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आसान प्रश्न पत्र देख बीएड परीक्षार्थियों के चेहरे चमके
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 23 Apr 2016 12:53 AM IST
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B.Ed.peper, jhansi news
- फोटो : amar ujala
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झांसी। शहर के 12 केंद्र पर हुई बीएड की संयुक्त प्रवेश परीक्षा में 6195 अभ्यर्थी शामिल हुए, जबकि 920 ने परीक्षा छोड़ दी। दो पाली में हुई परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई। परीक्षा में बुंदेलखंड समेत आसपास के जिलों के अभ्यर्थी शामिल हुए।
सूबे के बीएड कॉलेजों में प्रवेश के लिए शुक्रवार को सुबह आठ से 11 और दोपहर एक से चार पाली में परीक्षा आयोजित हुई। परीक्षा के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में 10 और लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में दो केंद्र बनाए गए थे। सभी केंद्रों पर 7115 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण करवाया था। परीक्षा में अभ्यर्थियों की उपस्थिति बेहतर रही। परीक्षा का प्रश्नपत्र सामान्य आने से अभ्यर्थियों के चेहरे खिले रहे। परीक्षा के दौरान 250 अभ्यर्थियों पर एक ऑब्जर्वर तैनात रहा।
लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा प्रो. एएम सक्सेना को झांसी का ऑब्जर्वर बनाकर भेजा गया था। नोडल ऑफिसर कुलसचिव व्यास नारायण सिंह रहे, जबकि नोडल को-ऑर्डिनेटर प्रो. सुनील काबिया व डिप्टी नोडल को-ऑर्डिनेटर डॉ. प्रतीक अग्रवाल रहे। जिला प्रशासन द्वारा दो केंद्र पर एक केंद्र प्रतिनिधि नियुक्त किया गया था।
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देर से आया, वापस भेजा
सुबह आठ से 11 की प्रथम पाली में परीक्षा देने के बाद एक छात्र कहीं चला गया था। दूसरी पाली की परीक्षा में शामिल होने में उसे आधे घंटे से ज्यादा देरी हो गई। दोपहर दो बजे आने पर उसे परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। मालूम हो कि परीक्षा में आधे घंटे के बाद आने पर बैठने की अनुमति नहीं दी जाती है।
पढ़ाई में जुटे रहे अभ्यर्थी
बीएड की परीक्षा के दौरान पहली पाली के बाद अभ्यर्थियों को दो घंटे का विराम मिला तो वह किताबें खोल कर पढ़ाई में जुट गए। दोनों पालियों की परीक्षा में इस बार एक भी नकलची नहीं दबोचा गया।
परीक्षा खत्म होते ही लगा जाम
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शाम चार बजे जैसे ही परीक्षा खत्म हुई तो सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी मेन गेट से बाहर निकले। सड़क पर अभ्यर्थियों की भीड़ होने से गाड़ियों का आवागमन बाधित हो गया और कुछ देर के लिए मार्ग जाम हो गया। बाद में जैसे ही भीड़ छटी तो जाम खुल गया।
हिंदी के प्रश्नों में उलझे अभ्यर्थी
- बीएड परीक्षा देने के बाद समथर निवासी नेहा नामदेव ने कहा कि हिंदी से जुड़े प्रश्न थोड़े कठिन थे। अन्य सवाल आसानी से हल हो गए।
- पहली बार बीएड परीक्षा में शामिल हुईं बड़ागांव गेट बाहर निवासी नेहा शाक्या ने भी कहा कि अन्य प्रश्नों के मुकाबले हिंदी के प्रश्न कठिन थे।
- जालौन निवासी प्रत्युष द्विवेदी ने कहा कि अंग्रेजी के प्रश्नों को हल करने में परेशानी हुई। बताया कि हिंदी के प्रश्न भी थोड़े कठिन थे।
- मोनीबाबा के रहने वाले नौशाद खान ने बताया कि बीएड के पेपर में रीजनिंग कठिन रही। इसके अलावा हिंदी के पर्यायवाची भी टफ आए।
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सूबे के बीएड कॉलेजों में प्रवेश के लिए शुक्रवार को सुबह आठ से 11 और दोपहर एक से चार पाली में परीक्षा आयोजित हुई। परीक्षा के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में 10 और लक्ष्मी व्यायाम मंदिर में दो केंद्र बनाए गए थे। सभी केंद्रों पर 7115 अभ्यर्थियों ने पंजीकरण करवाया था। परीक्षा में अभ्यर्थियों की उपस्थिति बेहतर रही। परीक्षा का प्रश्नपत्र सामान्य आने से अभ्यर्थियों के चेहरे खिले रहे। परीक्षा के दौरान 250 अभ्यर्थियों पर एक ऑब्जर्वर तैनात रहा।
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लखनऊ विश्वविद्यालय द्वारा प्रो. एएम सक्सेना को झांसी का ऑब्जर्वर बनाकर भेजा गया था। नोडल ऑफिसर कुलसचिव व्यास नारायण सिंह रहे, जबकि नोडल को-ऑर्डिनेटर प्रो. सुनील काबिया व डिप्टी नोडल को-ऑर्डिनेटर डॉ. प्रतीक अग्रवाल रहे। जिला प्रशासन द्वारा दो केंद्र पर एक केंद्र प्रतिनिधि नियुक्त किया गया था।
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देर से आया, वापस भेजा
सुबह आठ से 11 की प्रथम पाली में परीक्षा देने के बाद एक छात्र कहीं चला गया था। दूसरी पाली की परीक्षा में शामिल होने में उसे आधे घंटे से ज्यादा देरी हो गई। दोपहर दो बजे आने पर उसे परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया। मालूम हो कि परीक्षा में आधे घंटे के बाद आने पर बैठने की अनुमति नहीं दी जाती है।
पढ़ाई में जुटे रहे अभ्यर्थी
बीएड की परीक्षा के दौरान पहली पाली के बाद अभ्यर्थियों को दो घंटे का विराम मिला तो वह किताबें खोल कर पढ़ाई में जुट गए। दोनों पालियों की परीक्षा में इस बार एक भी नकलची नहीं दबोचा गया।
परीक्षा खत्म होते ही लगा जाम
बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में शाम चार बजे जैसे ही परीक्षा खत्म हुई तो सैकड़ों की संख्या में अभ्यर्थी मेन गेट से बाहर निकले। सड़क पर अभ्यर्थियों की भीड़ होने से गाड़ियों का आवागमन बाधित हो गया और कुछ देर के लिए मार्ग जाम हो गया। बाद में जैसे ही भीड़ छटी तो जाम खुल गया।
हिंदी के प्रश्नों में उलझे अभ्यर्थी
- बीएड परीक्षा देने के बाद समथर निवासी नेहा नामदेव ने कहा कि हिंदी से जुड़े प्रश्न थोड़े कठिन थे। अन्य सवाल आसानी से हल हो गए।
- पहली बार बीएड परीक्षा में शामिल हुईं बड़ागांव गेट बाहर निवासी नेहा शाक्या ने भी कहा कि अन्य प्रश्नों के मुकाबले हिंदी के प्रश्न कठिन थे।
- जालौन निवासी प्रत्युष द्विवेदी ने कहा कि अंग्रेजी के प्रश्नों को हल करने में परेशानी हुई। बताया कि हिंदी के प्रश्न भी थोड़े कठिन थे।
- मोनीबाबा के रहने वाले नौशाद खान ने बताया कि बीएड के पेपर में रीजनिंग कठिन रही। इसके अलावा हिंदी के पर्यायवाची भी टफ आए।