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नौ साल बाद भी धरातल पर काम नहीं, दुगना हुआ बजट
amarujala
Updated Fri, 21 Jul 2017 12:21 AM IST
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- फोटो : demo
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झांसी।
भारत सरकार की केन- बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना नौ साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। इस बीच परियोजना का बजट दुगना हो गया है। केंद्रीय जल संसाधन एवं नदी पुनरुद्धार मंत्री उमा भारती दावा कर चुकी हैं कि इस परियोजना की सभी बाधाएं दूर हो चुकी हैं पर हकीकत इससे अलग है। सच तो यह है कि अभी तक यह भी तय नहीं हुआ कि इस परियोजना का काम मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश की सरकार करेगी या फिर अलग से बोर्ड का गठन होगा। जानकारों का मानना है कि अगर इसी गति से काम हुआ तो इस परियोजना को शुरू होने में अभी दो- चार साल और लग जाएंगे।
बुंदेलखंड की सूखी धरती को हरा-भरा करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2008 में केन-बेतवा लिंक परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था। बाद में बुंदेलखंड के सूखा क्षेत्र के विकास के लिए इसे प्रधानमंत्री के पैकेज में शामिल कर लिया गया। केंद्रीय जल आयोग ने केन-बेतवा लिंक नहर परियोजना सहित देश की तीन प्रमुख परियोजनाओं को वरीयता पर रखा है। वरीयता क्रम में केन-बेतवा गठजोड़ पहले नंबर पर है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 2008 में इस परियोजना की लागत 9,393 करोड़ आंकी गई थी, अब यह राशि बढ़कर 18 हजार 57 करोड़ पर पहुंच गई है। नौ साल से यह परियोजना पर्यावरण, पन्ना रिजर्व में फोरेस्ट क्लीयरेंस जैसी बांधाओ से जूझ रही हैं। हर दो- चार महीने केंद्र सरकार से कोई न कोई अफसर केन- बेतवा परियोजना का स्थलीय निरीक्षण करने आता हैं। हर बार कोई न कोई नई बाधा सामने आ जाती हैं। यहीं कारण है कि धरातल पर इस परियोजना का अभी तक कोई वजूद दिखाई नहीं दे सका।
इतना ही नहीं, पिछले साल मार्च में राष्ट्रीय विकास अभिकरण नई दिल्ली से भेजे गए परियोजना के मॉडल का शिलान्यास राजघाट कालोनी स्थित नदी बेतवा परिषद कार्यालय प्रांगण में केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने किया था। उन्होंने मई 2016 तक काम शुरू होने की उम्मीद जताई थी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। जानकारों की माने तो अभी तक यही पता नहीं है कि इस परियोजना को कौन बनाएगा? अगर इसी गति से काम हुआ तो इस परियोजना को परियोजना पूरा होने में कम से कम दस साल लग सकते हैं। अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। इस बाबत अधिशासी अभियंता चंद्र पाल सिंह से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने बात करने से ही इनकार कर दिया।
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यह है योजना
भारत सरकार ने वर्ष 2008 में केन-बेतवा लिंक परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था। बाद में इसे प्रधानमंत्री के पैकेज में शामिल कर लिया गया। लिंक नहर की लंबाई 221 किलोमीटर होगी। केन नदी से आने वाले पानी को रोकने के लिए खजुराहो के निकट दौधन बांध बनेगा। इस पर 78 मेगावाट क्षमता की दो विद्युत उत्पादन इकाइयां स्थापित होंगी। यहां से पानी बरुआसागर झील में मिलने के बाद बेतवा नदी में पहुंचेगा।
परियोजना से लाभ
परियोजना से मध्यप्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ एवं पन्ना जिले की 3,69,881 हेक्टेअर तथा उत्तर प्रदेश के महोबा, बांदा व झांसी जिले की 2,65,780 हेक्टेअर भूमि सिंचित होगी। इसमें झांसी जिले की 6,35,661 हेक्टेअर कृषि भूमि शामिल है। परियोजना के मार्ग में पड़ने वाली 13.42 लाख जनसंख्या को 49 मिलियन क्यूबिक मीटर पेयजल भी उपलब्ध होगा।
टीकमगढ़ नहीं जाएगा इसका पानी
