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पुड़िया और टिकट बोलते ही हाथ में रख देते गांजा और स्मैक
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गांजे की पुड़िया
- फोटो : REPORTERS
झांसी। कोडवर्ड में चल रहा है नशे का कारोबार। बृहस्पतिवार की दोपहर 12-30 बजे बस स्टैंड के पास एक पुराना सा थैला लेकर ऑटो में बैठे युवक से जब हमारी मुलाकात हुई तो उसने पुड़िया बोलते ही थैले में हाथ डाला और गांजा निकालकर हमें दे दिया और 60 रुपये मांगे। उसके आस-पास खड़े लोग उसे पप्पू कहकर पुकार रहे थे। यहां रुककर दोपहर डेढ़ बजे तक उसने 10 लोगों को पुड़िया दी।
उसके पास आने वाले लोगों में ज्यादातर ऐसे थे जो उसे पहले से जान रहे थे। क्योंकि उसने कइयों से उधार की पुड़िया का पुराना पैसा भी लिया था। इनमें से अधिकांश नशे के आदी लग रहे थे। इसके बाद हमारी टीम सौ मीटर आगे कानपुर रोड पर पहुंची। यहां सड़क किनारे दो लोग बैठे थे। यह खुद तो नशा कर ही रहे थे और नशे की पुड़िया बेच भी रहे थे। जब हमने उन्हें विश्वास में लेकर पूछा तो उनका कहना था कि वह 10 पुड़िया लेकर आते हैं। इन्हें बेचने से उनके नशे का खर्च भी निकल आता है। लेकिन जब उससे पूछा गया कि वह पुड़िया किससे लेकर आता है तो नाम नहीं बताया। बोला, नाम से क्या करना है। आप तो काम बताओ।
इसके बाद हम कोतवाली क्षेत्र में एक चौराहे पर सड़क किनारे खोखे के पास खड़े युवक के पास पहुंचे। उसके साथ उस समय दो लोग और भी थे। पता चला कि उसके पास टुकड़ा (गांजे से भरी सिगरेट) था। एक सिगरेट पचास रुपये की दी जा रही थी। हमें देखकर कहा कि यहां भीड़ मत लगाइए, आगे बढ़िए, टुकड़ा चाहो तो बताओ। ग्वालियर रोड पर रेलवे क्रासिंग से आगे भी नशे का कारोबार चल रहा है। यहां रात को 08-30 बजे एक खोखे के किनारे तीन लोग खड़े थे जो गांजा बेच रहे थे। कई युवक इनके पास पहुंचे और पैसा लेने के बाद इनके हाथ में गांजा रख दिया। हमें देखकर इनमें से एक ने कहा कि कौन हो भाई। क्या पुलिस वाले हो। इस पर इनके साथ का एक युवक बोला कि इस इलाके के सभी पुलिस वाले हमें जानते हैं।
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कोडवर्ड से चल रहा नशे का कारोबार..
- छोटी पुड़िया- गांजा
- टिकट- स्मैक
- टुकड़ा- गांजा भरी सिगरेट
आप तो बताइए, शराब कहां की औैर कितनी चाहिए
झांसी। नशे के काले कारोबार से जुड़े लोग शराब भी आन डिमांड उपलब्ध करा रहे हैं। हमारी मुलाकात एक ऐसे ही युवक से हुई जिसका कहना था कि वह शराब भी मुहैया करा सकते हैं। जिस राज्य की चाहिए वहां की। कच्ची दारू भी बड़ी मात्रा में तैयार करा दी जाएगी। बस दो दिन पहले बताना होगा। जब हमने कहा कि एक पार्टी है उसके लिए शराब चाहिए तो उसका कहना था कि इतनी सस्ती शराब लाकर दे देंगे कि आप सोच भी नहीं पाओगे। जब हमने कहा कि पुलिस का डर नहीं है तुम्हें। उसका कहना था कि हमारी सब जगह दोस्ती है। बनाकर रखना पड़ता है। उन लोगों की भी सेवा करते रहते हैं हम लोग। कई पुलिस वालों से तो अब दोस्ती भी हो गई है।
17 माफियाओं के हाथ में है काला कारोबार
सूखे नशे का काला कारोबार 17 माफियाओं द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस काम में इनके दर्जनों सहयोगी है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न जनपदों से चरस, गांजा और स्मैक लाने से लेकर उन्हें बिक्री के अड्डों तक पहुंचाने में इनकी बड़ी भूमिका है। दिन के उजाले में नशे का ये सामान यहां से वहां किया जाता है। क्योंकि, दिन मेें चेकिंग का ज्यादा खतरा नहीं होता है। इसके अलावा बस से भी लाने ले जाने का काम किया जा रहा है।
मेडिकल में एक हजार का चल रहा है इलाज
सूखे नशे की गिरफ्त में आने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में स्मैक और गांजे के लती हर माह चालीस से अधिक मरीज पहुंचते हैं। इनमें तीस से पचास वर्ष तक की आयु के मरीजों की संख्या सर्वाधिक होती है। इसके अलावा यहां एक हजार लोगों का लगातार इलाज में चल रहा है। ये वो लोग हैं, जो बुरी तरह से नशे की गिरफ्त में हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि अस्पताल वे ही लोग पहुंचते हैं, जो बुरी तरह से इसमें जकड़ गए हैं। शुरुआत में तो परिजनों को भी नशे की जानकारी नहीं लग पाती है। जबकि, शुरुआत में इस बुरी आदत को छुड़ाना आसान होता है। मरीजों की संख्या पिछले तीन-चार सालों के दरम्यान तेजी से बढ़ी है।
