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नेताजी का न्योता पाकर लौट रहे मजदूर

Mon, 05 Apr 2021 07:34 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Mon, 05 Apr 2021 07:34 PM IST
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neta ji la niyota pakar lot rhaye magdur
नेताजी का न्योता पाकर लौटेंगे मजदूर
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झांसी। त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में दावेदारी कर रहे प्रत्याशियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती परदेस में रह रहे मजदूरों की खातिरदारी है। पंचायत चुनाव में कोई मतदाता मतदान करने से वंचित न रह जाए, इसके लिए एक-एक मतदाता को नेताजी की ओर से न्योता भेजा जा रहा है। न्योता देने में यह भी देखा जा रहा है कि मजदूर किसके पक्ष में मतदान करेगा। इसलिए पूरी तरह ठोक - बजाने के बाद ही न्योता दिया जा रहा है। क्योंकि, एक न्योता कम से कम आठ से दस हजार रुपये तक पड़ रहा है।
गांवों में रोजगार नहीं होने के कारण अधिकांश लोग पलायन करके दिल्ली, सूरत, अहमदाबाद, मुंबई, इंदौर समेत अन्य बड़े महानगरों में मजदूरी कर रहे हैं। पंचायत चुनाव में एक - एक वोट का महत्व होता है। कई गांवों में हार- जीत के आंकड़े बहुत कम होते हैं। कई सीटों पर तो एक या दो वोट से हार-जीत होे जाती है। इसलिए गांवों में कोई भी प्रत्याशी बाहर रहने वाले मजदूरों को नजर अंदाज नहीं कर पाता है। चुनाव मैदान में उतरने के बाद प्रत्याशियों ने गांव में कुल वोटरों में से बाहर मजदूरी करने वाले मतदाताओं की सूची तैयार की और इसके बाद उसमें से यह तय किया कि कौन अपना समर्थक है और कौन विरोधी, जो विरोधी हैं उनको अलग करके समर्थकों को फोन से सूचना दी गई कि चुनाव में गांव आना है, खर्च की चिंता मत करना। मोबाइल से पूछा गया कि प्रतिदिन की दिहाड़ी कितनी बनती है। आने- जाने का किराया और कितने दिन गांव में रुकना पड़ेगा, इसका पूरा ब्योरा तैयार कर हिसाब बनाया गया तो किसी को आठ हजार रुपये और किसी को दस हजार रुपये खर्च बन रहा है।
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यदि किसी गांव के दस परिवार बाहर रह रहे हैं तो उसमें से एक प्रत्याशी के समर्थक कम से कम पांच से छह परिवारों को माना जा रहा है। इसी हिसाब से पैसों का इंतजाम करके संबंधित व्यक्ति को संदेशा भेजा जा रहा है कि आप उस दिन आ जाना, पूरा इंतजाम है। किसी तरह की चिंता मत करना। खर्च स्वीकृत होते ही मजदूरों की रवानगी हो रही है। कुछ लोग तो पंचायत चुनाव देखने के लिए शहर से वापस गांव आ रहे हैं।
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