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तीसरी लाइन: नॉन इंटरलॉकिंग काम कराने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा रेलवे

Amarujala Local Bureau अमर उजाला लोकल ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2020 09:04 PM IST
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non interlocking work challenge
झांसी - बबीना तीसरी रेल लाइन का काम नॉन इंटरलॉकिंग कार्य न हो पाने के कारण पिछड़ता जा रहा है। इस काम को पूरा करने के लिए दो सौ अधिक तकनीकी कर्मचारियों की आवश्यकता पड़ेगी। लेकिन, कोरोना महामारी के चलते निर्माण शाखा इतने कर्मचारी एक साथ बुलाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। इससे तीसरी रेल लाइन चालू की अवधि बढ़ती जा रही है। झांसी से बबीना के बीच तीसरी लाइन (25.35 किलोमीटर) को बिछाने का काम रेलवे का निर्माण संगठन कर रहा है। इन दिनों झांसी और बबीना के बीच पड़ने वाले चार बड़े और 18 पुलों का निर्माण लगभग पूरा कर लिया गया है। इनमें 12 छोटे पुल और झांसी से बिजौली के बीच एक बड़े पुल का निर्माण भी पूरा हो चुका है। पुरानी पटरियों को हटाकर नई पटरी डालने का काम अंतिम चरण में चल रहा है। कुल काम में नब्बे फीसदी पूरा कर लिया गया है। अब बिजौली, खजराहा व बबीना स्टेशन पर नॉन इंटरलॉकिंग का काम होना बाकी रह गया है। इसमें तीसरी रेल लाइन की पटरियों को उक्त तीनों स्टेशनों की लूप लाइन से जोड़ने और सिगनल लगाने का काम होगा। इस काम को पूरा करने में टीआरडी, एसएनटी और इंजीनियरिंग विभाग के दो सौ से अधिक कर्मचारी एक साथ काम करेंगे। एक स्टेशन पर काम को पूरा करने में 20 से 25 दिन का वक्त लग जाएगा। इस काम के पूरा होने के बाद ही रेल संरक्षा आयुक्त नई पटरी का निरीक्षण कर सकेंगे। उनकी अनुमति के बाद ही नई लाइन पर ट्रेनों का संचालन शुरू हो सकेगा। मगर, कोरोना महामारी के चलते निर्माण संगठन नॉन इंटरलॉकिंग कार्य के लिए एक साथ दो सौ कर्मचारियों की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। दूसरा, कई दूसरे जोन में नॉन इंटरलॉकिंग के कार्य के दौरान कई कर्मचारी कोरोना संक्रमित हो गए। यह भी एक कारण है। ऐसे में तीसरी रेल लाइन को चालू करने कीी स्थिति फिलहाल नहीं बन पा रही है। पूर्व में झांसी से बबीना के बीच तीसरी लाइन पर मार्च 2020 तक ट्रेनें दौड़ने का लक्ष्य बनाया गया था। अभी ये समस्याएं --------------- - मथुरा-झांसी-बीना लाइन पर मथुरा से झांसी के मध्य 12 प्रतिशत और झांसी- बीना के मध्य 22 प्रतिशत ओवर ट्रैफिक (ओवरलोड) है। - आए दिन ट्रेनें लेट हो जाती हैं, क्योंकि आवागमन अधिक होने के कारण प्रमुख ट्रेनों को पहले रास्ता देना जरूरी होता है। - कई बार ट्रेनों का संचालन बुरी तरह प्रभावित हो जाता है। प्रतिकूल मौसम में दिक्कत और बढ़ जाती है। - इन मार्गों पर यातायात को देखते हुए नई ट्रेनों की जरूरत है। दो पटरियां अब और बोझ सह सकने में अक्षम हैं। - पटरियों की मरम्मत करने के लिए अक्सर ट्रेनों का संचालन बंद करना पड़ता है। इसके लिए कभी-कभी लंबे समय के लिए ब्लाक लेना पड़ता है। ये मिलेगी राहत - इस रूट पर नई ट्रेनों को चलाने का रास्ता साफ हो जाएगा। - मालगाड़ियों के लिए बिल्कुल अलग लाइन हो जाएगी। - नई ट्रेनों के चलने पर यात्रियों के लिए आरक्षण कोटा बढ़ जाएगा। - मालगाड़ियों का समय पालन सुधरने पर माल समय पर पहुंचेगा। - दुर्घटना पर तीसरी रेल लाइन विकल्प के रूप में काम कर सकेगी।   2490 करोड़ में होगा काम पूरा निर्माण संगठन ने बबीना और बसई के बीच 13 में से 12 किलोमीटर लाइन बिछाने का काम 2018 के शुरुआत में ही कर लिया था। झांसी से बीना के बीच तीसरी लाइन (153 किलोमीटर) का काम 2490 करोड़ में पूरा होना है।
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