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बदला नजरिया, टूटी हिचक सुखद एहसास

Fri, 04 Oct 2019 02:03 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 04 Oct 2019 02:03 AM IST
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no loudspeeker in navratri
दुर्गा पंडाल पूजा की खबर में-------------------तानिष्का गर्ग
बदला नजरिया, टूटी हिचक सुखद एहसास
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झांसी। नवरात्र, गणेशोत्सव या अन्य त्योहार पंडालों में भक्ति गीतों के नाम पर फिल्मी धुनों पर कानफोड़ू संगीत भक्ति संगीत के महत्व को ही खत्म कर देता था। इतना ही नहीं, तेज आवाज से विद्यार्थियों की पढ़ाई, लोगों की नींद और मरीजों का चैन भी छिन जाता था। हृदय रोगियों से लेकर बुजुर्ग तक छटपटाते थे। धर्म का मामला होने के चलते कोई विरोध नहीं करता था। शहरवासियों के इस दर्द को इस नवरात्र अमर उजाला ने समझा और दुर्गा पंडाल आयोजकों व कमेटियों तक पहुंचाया। आयोजकों को एहसास हुआ कि अनजाने भजन, आरती के नाम पर ऊल जलूल संगीत किस तरह लोगों को सता रहा था। शहरवासियों की भी हिचक टूटी। भजन और संगीत के आनंदमयी रूप के प्रति उन्होंने बेबाक राय देना शुरू की। बहुत हद तक सुधार दिख रहा है।
दो कॉलम एक्शन फोटो के साथ:
पढ़ने के लिए ईयर फोन लगाना पड़ता था, अब संगीत सुमधुर...
नवरात्र हो या गणेशोत्सव, त्योहार शुरू होते ही शुरू हो जाता था कानफोड़ू संगीत। कभी कानों में फिल्मी गीतों की धुन पर बने भजनों की आवाज पहुंचती थी, तो कभी सीधे तौर पर फिल्मी गीत ही सुनने को मिलते थे। सुबह से देर रात तक यही स्थिति बनी रहती थी। पढ़ने के लिए कानों में ईयर फोन लगाना पड़ता था। घर में आपसी बोलचाल भी तेज आवाज में करनी पड़ती थी। लेकिन, इस बार माहौल बदला है। सुबह-शाम जरूर लाउडस्पीकर की आवाज सुनाई देती है, परंतु आवाज मध्यम और संगीत अच्छा होने की वजह से ये सुमधुर लगती है। जबकि, दिन में शांति बनी रहती है।
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- तनिषा गर्ग, (आईआईटी की तैयार कर रहींधर्मशाला मुहल्ला निवासी)
लोगों की भावनाओं को अमर उजाला के सोमवार के अंक में प्रकाशित खबर ‘‘भक्ति’ से हो ‘शक्ति’ की आराधना, शांति देने वाला हो संगीत’ के माध्यम से उठाया गया था, जिससे प्रभावित होकर श्री दुर्गा उत्सव महासमिति के पदाधिकारियों ने बैठक कर कमेटियों के लिए नियम तय किए। तय किया गया कि किसी भी पंडाल में फिल्मी गीतों की धुनों पर बने भजन नहीं बजाए जाएंगे। फिल्मी गानों पर भी किसी भी तरह के कार्यक्रम आयोजित नहीं किए जाएंगे। साउंड भी इतना खोला जाए, जिससे आसपास के लोगों को परेशानी न हो। खासतौर पर अस्पताल और स्कूलों के पास सजे पंडालों में धीमी आवाज में ही लाउडस्पीकर बजाया जाएगा। सुबह आरती के समय लाउडस्पीकर चलाया जा सकेगा। लेकिन, दोपहर में इसे बंद रखना होगा। नियमों का पालन करने वाली कमेटियों को सम्मानित करने का भी फैसला लिया गया। इसका असर नजर आने लगा है। शहर के ज्यादातर पंडालों में नियंत्रित आवाज और निश्चित समयावधि में ही लाउडस्पीकर बजाए जा रहे हैं। फिल्मी गानों की धुनों पर बने भजनों से भी परहेज किया जा रहा है। इससे लोग राहत में हैं।
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अपनी भक्ति से किसी को परेशानी न हो। हर धर्म यही कहता है। लेकिन, हो ठीक उलट रहा था। कई पंडालों में बजने वाला कानफोड़ू संगीत मन को विचलित कर देता था। लेकिन, अब इसमें सुधार आया है। नियंत्रित आवाज और निश्चित समयावधि में ही लाउडस्पीकर बजाए जा रहे हैं।
- माला मल्होत्रा, शिक्षिका, बाबूलाल कारखाने के पास
पूजा-आरती विधि विधान से होनी चाहिए। इसके लिए लाउडस्पीकर की कोई आवश्यकता नहीं होती है। ताली बजाते हुए लयबद्ध ढंग से गाई जाने वाली आरती अलग ही माहौल तैयार करती है। दुर्गा उत्सव पंडालों में लाउडस्पीकरों की आवाज को नियंत्रित कर अच्छा काम किया गया है।
- मयंक अग्रवाल, इलाइट
भक्ति के लिए शांति जरूरी होती है। इसके लिए शोर शराबे की आवश्यकता नहीं पड़ती है। शोर में तो भक्ति की ही नहीं जा सकती है। हालांकि, इस नवरात्र में माहौल बदला है। अमर उजाला और दुर्गा उत्सव समिति की पहल से पंडालों में लाउडस्पीकर की आवाज नियंत्रित हुई है।
- कामिनी, केके पुरी कॉलोनी
फिल्मी गानों की धुनों पर बने भजनों को सुनकर अच्छा नहीं लगता था। भजन के बोल कानों में पहुंचते ही ध्यान मूल गाने की ओर चला जाता था। लेकिन, इस बार नवरात्र में दुर्गा उत्सव पंडालों में ये गीत नहीं बजाए जा रहे हैं। पहल का असर हुआ है। इस गलती को लोगों ने सुधारा है।
- स्मिता सिंह, जेडीए कर्मचारी
तेज आवाज में लगातार साउंड की आवाज गूंजने से चिड़चिड़ापन होने लगता था। लेकिन, मामला धर्म से जुड़ा होने की वजह से कोई भी विरोध नहीं करता था। लेकिन, इस बार अच्छी पहल हुई है और इसका असर भी नजर आने लगा है। साउंड की आवाज को नियंत्रित कर लोगों ने सुधार किया है।

- संजीव लाला, पंचकुइयां
दुर्गा उत्सव पंडालों में न तो अब फिल्मी गीतों पर बने भजन सुनाई दे रहे हैं, साथ ही आवाज भी नियंत्रित हुई है। ये अच्छा काम हुआ है। इस नवरात्र से जो परंपरा शुरू हुई है। उसका आने वाले सालों में खासा असर देखने को मिलेगा। शांत भाव से शक्ति की आराधना का मौका मिल रहा है।
- मनीषा साहू, पीतांबरा इन्क्लेव
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