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ढाई साल की बच्ची समेत नौ ने पाई मोतियाबिंद से निजात
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झांसी। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत जन्मजात मोतियाबिंद से पीड़ित ढाई साल की बच्ची का मेडिकल कॉलेज में सफल ऑपरेशन किया। इसके अलावा अन्य आठ बच्चों का भी नि:शुल्क ऑपरेशन हुआ। दो को इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है।
जन्म से ही मोतियाबिंद की समस्या से जूझ रहे बच्चों के इलाज के लिए 26, 27 अक्तूबर को आरबीएसके के अंतर्गत जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 25 बच्चे जांच के लिए आए थे। आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर डॉ. रामबाबू ने बताया कि 25 बच्चों में नौ को ऑपरेशन के लिए चिह्नित कर उनका ऑपरेशन किया गया है। वहीं, दो बच्चों को उच्चतर संस्थान में जांच के लिए रेफर किया गया है। ऑपरेशन के बाद संयुक्त निदेशक डॉ. विनोद कुमार यादव ने सभी बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात की। ऑपरेशन के बाद बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी। मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि बच्चों में मोतियाबिंद दो तरीके से होता है। गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार का संक्रमण होने से बच्चे में कई प्रकार के विकार की संभावना बढ़ जाती है, उसमें एक मोतियाबिंद भी है। इसके अलावा सिर या आंख में किसी प्रकार की चोट लगने से भी मोतियाबिंद हो सकता है। ऐसी स्थिति में जितना जल्दी हो सके जांच कराकर इलाज कराएं। वरना बच्चे की आंखों की रोशनी कम या खत्म अथवा तिरछापन आने की संभावना बढ़ जाती है।
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जन्म से ही मोतियाबिंद की समस्या से जूझ रहे बच्चों के इलाज के लिए 26, 27 अक्तूबर को आरबीएसके के अंतर्गत जांच शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में 25 बच्चे जांच के लिए आए थे। आरबीएसके के डीईआईसी मैनेजर डॉ. रामबाबू ने बताया कि 25 बच्चों में नौ को ऑपरेशन के लिए चिह्नित कर उनका ऑपरेशन किया गया है। वहीं, दो बच्चों को उच्चतर संस्थान में जांच के लिए रेफर किया गया है। ऑपरेशन के बाद संयुक्त निदेशक डॉ. विनोद कुमार यादव ने सभी बच्चों और उनके परिजनों से मुलाकात की। ऑपरेशन के बाद बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में जानकारी दी। मेडिकल कॉलेज के नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. जितेंद्र कुमार ने बताया कि बच्चों में मोतियाबिंद दो तरीके से होता है। गर्भावस्था के दौरान किसी भी प्रकार का संक्रमण होने से बच्चे में कई प्रकार के विकार की संभावना बढ़ जाती है, उसमें एक मोतियाबिंद भी है। इसके अलावा सिर या आंख में किसी प्रकार की चोट लगने से भी मोतियाबिंद हो सकता है। ऐसी स्थिति में जितना जल्दी हो सके जांच कराकर इलाज कराएं। वरना बच्चे की आंखों की रोशनी कम या खत्म अथवा तिरछापन आने की संभावना बढ़ जाती है।
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