जन से अधिक लोगों ने शिकायत की थी कि विद्युत विभाग उन्हें कनेक्शन नहीं दे रहा है। वह अपने घरों में बिना बिजली के नहीं रह सकते। मजबूरन घरों पर ताले पड़े हैं। इस पर संबधित अफसरों ने जो जवाब दिया, उसे सुनकर मुख्य सचिव भी उनकी कोई मदद नहीं कर सके।
दरअसल, अगर कोई बिल्डर या कोलोनाइजर प्लाट बेचकर या फ्लैट बनाकर कालोनी विकसित करता है तो इस स्थिति में उस कालोनी को विद्युत संयोजन तभी मिलेगा जब बिल्डर कालोनी में खंभे व तार खींचकर ढांचा स्वयं तैयार करवाए और खुद का ट्रांसफार्मर लगवाए। विद्युत विभाग अपनी इसी शर्त पर नई कालोनियों को संयोजन देता है।
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संयोजन देने की दूसरी शर्त यह है कि अगर नई बस्ती में किसी भी नए उपभोक्ता का घर निकट के विद्युत खंभे से चालीस मीटर दूर है तो उस स्थिति में अगर तीन उपभोक्ता एक साथ संयोजन लें, तभी बीच में एक खंभा लगाकर विभाग संयोजन देगा। इस कारण विद्युत विभाग नई विकसित कॉलोनियों में पैसा जमा करट्रांसफार्मर लगाने की शर्त पर ही संयोजन देने को कह रहा है।
ऐसे में लोग या तो अपने घर में ताले डालने या फिर चोरी से बिजली जलाने को मजबूर हैं। इनमें सूजे खां खिड़की के बाहर विकसित हो रहे मां पीतांबरा नगर (गेड़ा कालोनी), आईटीआई सिद्धेश्वर नगर का विस्तारित क्षेत्र, डड़िया मार्ग पर स्थित कुछ नए क्षेत्र आदि शामिल हैं। इन क्षेत्रों के लोग लगातार विद्युत विभाग के चक्कर लगा रहे हैं, मगर उनको संयोजन नहीं मिल पा रहा है।
इस संबंध में अधिशासी अभियंता (द्वितीय) पंकज अग्रवाल ने बताया कि नई विकसित कॉलोनियों में वहां के लोगों को ही पैसा एकत्रित कर ट्रांसफार्मर लगवाना होगा। अभी तक एक दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ विद्युत चोरी के मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं। उन्होंने आगाह किया कि किसी भी नई कॉलोनी में प्लॉट की रजिस्ट्री कराते समय इस बात का भी उल्लेख बिल्डर से कराएं कि वह कॉलोनी में विद्युत खंभे, तार खींचने व ट्रांसफार्मर लगवा कर देगा।
सांसद निधि से स्टीमेट बनाने पर चल रही है जांच
विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अंतर्गत आने वाली महेंद्र पुरी कॉलोनी के पीछे विकसित हो रही कॉलोनी के लोगों ने प्रयास कर सांसद निधि से विद्युत तार खींचने व ट्रांसफार्मर लगवाने के लिए स्वीकृत दिला दी थी। विद्युत विभाग ने भी स्टीमेट बनाकर स्वीकृति के लिए जिला प्रशासन के पास भेज दिया था। कुछ बजट भी रिलीज हो गया।
मगर इस मामले की शिकायत प्रदेश गृह सचिव से कर दी गई। इस पर अफसरों की ही जांच शुरू कर दी गई कि जब कॉलोनी विकसित हो रही है तो बिल्डर से यह खर्चा क्यों नहीं लिया गया? जांच अभी जारी है।
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दो दिन पूर्व झांसी दौरे पर आए मुख्य सचिव को महेंद्र पुरी कॉलोनी के पीछे व एफसीआई गोदाम के समीप डेवलप हो रही कॉलोनी में रहने वाले एक दर्जन से अधिक लोगों ने शिकायत की थी कि विद्युत विभाग उन्हें कनेक्शन नहीं दे रहा है। वह अपने घरों में बिना बिजली के नहीं रह सकते। मजबूरन घरों पर ताले पड़े हैं। इस पर संबधित अफसरों ने जो जवाब दिया, उसे सुनकर मुख्य सचिव भी उनकी कोई मदद नहीं कर सके।
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दरअसल, अगर कोई बिल्डर या कोलोनाइजर प्लाट बेचकर या फ्लैट बनाकर कालोनी विकसित करता है तो इस स्थिति में उस कालोनी को विद्युत संयोजन तभी मिलेगा जब बिल्डर कालोनी में खंभे व तार खींचकर ढांचा स्वयं तैयार करवाए और खुद का ट्रांसफार्मर लगवाए। विद्युत विभाग अपनी इसी शर्त पर नई कालोनियों को संयोजन देता है।
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संयोजन देने की दूसरी शर्त यह है कि अगर नई बस्ती में किसी भी नए उपभोक्ता का घर निकट के विद्युत खंभे से चालीस मीटर दूर है तो उस स्थिति में अगर तीन उपभोक्ता एक साथ संयोजन लें, तभी बीच में एक खंभा लगाकर विभाग संयोजन देगा। इस कारण विद्युत विभाग नई विकसित कॉलोनियों में पैसा जमा करट्रांसफार्मर लगाने की शर्त पर ही संयोजन देने को कह रहा है।
ऐसे में लोग या तो अपने घर में ताले डालने या फिर चोरी से बिजली जलाने को मजबूर हैं। इनमें सूजे खां खिड़की के बाहर विकसित हो रहे मां पीतांबरा नगर (गेड़ा कालोनी), आईटीआई सिद्धेश्वर नगर का विस्तारित क्षेत्र, डड़िया मार्ग पर स्थित कुछ नए क्षेत्र आदि शामिल हैं। इन क्षेत्रों के लोग लगातार विद्युत विभाग के चक्कर लगा रहे हैं, मगर उनको संयोजन नहीं मिल पा रहा है।
इस संबंध में अधिशासी अभियंता (द्वितीय) पंकज अग्रवाल ने बताया कि नई विकसित कॉलोनियों में वहां के लोगों को ही पैसा एकत्रित कर ट्रांसफार्मर लगवाना होगा। अभी तक एक दर्जन से अधिक लोगों के खिलाफ विद्युत चोरी के मुकदमे दर्ज कराए जा चुके हैं। उन्होंने आगाह किया कि किसी भी नई कॉलोनी में प्लॉट की रजिस्ट्री कराते समय इस बात का भी उल्लेख बिल्डर से कराएं कि वह कॉलोनी में विद्युत खंभे, तार खींचने व ट्रांसफार्मर लगवा कर देगा।
सांसद निधि से स्टीमेट बनाने पर चल रही है जांच
विद्युत वितरण खंड द्वितीय के अंतर्गत आने वाली महेंद्र पुरी कॉलोनी के पीछे विकसित हो रही कॉलोनी के लोगों ने प्रयास कर सांसद निधि से विद्युत तार खींचने व ट्रांसफार्मर लगवाने के लिए स्वीकृत दिला दी थी। विद्युत विभाग ने भी स्टीमेट बनाकर स्वीकृति के लिए जिला प्रशासन के पास भेज दिया था। कुछ बजट भी रिलीज हो गया।
मगर इस मामले की शिकायत प्रदेश गृह सचिव से कर दी गई। इस पर अफसरों की ही जांच शुरू कर दी गई कि जब कॉलोनी विकसित हो रही है तो बिल्डर से यह खर्चा क्यों नहीं लिया गया? जांच अभी जारी है।