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चुनावी ड्यूटी में कोरोना से जान गंवाने वाले 36 कर्मियों के आश्रितों को अब तक मुआवजा नहीं

Sun, 05 Sep 2021 01:14 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 05 Sep 2021 01:14 AM IST
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No compensation yet to the dependents of 36 personnel who lost their lives due to corona in election duty
झांसी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के दौरान कोविड से जान गंवाने वाले 36 कर्मचारियों के आश्रितों तक चार माह बाद भी सरकार मुआवजा नहीं पहुंचा सकी। परिवार के मुखिया को खो चुके आश्रित अब मुआवजा के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं। उनकी सुनवाई कहीं नहीं हो रही है। यह सरकारी रवैया आश्रितों पर भारी पड़ रहा है।
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मार्च से अप्रैल माह के बीच त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव कराए गए थे। इस दौरान चुनावी ड्यूटी में कुल 36 कर्मचारियों की मौत कोविड से हुई थी। इनमें सर्वाधिक शिक्षा विभाग के कर्मचारी शामिल थे। राजकीय लघु सिंचाई, सहकारिता, उप्र निर्माण निगम, मनरेगा, एनआरएलएम एवं दिव्यांग कल्याण विभाग से जुड़े कर्मचारी भी शामिल थे। चुनावी ड्यूटी करते हुए दो अधिकारियों की भी मौत कोविड से हो गई। शुरू में चुनाव कर्मियों की कोविड से मृत्यु से सरकार इंकार करती रही लेकिन, फजीहत के बाद आखिरकार उनके आश्रितों को 30 लाख का मुआवजा देने पर राजी हो गई हालांकि इसके लिए कई सारी औपचारिकताएं तय कर दी गईं। सिर्फ चुनावी ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों को ही मुआवजा देना तय हुआ। आयोग ने प्रशिक्षण, मतदान और मतगणना में शामिल कर्मचारियों की मृत्यु होने पर ही मुआवजा देने की बात कही। आरटीपीसीआर रिपोर्ट एवं एंटीजन टेस्ट रिपोर्ट के साथ अन्य दूसरी रिपोर्ट भी मांगी गई। सारी रिपोर्ट जुटाने के बाद आश्रितों ने किसी तरह प्रक्रिया की। उनको जल्द मुआवजा देने की बात कही गई लेकिन, चार माह बीत जाने के बाद भी परिजनों तक सहायता नहीं पहुंची। परिवार का मुखिया खोने के बाद अब सरकार की असंवेदनशीलता परिजनों को नागवार गुजर रही है। वहीं, बेसिक शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष रसकेंद्र गौतम ने समय पर मुआवजा न मिलने पर नाराजगी जताते हुए इसे जल्द से जल्द परिजनों को देने की बात कही है।
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केस एक
प्राथमिक विद्यालय नवीन ओरछा गेट विद्यालय में तैनात शिक्षक इंद्रमोहन अहिरवार की मौत चुनावी ड्यूटी के दौरान हो गई थी। परिवार में पत्नी नीलम समेत दो छोटे बच्चे एवं बूढ़े सास-ससुर हैं। परिवार के पास अब कोई भी आय का जरिया नहीं बचा। परिजनों का कहना है कि इंद्रमोहन की मौत के बाद आर्थिक स्थिति भी डांवाडोल हो गई।
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केस दो
गुरसराय ब्लॉक के पंडवाहा गांव में तैनात आनंद प्रकाश पटेल की भी मौत चुनावी ड्यूटी के दौरान कोराना से हो गई थी। परिवार में उनकी पत्नी समेत दो बेटे हैं लेकिन, मुआवजा राशि न मिलने से परिवार की आर्थिक स्थिति खस्ताहाल हो चुकी। परिजनों का कहना है कि पहले 15 अगस्त तक मुआवजा देने की बात कही गई थी लेकिन, यह भी समय पर नहीं दिया गया।
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