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गोलमाल: नगर निगम के किराएदारों ने भी किराए पर उठा दीं दुकानें, जांच में सामने आए 252 मामले
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झांसी। महानगर में नगर निगम द्वारा लोगों के रोजगार करने के लिए बनाई गईं1279 दुकानों में से कई में बड़ा खेल चल रहा है। इनमें से कई दुकानें ऐसी हैं जो नाम किसी के और चला रहा र्कोई और। पिछले दिनों इन दुकानों का सर्वे कराया, तो बड़ा खुलासा हुआ। सामने आया कि 225 लोगों ने दुकानों को दूसरों को किराए पर दे दिया है। इनकी जानकारी नगर निगम को अच्छी तरह से हैं, लेकिन अब तक मूल दुकानदारों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई और न ही सिकमी किराएदार के खिलाफ निगम कुछ कर सका। इस बार सदन की बैठक में यह मामला फिर से गूंजेगा।
बिना अनुमति करा लिए निर्माण
नगर निगम के सर्वे में करीब 149 दुकानें ऐसी चिह्नित की गईं हैं, जिनमें दुकानदारों ने नगर निगम की अनुमति के बिना निर्माण करा लिया है। आलम यह है कि नगर निगम के पास ही दुकान में बेसमेंट का निर्माण करा दिया गया। वहीं तमाम दुकानों में फर्श, छत, गैलरी के निर्माण हुए। इसे लेकर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
60 लाख रुपये बकाया
नगर निगम ने दुकानदारों पर किराए को लेकर कभी सख्ती ही नहीं की। मार्च 2020 तक दुकानदारों पर नगर निगम का 60 लाख रुपये बकाया है। तमाम दुकानदार ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक न तो प्रीमियम जमा किया और न ही किराया दे रहे हैं। निगम ने इन दुकानों को खाली कराने और अन्य कोई कार्रवाई की जहमत तक नहीं उठाई।
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ये है नियम
शासन के नियमों के मुताबिक यदि कोई दुकानदार किसी अन्य व्यक्ति को सरकारी दुकान किराए पर देता है तो मूल दुकानदार की दुकान निरस्त कर दी जाएगी। जिस व्यक्ति के नाम दुकान नीलाम हुई, वही व्यक्ति दुकान का संचालन कर सकता है। यदि वह दुकानदार उक्त दुकान में कोई व्यवसाय नहीं करना चाहता है तो वह दुकान किसी अन्य व्यक्ति को स्थानांतरित हो जाएगी। इसके लिए दूसरे व्यक्ति को भी दुकान की प्रीमियम राशि जमा करनी होगी। इतना ही नहीं, कई बार प्रीमियम राशि का निर्धारण बोर्ड बैठक में होता है। उसके अलावा दुकान के किराए में भी 25 प्रतिशत से 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की जाती है।
नगर निगम ने दुकानों का सर्वे कराया है। जिसमें 252 सिकमी दुकानदार और 149 दुकानों में निर्माण कराने के मामले सामने आए हैं। इस मामले को सदन के सामने रखा जाएगा। पार्षदों की सहमति के अनुरूप कार्रवाई कराई जाएगी। रामतीर्थ सिंघल, महापौर
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बिना अनुमति करा लिए निर्माण
नगर निगम के सर्वे में करीब 149 दुकानें ऐसी चिह्नित की गईं हैं, जिनमें दुकानदारों ने नगर निगम की अनुमति के बिना निर्माण करा लिया है। आलम यह है कि नगर निगम के पास ही दुकान में बेसमेंट का निर्माण करा दिया गया। वहीं तमाम दुकानों में फर्श, छत, गैलरी के निर्माण हुए। इसे लेकर भी कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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60 लाख रुपये बकाया
नगर निगम ने दुकानदारों पर किराए को लेकर कभी सख्ती ही नहीं की। मार्च 2020 तक दुकानदारों पर नगर निगम का 60 लाख रुपये बकाया है। तमाम दुकानदार ऐसे हैं, जिन्होंने अब तक न तो प्रीमियम जमा किया और न ही किराया दे रहे हैं। निगम ने इन दुकानों को खाली कराने और अन्य कोई कार्रवाई की जहमत तक नहीं उठाई।
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ये है नियम
शासन के नियमों के मुताबिक यदि कोई दुकानदार किसी अन्य व्यक्ति को सरकारी दुकान किराए पर देता है तो मूल दुकानदार की दुकान निरस्त कर दी जाएगी। जिस व्यक्ति के नाम दुकान नीलाम हुई, वही व्यक्ति दुकान का संचालन कर सकता है। यदि वह दुकानदार उक्त दुकान में कोई व्यवसाय नहीं करना चाहता है तो वह दुकान किसी अन्य व्यक्ति को स्थानांतरित हो जाएगी। इसके लिए दूसरे व्यक्ति को भी दुकान की प्रीमियम राशि जमा करनी होगी। इतना ही नहीं, कई बार प्रीमियम राशि का निर्धारण बोर्ड बैठक में होता है। उसके अलावा दुकान के किराए में भी 25 प्रतिशत से 50 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की जाती है।
नगर निगम ने दुकानों का सर्वे कराया है। जिसमें 252 सिकमी दुकानदार और 149 दुकानों में निर्माण कराने के मामले सामने आए हैं। इस मामले को सदन के सामने रखा जाएगा। पार्षदों की सहमति के अनुरूप कार्रवाई कराई जाएगी। रामतीर्थ सिंघल, महापौर