इस परियोजना में मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ को भी शामिल किया गया है। परियोजना से टीकमगढ़ क्षेत्र के तालाबों को पानी से भरा जाना है। लेकिन वहां बन रहे मान सुजारा बांध के कारण अब इस परियोजना का पानी टीकमगढ़ तक नहीं पहुंचेगा।
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भारत सरकार की केन- बेतवा नदी जोड़ो राष्ट्रीय परियोजना नौ साल बाद भी धरातल पर नहीं उतर सकी है। इस बीच परियोजना का बजट दुगना हो गया है। केंद्रीय जल संसाधन एवं नदी पुनरुद्धार मंत्री उमा भारती दावा कर चुकी हैं कि इस परियोजना की सभी बाधाएं दूर हो चुकी हैं पर हकीकत इससे अलग है। सच तो यह है कि अभी तक यह भी तय नहीं हुआ कि इस परियोजना का काम मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश की सरकार करेगी या फिर अलग से बोर्ड का गठन होगा। जानकारों का मानना है कि अगर इसी गति से काम हुआ तो इस परियोजना को शुरू होने में अभी दो- चार साल और लग जाएंगे।
बुंदेलखंड की सूखी धरती को हरा-भरा करने के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2008 में केन-बेतवा लिंक परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था। बाद में बुंदेलखंड के सूखा क्षेत्र के विकास के लिए इसे प्रधानमंत्री के पैकेज में शामिल कर लिया गया। केंद्रीय जल आयोग ने केन-बेतवा लिंक नहर परियोजना सहित देश की तीन प्रमुख परियोजनाओं को वरीयता पर रखा है। वरीयता क्रम में केन-बेतवा गठजोड़ पहले नंबर पर है। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक 2008 में इस परियोजना की लागत 9,393 करोड़ आंकी गई थी, अब यह राशि बढ़कर 18 हजार 57 करोड़ पर पहुंच गई है। नौ साल से यह परियोजना पर्यावरण, पन्ना रिजर्व में फोरेस्ट क्लीयरेंस जैसी बांधाओ से जूझ रही हैं। हर दो- चार महीने केंद्र सरकार से कोई न कोई अफसर केन- बेतवा परियोजना का स्थलीय निरीक्षण करने आता हैं। हर बार कोई न कोई नई बाधा सामने आ जाती हैं। यहीं कारण है कि धरातल पर इस परियोजना का अभी तक कोई वजूद दिखाई नहीं दे सका।
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इतना ही नहीं, पिछले साल मार्च में राष्ट्रीय विकास अभिकरण नई दिल्ली से भेजे गए परियोजना के मॉडल का शिलान्यास राजघाट कालोनी स्थित नदी बेतवा परिषद कार्यालय प्रांगण में केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने किया था। उन्होंने मई 2016 तक काम शुरू होने की उम्मीद जताई थी, लेकिन ऐसा हो नहीं सका। जानकारों की माने तो अभी तक यही पता नहीं है कि इस परियोजना को कौन बनाएगा? अगर इसी गति से काम हुआ तो इस परियोजना को परियोजना पूरा होने में कम से कम दस साल लग सकते हैं। अधिकारी कुछ भी कहने से बच रहे हैं। इस बाबत अधिशासी अभियंता चंद्र पाल सिंह से जानकारी लेनी चाही तो उन्होंने बात करने से ही इनकार कर दिया।
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यह है योजना
भारत सरकार ने वर्ष 2008 में केन-बेतवा लिंक परियोजना को राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया था। बाद में इसे प्रधानमंत्री के पैकेज में शामिल कर लिया गया। लिंक नहर की लंबाई 221 किलोमीटर होगी। केन नदी से आने वाले पानी को रोकने के लिए खजुराहो के निकट दौधन बांध बनेगा। इस पर 78 मेगावाट क्षमता की दो विद्युत उत्पादन इकाइयां स्थापित होंगी। यहां से पानी बरुआसागर झील में मिलने के बाद बेतवा नदी में पहुंचेगा।
परियोजना से लाभ
परियोजना से मध्यप्रदेश के छतरपुर, टीकमगढ़ एवं पन्ना जिले की 3,69,881 हेक्टेअर तथा उत्तर प्रदेश के महोबा, बांदा व झांसी जिले की 2,65,780 हेक्टेअर भूमि सिंचित होगी। इसमें झांसी जिले की 6,35,661 हेक्टेअर कृषि भूमि शामिल है। परियोजना के मार्ग में पड़ने वाली 13.42 लाख जनसंख्या को 49 मिलियन क्यूबिक मीटर पेयजल भी उपलब्ध होगा।
टीकमगढ़ नहीं जाएगा इसका पानी
इस परियोजना में मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ को भी शामिल किया गया है। परियोजना से टीकमगढ़ क्षेत्र के तालाबों को पानी से भरा जाना है। लेकिन वहां बन रहे मान सुजारा बांध के कारण अब इस परियोजना का पानी टीकमगढ़ तक नहीं पहुंचेगा।