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तीन बार नोटिस दे चुका एनजीटी, फिर भी खुले में डंप हो रहा कूड़ा

Thu, 07 Oct 2021 01:45 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Thu, 07 Oct 2021 01:45 AM IST
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NGT has given notice three times, yet the garbage being dumped in the open
झांसी। नगर निगम की ओर से खुले में कूड़ा डंप करने को एनजीटी (राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण) प्रतिबंधित कर चुका। ऐसा करने पर निगम को तीन बार नोटिस दी जा चुकी लेकिन, इसके बावजूद निगम प्रशासन खुले में कूड़ा डंप कर रहा है। कूड़ा निस्तारण के लिए उसके पास कोई प्लांट भी नहीं है। इसके चलते रोजाना करीब 300 मीट्रिक टन कूड़ा शहर के आसपास के इलाकों की खंतियों में डंप हो रहा है।
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महानगर से रोजाना निकलने वाला कूड़ा नगर निगम के लिए बड़ी मुसीबत है। महानगर के साठ वार्डों से रोजाना करीब 300 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। स्वच्छ भारत मिशन के जरिए इसे निस्तारित करने के लिए प्लांट लगाने के निर्देश दिए गए थे। निगम प्रशासन पांच साल बाद भी यह प्लांट तैयार नहीं कर सका। ऐसे में पूरे शहर का कूड़ा राजगढ़, बिजौली, पंचवटी जैसे आवासीय इलाकों में डंप हो रहा है। बिजौली में क्रशर की पुरानी खंतियों में इन दिनों एक तिहाई कूड़ा डंप हो रहा है। पिछले कई साल से कूड़ा डंप होने से यहां का भूजल भी प्रदूषित हो रहा है। स्थानीय लोग इसकी शिकायत नगर निगम अफसरों से कर चुके। इसके बावजूद इन खंतियों में ही कूड़ा डाला जा रहा है। यहां मेडिकल कचरा तक चोरी-छिपे डंप कर दिया जाता है। खुले में कूड़ा डंप होने की शिकायत एनजीटी तक भी पहुंची। इसके बाद एनजीटी ने पिछले वर्ष से अभी तक के बीच तीन बार नोटिस भेजकर इस तरह से कूड़ा डंप करने को मना कर चुका लेकिन, निगम प्रशासन इन खंतियों में ही कूड़ा डंप कर रहा है। वहीं, महापौर रामतीर्थ सिंघल का कहना है कि नए प्लांट को लेकर विचार चल रहा है। जल्द ही इसकी व्यवस्था कराई जाएगी।
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प्लांट न होने की वजह से दौड़ में पिछड़ी थी झांसी
पिछले स्वच्छता सर्वेक्षण के दौरान सालिड वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट न होने की वजह से ही झांसी पिछड़कर 27 वें नंबर पर रही लेकिन, हैरत की बात यह कि इसके बावजूद निगम प्रशासन इस प्लांट का इंतजाम करने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहा है। पिछले सर्वेक्षण के दौरान कूड़ा निस्तारण पर 1500 अंक तय किए गए थे। इस बार भी कूड़ा निस्तारण पर ही सरकार का जोर है। यहां मेडिकल वेस्ट नष्ट करने के भी पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। नगर निगम के आकड़ों के मुताबिक यहां रोजाना करीब 300 एमटी कूड़ा निकलता है। इसमें से सिर्फ प्लास्टिक वेस्ट ही रिसाइकिल होता है।
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ठंडे बस्ते में वेस्ट टू एनर्जी प्रोजेक्ट
कूड़ा से बिजली पैदा करने के लिए प्लांट लगाने का प्रस्ताव वर्ष 2019 में पेश किया गया था लेकिन, पार्षदों के असंतोष की वजह से यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया। इस प्रोजेक्ट के लिए क्लीन ऊर्जा सिस्टम (मुंबई) ने दिलचस्पी दिखाई थी। निगम को रोजाना कंपनी को सूखा कूड़ा देना था। इसकी मदद से शुरूआत में पांच मेगावाट बिजली के उत्पादन की उम्मीद जताई गई लेकिन, विरोध के चलते यह प्रोजेक्ट ठंडे बस्ते में चला गया।
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