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रेलवे स्टेशन पर बढ़ी लापरवाही, रोकटोक खत्म
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रेलवे स्टेशन से बिना कोरोना की जांच कराए निकलते यात्री। अमर उजाला
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झांसी। कोरोना काल में रेलवे स्टेशन पर लापरवाही बढ़ गई है। प्रवेश द्वार पर रोकटोक न होने से यात्री इसी दरवाजे से बाहर भी निकलने लगे हैं। निकास द्वार पर स्वास्थ्य टीम जांच के लिए लगी है, लेकिन सौ में दस यात्री भी जांच नहीं करवा रहे हैं। सुरक्षा का इंतजाम न होने से स्वास्थ्य कर्मी भी यात्रियों को रोक नहीं पाते हैं। मुख्य द्वार पर लगा लगेज स्कैनर भी लंबे समय से खराब चल रहा है।
कोरोना संक्रमण के दौरान ट्रेनों का संचालन शुरू होने पर जीआरपी पुल से यात्रियों का आना- जाना बंद कर दिया गया था। यात्री मुख्य पोर्टिको में सामान की स्क्रीनिंग कराने व मेटल डिटेक्टर से गुजरने के बाद प्लेटफार्म पर जा रहे थे। अगर उनको दूसरे प्लेटफार्मों पर जाना है तो वे एस्केलेटर पुल का उपयोग कर रहे थे। मुख्य पोर्टिको के बीच रस्सी बांधकर डिवाइडर बनाया गया। ताकि आने वाले यात्री साफ दिखाई दे सकें। पुराने आरक्षण कार्यालय के पास निकास द्वार बनाया गया। ताकि आने और जाने वाले यात्रियों का आमना सामना नहीं हो सके। प्लेटफार्म पर अनाधिकृत व्यक्ति न जाएं, इसके लिए अलग- अलग टीमें निगरानी के लिए बनाईं गईं थी। बेंच पर बैठने के दौरान सामाजिक दूरी बनी रहे, इसके लिए निशान लगाए गए।
मगर यह सभी व्यवस्थाएं दिन प्रतिदिन धराशायी होती जा रहीं हैं। मुख्य द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग बंद हो गई है। पोर्टिकों में बैठने वाले चेकिंग कर्मचारी यात्रियों के टिकट भी नहीं जांच रहे हैं। आरपीएफ कर्मी भी एक कोने में बैठकर समय बिताते रहते हैं। इस कारण प्रवेश द्वार से भी यात्रियों ने निकलना भी शुरू कर दिया है।
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कोरोना संक्रमण के दौरान ट्रेनों का संचालन शुरू होने पर जीआरपी पुल से यात्रियों का आना- जाना बंद कर दिया गया था। यात्री मुख्य पोर्टिको में सामान की स्क्रीनिंग कराने व मेटल डिटेक्टर से गुजरने के बाद प्लेटफार्म पर जा रहे थे। अगर उनको दूसरे प्लेटफार्मों पर जाना है तो वे एस्केलेटर पुल का उपयोग कर रहे थे। मुख्य पोर्टिको के बीच रस्सी बांधकर डिवाइडर बनाया गया। ताकि आने वाले यात्री साफ दिखाई दे सकें। पुराने आरक्षण कार्यालय के पास निकास द्वार बनाया गया। ताकि आने और जाने वाले यात्रियों का आमना सामना नहीं हो सके। प्लेटफार्म पर अनाधिकृत व्यक्ति न जाएं, इसके लिए अलग- अलग टीमें निगरानी के लिए बनाईं गईं थी। बेंच पर बैठने के दौरान सामाजिक दूरी बनी रहे, इसके लिए निशान लगाए गए।
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मगर यह सभी व्यवस्थाएं दिन प्रतिदिन धराशायी होती जा रहीं हैं। मुख्य द्वार पर थर्मल स्क्रीनिंग बंद हो गई है। पोर्टिकों में बैठने वाले चेकिंग कर्मचारी यात्रियों के टिकट भी नहीं जांच रहे हैं। आरपीएफ कर्मी भी एक कोने में बैठकर समय बिताते रहते हैं। इस कारण प्रवेश द्वार से भी यात्रियों ने निकलना भी शुरू कर दिया है।
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