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Jhansi News: खरीफ सीजन से छह हजार हेक्टेयर में होगी प्राकृतिक खेती
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हर ब्लॉक में बनाए जाएंगे दस-दस नए कलस्टर
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। इस बार खरीफ सीजन में करीब छह हजार हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती होगी। इसके लिए सभी आठ ब्लॉकों में नए दस क्लस्टर बनाए जाएंगे। प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को अनुदान पर बीज समेत अन्य सहूलियतें मुहैया कराई जाएंगीं।
सरकार ने बुंदेलखंड में दो साल पहले प्राकृतिक खेती की शुरुआत की थी। दो साल से दो-दो हजार हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती की जा रही है। इस साल प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाना है। उपनिदेशक कृषि महेंद्र पाल सिंह का कहना है कि प्राकृतिक खेती के उत्साह जनक परिणाम सामने आए हैं। इसको देखते हुए खरीफ सीजन में प्राकृतिक खेती के रकबे को बढ़ाकर छह हजार हेक्टेयर किया जाएगा। बता दें कि प्राकृतिक खेती में रासायनिक खाद का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता। इसके स्थान पर गोमूत्र एवं गोबर का प्रयोग किया जाता है। उपनिदेशक का कहना है कि प्रत्येक ब्लॉक में दस-दस कलस्टर बनाए जाएंगे। नए किसानों का चयन खरीफ सीजन आरंभ होने से पहले कर लिया जाएगा।
इनसेट
पांच हजार रुपये क्विंंटल बिक रहा गेहूं
प्राकृतिक खेती से रबी सीजन में गेहूं का भी उत्पादन हुआ है। मऊरानीपुर, चिरगांव, मोंठ, पूंछ आदि इलाकों में जिन किसानों ने प्राकृतिक खेती मॉडल से गेहूं का उत्पादन किया, उनके गेहूं की मांग काफी अधिक है। उपनिदेशक महेंद्र पाल के मुताबिक यह गेहूं करीब पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। इससे किसानों को फायदा मिल रहा है। अभी सरकार की ओर से गेहूं की एमएसपी 2275 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है।
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। इस बार खरीफ सीजन में करीब छह हजार हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती होगी। इसके लिए सभी आठ ब्लॉकों में नए दस क्लस्टर बनाए जाएंगे। प्राकृतिक खेती के लिए किसानों को अनुदान पर बीज समेत अन्य सहूलियतें मुहैया कराई जाएंगीं।
सरकार ने बुंदेलखंड में दो साल पहले प्राकृतिक खेती की शुरुआत की थी। दो साल से दो-दो हजार हेक्टेयर में प्राकृतिक खेती की जा रही है। इस साल प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाया जाना है। उपनिदेशक कृषि महेंद्र पाल सिंह का कहना है कि प्राकृतिक खेती के उत्साह जनक परिणाम सामने आए हैं। इसको देखते हुए खरीफ सीजन में प्राकृतिक खेती के रकबे को बढ़ाकर छह हजार हेक्टेयर किया जाएगा। बता दें कि प्राकृतिक खेती में रासायनिक खाद का बिल्कुल इस्तेमाल नहीं होता। इसके स्थान पर गोमूत्र एवं गोबर का प्रयोग किया जाता है। उपनिदेशक का कहना है कि प्रत्येक ब्लॉक में दस-दस कलस्टर बनाए जाएंगे। नए किसानों का चयन खरीफ सीजन आरंभ होने से पहले कर लिया जाएगा।
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पांच हजार रुपये क्विंंटल बिक रहा गेहूं
प्राकृतिक खेती से रबी सीजन में गेहूं का भी उत्पादन हुआ है। मऊरानीपुर, चिरगांव, मोंठ, पूंछ आदि इलाकों में जिन किसानों ने प्राकृतिक खेती मॉडल से गेहूं का उत्पादन किया, उनके गेहूं की मांग काफी अधिक है। उपनिदेशक महेंद्र पाल के मुताबिक यह गेहूं करीब पांच हजार रुपये प्रति क्विंटल तक बिक रहा है। इससे किसानों को फायदा मिल रहा है। अभी सरकार की ओर से गेहूं की एमएसपी 2275 रुपये प्रति क्विंटल तय की गई है।
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