नशे के कारोबारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस टीमें लगाई गईं हैं। जानकारी होने पर तत्काल दबोच लिया जाता है। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
- डॉ. ओपी सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
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उसके पास आने वाले लोगों में ज्यादातर ऐसे थे जो उसे पहले से जान रहे थे। क्योंकि उसने कइयों से उधार की पुड़िया का पुराना पैसा भी लिया था। इनमें से अधिकांश नशे के आदी लग रहे थे। इसके बाद हमारी टीम सौ मीटर आगे कानपुर रोड पर पहुंची। यहां सड़क किनारे दो लोग बैठे थे। यह खुद तो नशा कर ही रहे थे और नशे की पुड़िया बेच भी रहे थे। जब हमने उन्हें विश्वास में लेकर पूछा तो उनका कहना था कि वह 10 पुड़िया लेकर आते हैं। इन्हें बेचने से उनके नशे का खर्च भी निकल आता है। लेकिन जब उससे पूछा गया कि वह पुड़िया किससे लेकर आता है तो नाम नहीं बताया। बोला, नाम से क्या करना है। आप तो काम बताओ।
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इसके बाद हम कोतवाली क्षेत्र में एक चौराहे पर सड़क किनारे खोखे के पास खड़े युवक के पास पहुंचे। उसके साथ उस समय दो लोग और भी थे। पता चला कि उसके पास टुकड़ा (गांजे से भरी सिगरेट) था। एक सिगरेट पचास रुपये की दी जा रही थी। हमें देखकर कहा कि यहां भीड़ मत लगाइए, आगे बढ़िए, टुकड़ा चाहो तो बताओ। ग्वालियर रोड पर रेलवे क्रासिंग से आगे भी नशे का कारोबार चल रहा है। यहां रात को 08-30 बजे एक खोखे के किनारे तीन लोग खड़े थे जो गांजा बेच रहे थे। कई युवक इनके पास पहुंचे और पैसा लेने के बाद इनके हाथ में गांजा रख दिया। हमें देखकर इनमें से एक ने कहा कि कौन हो भाई। क्या पुलिस वाले हो। इस पर इनके साथ का एक युवक बोला कि इस इलाके के सभी पुलिस वाले हमें जानते हैं।
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कोडवर्ड से चल रहा नशे का कारोबार..
- छोटी पुड़िया- गांजा
- टिकट- स्मैक
- टुकड़ा- गांजा भरी सिगरेट
आप तो बताइए, शराब कहां की औैर कितनी चाहिए
झांसी। नशे के काले कारोबार से जुड़े लोग शराब भी आन डिमांड उपलब्ध करा रहे हैं। हमारी मुलाकात एक ऐसे ही युवक से हुई जिसका कहना था कि वह शराब भी मुहैया करा सकते हैं। जिस राज्य की चाहिए वहां की। कच्ची दारू भी बड़ी मात्रा में तैयार करा दी जाएगी। बस दो दिन पहले बताना होगा। जब हमने कहा कि एक पार्टी है उसके लिए शराब चाहिए तो उसका कहना था कि इतनी सस्ती शराब लाकर दे देंगे कि आप सोच भी नहीं पाओगे। जब हमने कहा कि पुलिस का डर नहीं है तुम्हें। उसका कहना था कि हमारी सब जगह दोस्ती है। बनाकर रखना पड़ता है। उन लोगों की भी सेवा करते रहते हैं हम लोग। कई पुलिस वालों से तो अब दोस्ती भी हो गई है।
17 माफियाओं के हाथ में है काला कारोबार
सूखे नशे का काला कारोबार 17 माफियाओं द्वारा संचालित किया जा रहा है। इस काम में इनके दर्जनों सहयोगी है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के विभिन्न जनपदों से चरस, गांजा और स्मैक लाने से लेकर उन्हें बिक्री के अड्डों तक पहुंचाने में इनकी बड़ी भूमिका है। दिन के उजाले में नशे का ये सामान यहां से वहां किया जाता है। क्योंकि, दिन मेें चेकिंग का ज्यादा खतरा नहीं होता है। इसके अलावा बस से भी लाने ले जाने का काम किया जा रहा है।
मेडिकल में एक हजार का चल रहा है इलाज
सूखे नशे की गिरफ्त में आने वालों की संख्या में तेजी से इजाफा हो रहा है। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग में स्मैक और गांजे के लती हर माह चालीस से अधिक मरीज पहुंचते हैं। इनमें तीस से पचास वर्ष तक की आयु के मरीजों की संख्या सर्वाधिक होती है। इसके अलावा यहां एक हजार लोगों का लगातार इलाज में चल रहा है। ये वो लोग हैं, जो बुरी तरह से नशे की गिरफ्त में हैं। विभागाध्यक्ष डॉ. ज्ञानेंद्र कुमार ने बताया कि अस्पताल वे ही लोग पहुंचते हैं, जो बुरी तरह से इसमें जकड़ गए हैं। शुरुआत में तो परिजनों को भी नशे की जानकारी नहीं लग पाती है। जबकि, शुरुआत में इस बुरी आदत को छुड़ाना आसान होता है। मरीजों की संख्या पिछले तीन-चार सालों के दरम्यान तेजी से बढ़ी है।
नशे के कारोबारियों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। पुलिस टीमें लगाई गईं हैं। जानकारी होने पर तत्काल दबोच लिया जाता है। आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी।
- डॉ. ओपी सिंह, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक