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चला गया झांसी का लाल..... दुनिया याद करेगी इनका कमाल

Sun, 11 Sep 2022 01:06 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Sun, 11 Sep 2022 01:06 AM IST
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Nahi rahey BV lal
झांसी। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक डॉ. बीबी लाल का कमाल दुनिया याद करेगी। अयोध्या में श्रीराम मंदिर के साक्ष्य खोजने वाले इस झांसी के लाल ने हमेशा संस्कृति को जोड़ने का काम किया। भले ही वह इंटर के बाद परिवार के साथ झांसी से चले गए थे लेकिन उनका जुड़ाव हमेशा बना रहा।
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मूल रूप से जिला झांसी के ग्राम बैदौरा के रहने वाले प्रख्यात पुरातत्वविद् एवं भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के पूर्व महानिदेशक डॉ. बीबी लाल के निधन की खबर जब झांसी पहुंची तो हर कोई बेचैन हो गया। उन्हें और उनके परिवार को करीब से जानने वाले लोग बताते हैं कि वह हमेशा नई नई खोज से जुड़े रहते थे। उनके पिता अंग्रेजी शासन काल में झांसी जिले में तहसील में कानूनगो के पद पर थे। इस दौरान वह जनपद की कई तहसीलों में तैनात रहे। कुछ दिन बाद यह परिवार गांव छोड़कर पुराना शहर स्थित जुगयाना मुहल्ले में रहने लगा था। इंटरमीडिएट तक पढ़ाई करने के बाद उच्च शिक्षा के लिए वह प्रयागराज चले गए थे। वर्ष 1944 में सर मोर्टिमर व्हील द्वारा तक्षशिला मेें प्रशिक्षण प्राप्त कर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण में शामिल हुए थे।
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देश ने खो दिया नायाब हीरा
क्षेत्रीय पुरातत्व अधिकारी डॉ. एसके दुबे ने बताया कि बुंदेलखंड की माटी में जन्में डॉ. बीबी लाल ने देश और दुनिया में झांसी का नाम रोशन किया है। वह बुंदेलखंड क्षेत्र के ऐसी शख्सियत थे जिन्हें पद्म विभूषित से नवाजा गया है।
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पढ़ाई में रहते थे अव्वल, पत्थर पर अंकित था नाम
अंग्रेजी शासन काल में एक नियम बनाया गया था कि कक्षा के टॉप थ्री विद्यार्थियों का नाम विद्यालय के नोटिस बोर्ड पर साल भर तक अंकित रहेगा। जिसके चलते शुरूआती कक्षा से लेकर इंटर तक उनका नाम कॉलेज के नोटिस बोर्ड पर अंकित रहा। हालांकि आजादी के इस प्रथा को समाप्त कर दिया गया था।
बीबी लाल परिचय
- 02 मई 1921 को बीबी लाल का जन्म यूपी के झांसी में हुआ
- इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की
- 1943 में लक्षशिला चले गए, जहां जाने-माने ब्रिटिश आर्कियोलॉजिस्ट मोर्टीमर व्हीलर से ट्रेनिंग ली
- 50 से ज्यादा किताबें लिखीं। इसके अलावा उनके 150 से ज्यादा शोध पत्र प्रकाशित हुए
-1968 से 1972 तक भारतीय पुरात्तव सर्वेक्षण विभाग के डायरेक्टर रहे
-1950 से 1952 के बीच महाभारत से जुड़ी विभिन्न साइट्स पर काम किया है
-1975 में ‘आर्कियोलॉजी ऑफ द रामायण साइट्स’ प्रोजेक्ट की शुरुआत की
-वर्ष 2000 में पद्म भूषण सम्मान
-2021 में पद्म विभूषण से नवाजे गए
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हड़प्पा जैसे स्थलों की खुदाई में रहे शामिल
प्रो. लाल ने हस्तिनापुर (उत्तर प्रदेश), शिशुपालगढ़ (ओडिशा), पुराना किला (दिल्ली), कालिबंगन (राजस्थान) सहित कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थलों की खुदाई की। वह हड़प्पा जैसे स्थलों पर होने वाले उत्खनन का हिस्सा रहे।

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खास किताबें जो चर्चा में रहीं
बीबी लाल की कुछ खास किताबों में 2002 में प्रकाशित ‘द सरस्वती फ्लोज ऑन द कांटीन्यूटी ऑफ इंडियन कल्चर ’ और ‘रामा, हिज हिस्ट्रीसिटी, मंदिर एंड सेतु एविडेंस ऑफ लिट्रेचर, आर्कियोलॉजी एंड अदर साइंसेस ’ 2008 में प्रकाशित हुई थी।
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