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अब नहीं चलेगा ‘ड्यूटी से गुल, वेतन फुल’ का फॉर्मूला
jhansi
Updated Tue, 14 Feb 2017 12:51 AM IST
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अब नहीं चलेगा ‘ड्यूटी से गुल, वेतन फुल’ का फॉर्मूला
- फोटो : demo
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स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण (एचएफडब्ल्यू) विभाग ने सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों और कर्मचारियों की शत प्रतिशत उपस्थिति तय करने करने के लिए ‘मानव संपदा सॉफ्टवेयर’ तैयार किया है। सॉफ्टवेयर को थंब और कॉर्निया इंप्रेशन मशीन से जोड़ा गया है। इसके जरिए लखनऊ में प्रदेश के सभी डॉक्टर, कर्मियों की उपस्थिति पता चल सकेगी। इससे उपस्थिति में छेड़छाड़ नहीं हो सकेगी। वेतन भी लखनऊ से जारी होगा।
एचएफडब्ल्यू विभाग की यह पहल कामचोर डॉक्टर और कर्मचारियों पर नकेल कसने में मददगार साबित होगी। अभी रजिस्टर पर उपस्थिति दर्ज होती है। रजिस्टर पर मिलीभगत की ‘सरकार’ चलती है। ड्यूटी समय से स्टाफ के गायब होने पर भी उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज होती है। अकसर वरिष्ठ अधिकारियों के औचक निरीक्षण में यह करतूत साबित भी हो चुकी है। कुछ डॉक्टर, कर्मी तो अधिकारियों से पैठ बनाकर कई दिनों तक गायब रहते हैं लेकिन तनख्वाह फुल लेते हैं। प्रदेश भर में ऐसी शिकायतें शासन स्तर के अधिकारियों को मिल रही थीं। इसको मद्देनजर रखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने ‘मानव संपदा सॉफ्टवेयर’ बनाया है। सॉफ्टवेयर में एचएफडब्ल्यू विभाग के अधीन आने वाले डॉक्टर, कर्मियों का नाम, पता, आधार कार्ड, पेन नंबर, मोबाइल नंबर, सर्विस का ब्योरा, वेतन का कोड नंबर, परिवार का विवरण आदि जानकारियां दर्ज होंगी। इसके जरिए ही जनवरी का वेतन बनाया जा रहा है। जिन्होंने अपनी डिटेल अपडेट करा दी है, उनका ही वेतन खाते में जाएगा। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विनोद कुमार यादव इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि बृहस्पतिवार को लखनऊ में हुई बैठक के दौरान यहां का पूरा ब्यौरा उपलब्ध करवा दिया गया है।
स्थानांतरण पर नहीं चलेगी मनमर्जी
‘मानव संपदा सॉफ्टवेयर’ से अब स्थानांतरण होने वाले डॉक्टर, कर्मियों की मनमर्जी भी नहीं चल सकेगी। ट्रांसफर होते ही उनका वेतन वहां से रोक दिया जाएगा। जब वह दूसरी जगह कार्यभार ग्रहण करेंगे, तब ही वेतन बनना शुरू होगा। मौजूदा समय में कई डॉक्टर स्थानांतरण के बाद कार्यभार ग्रहण नहीं करते थे। बाद में जुगाड़ से स्थानांतरण रुकवा लेते थे, साथ ही वेतन भी बनवा लेते थे।
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अधिकतर पर लागू
अभी यह योजना अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यालय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रभावी होगी। जल्द ही मेडिकल कॉलेज के सीएमएस, इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (जो सीएमओ के अधीन आते हैं), जेल के चिकित्सक, पुलिस अस्पताल के चिकित्सक व कर्मी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, पोस्ट पार्टम सेंटर आदि को भी सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा।
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एचएफडब्ल्यू विभाग की यह पहल कामचोर डॉक्टर और कर्मचारियों पर नकेल कसने में मददगार साबित होगी। अभी रजिस्टर पर उपस्थिति दर्ज होती है। रजिस्टर पर मिलीभगत की ‘सरकार’ चलती है। ड्यूटी समय से स्टाफ के गायब होने पर भी उपस्थिति रजिस्टर में दर्ज होती है। अकसर वरिष्ठ अधिकारियों के औचक निरीक्षण में यह करतूत साबित भी हो चुकी है। कुछ डॉक्टर, कर्मी तो अधिकारियों से पैठ बनाकर कई दिनों तक गायब रहते हैं लेकिन तनख्वाह फुल लेते हैं। प्रदेश भर में ऐसी शिकायतें शासन स्तर के अधिकारियों को मिल रही थीं। इसको मद्देनजर रखते हुए स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने ‘मानव संपदा सॉफ्टवेयर’ बनाया है। सॉफ्टवेयर में एचएफडब्ल्यू विभाग के अधीन आने वाले डॉक्टर, कर्मियों का नाम, पता, आधार कार्ड, पेन नंबर, मोबाइल नंबर, सर्विस का ब्योरा, वेतन का कोड नंबर, परिवार का विवरण आदि जानकारियां दर्ज होंगी। इसके जरिए ही जनवरी का वेतन बनाया जा रहा है। जिन्होंने अपनी डिटेल अपडेट करा दी है, उनका ही वेतन खाते में जाएगा। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. विनोद कुमार यादव इसकी पुष्टि करते हुए बताया कि बृहस्पतिवार को लखनऊ में हुई बैठक के दौरान यहां का पूरा ब्यौरा उपलब्ध करवा दिया गया है।
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स्थानांतरण पर नहीं चलेगी मनमर्जी
‘मानव संपदा सॉफ्टवेयर’ से अब स्थानांतरण होने वाले डॉक्टर, कर्मियों की मनमर्जी भी नहीं चल सकेगी। ट्रांसफर होते ही उनका वेतन वहां से रोक दिया जाएगा। जब वह दूसरी जगह कार्यभार ग्रहण करेंगे, तब ही वेतन बनना शुरू होगा। मौजूदा समय में कई डॉक्टर स्थानांतरण के बाद कार्यभार ग्रहण नहीं करते थे। बाद में जुगाड़ से स्थानांतरण रुकवा लेते थे, साथ ही वेतन भी बनवा लेते थे।
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अधिकतर पर लागू
अभी यह योजना अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण कार्यालय, मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, जिला अस्पताल, महिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और नवीन प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रभावी होगी। जल्द ही मेडिकल कॉलेज के सीएमएस, इमरजेंसी मेडिकल ऑफिसर (जो सीएमओ के अधीन आते हैं), जेल के चिकित्सक, पुलिस अस्पताल के चिकित्सक व कर्मी, नगर स्वास्थ्य अधिकारी, पोस्ट पार्टम सेंटर आदि को भी सॉफ्टवेयर से जोड़ा जाएगा।