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Jhansi News: पहूज के प्रदूषण पर एनजीटी सख्त, कहा - नालों को एसटीपी से शत-प्रतिशत जोड़ें

Fri, 05 Dec 2025 02:14 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 05 Dec 2025 02:14 AM IST
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NGT strict on pollution in Pahuj, said- connect drains 100% with STP
मुख्य सचिव को व्यक्तिगत हस्तक्षेप के लिए कहा, अधिकारी एक-दूसरे पर डालते रहे जिम्मेदारी
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अमर उजाला ब्यूरो

झांसी। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) की जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव की अध्यक्षता वाली प्रधान पीठ ने सुनवाई के दौरान झांसी से होकर बहने वाली पहूज नदी में बढ़ते प्रदूषण, सीवेज, ठोस कचरे की डंपिंग और नदी तटों पर हो रहे अतिक्रमण पर सख्त रुख अपनाया है। एनजीटी ने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि बिना उपचारित सीवेज नदी में जाने से तुरंत रोकें। नालों को एसटीपी से 100 फीसदी जोड़ा जाए। नदी की फ्लड प्लेन सीमा चिह्नित कर अवैध निर्माण रोकें। कचरा और पूजन सामग्री नदी में फेंकने पर रोकने के लिए जन जागरुकता अभियान चलाएं। मामले की अगली सुनवाई 24 फरवरी 2026 को होगी।

यह आदेश आवेदक भानू सहाय द्वारा दायर वाद पर सुनवाई के दौरान आया है। सुनवाई में आवेदक ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये खुद उपस्थित होकर नदी की दयनीय स्थिति, सीवर के अनियंत्रित प्रवाह, नालों के सीधे नदी में गिरने और नगर निगम व संबंधित विभागों की लापरवाही का मुद्दा उठाया। आवेदक द्वारा दाखिल ताजा फोटोग्राफ में नदी के भीतर कूड़े, मलबे और निर्माण सामग्री के ढेर स्पष्ट दिख रहे हैं। कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य नदी के प्राकृतिक बहाव में बाधा उत्पन्न करता हुआ पाया गया।
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सुनवाई के दौरान जिला प्रशासन की ओर से कहा गया कि नदी को साफ रखना नगर निगम की जिम्मेदारी है। वहीं, नगर निगम की ओर से यह तर्क दिया गया कि अतिक्रमण रोकना सिंचाई विभाग का काम है। आवेदक ने बताया कि जेडीए नदी किनारे निर्माण की अनुमति दे रहा है, जिससे पहूज का अस्तित्व खतरे में पड़ रहा है। चूंकि, अधिकारी एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डाल रहे थे, इस पर एनजीटी ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव को व्यक्तिगत रूप से इस मुद्दे पर गौर करने और पहूज में सीवेज के निर्वहन रोकने और नदी में मलबा व कचरा फेंकने पर रोक लगाने के लिए त्वरित कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। अपर नगर आयुक्त राहुल यादव का कहना है कि एनजीटी के आदेश का शत-प्रतिशत अनुपालन कराया जाएगा।
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रिपोर्ट में जल गुणवत्ता लगातार खराब होने का उल्लेख
एनजीटी के आदेशानुसार गठित संयुक्त समिति की 2024 और 2025 की रिपोर्ट में यह सामने आया कि झांसी शहर के चार प्रमुख नाले बिना उपचारित सीवेज को सीधे नदी में गिरा रहे हैं। जल गुणवत्ता लगातार और ज्यादा खराब हुई है। जलकुंभी और गाद की भारी मात्रा नदी के प्रवाह को अवरुद्ध कर रही है। यह तथ्य भी सामने आया है कि अभी तक सभी नालों की टैपिंग और एसटीपी से संयोजन का काम पूरा नहीं हो सका है। वहीं, यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने नगर निगम झांसी पर 16.10 करोड़ रुपये का पर्यावरण क्षतिपूर्ति जुर्माना लगाया है। इस संबंध में एनजीटी ने पर्यावरण मंत्रालय से छह सप्ताह में अनुपालन रिपोर्ट मांगी है।
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