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ग्रामीणों पर 50 करोड़ से अधिक बकाया
अमर उजाला ब्यूरो
Updated Sat, 18 Mar 2017 12:22 AM IST
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ग्रामीणों पर 50 करोड़ से अधिक बकाया
- फोटो : demo
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बिजली विभाग के अधिकारियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से राजस्व वसूलना चुनौती बना हुआ है। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में 42,202 संयोजन हैं। इनमें से 25,117 ऐसे उपभोक्ता हैं, जिन पर पांच हजार रुपये से अधिक का बकाया है। यह धनराशि पचास करोड़ रुपये से अधिक है। बिजली विभाग ने अब बकाएदार सरकारी विभागों का कनेक्शन काटने का निर्णय लिया है।
विद्युत विभाग के तमाम प्रयासों के बाद भी कस्बों व देहातों में रहने वाले लोग विद्युत बिल जमा करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। यही कारण है कि विद्युत अधिकारियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से राजस्व वसूलना चुनौती बना हुआ है। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में 42,202 संयोजन हैं। इनमें से 25,117 ऐसे उपभोक्ता हैं जिन पर पांच हजार रुपये से अधिक का बकाया है। यह धनराशि पचास करोड़ रुपये से अधिक होती है। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने हर साल ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए फरवरी से मार्च के बीच मुश्त समाधान योजना शुरू करती है, लेकिन इस बार यह योजना भी लागू नहीं की गई। योजना के अंतर्गत पूर्ण ब्याज माफ किया जाता है। इससे बकाया राशि का मिलना और मुश्किल भरा बना हुआ है।
अधिशासी अभियंता (ग्रामीण) दिनेश यादवेंदु ने बताया कि बिजली बिल जमा करने को उपभोक्ता प्राथमिकता नहीं मानते हैं। मार्च के बाद बकायेदारों के कनेक्शन काटे जाएंगे। बकाएदार सरकारी विभागों के कनेक्शन भी कटेंगे। सरकारी विभागों पर पांच करोड़ बकाया हैं।
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इनसे जुटता है सबसे अधिक राजस्व
विद्युत ग्रामीण कार्यालय से जुड़े बबीना, बरुआसागर, चिरगांव, मोंठ और समथर के अलावा इन कस्बों के आसपास के गांव जुड़े हुए हैं। इन क्षेत्रों से हर माह करीब दस करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है, जिसमें अकेले भेल करीब 1.50 करोड़, रेलवे 1.70 करोड़ और स्टोन क्रशर एक करोड़ बिल देते हैं।
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विद्युत विभाग के तमाम प्रयासों के बाद भी कस्बों व देहातों में रहने वाले लोग विद्युत बिल जमा करने में रुचि नहीं दिखा रहे हैं। यही कारण है कि विद्युत अधिकारियों के लिए ग्रामीण क्षेत्रों से राजस्व वसूलना चुनौती बना हुआ है। जनपद के ग्रामीण क्षेत्रों में 42,202 संयोजन हैं। इनमें से 25,117 ऐसे उपभोक्ता हैं जिन पर पांच हजार रुपये से अधिक का बकाया है। यह धनराशि पचास करोड़ रुपये से अधिक होती है। उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन ने हर साल ग्रामीण क्षेत्रों के उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए फरवरी से मार्च के बीच मुश्त समाधान योजना शुरू करती है, लेकिन इस बार यह योजना भी लागू नहीं की गई। योजना के अंतर्गत पूर्ण ब्याज माफ किया जाता है। इससे बकाया राशि का मिलना और मुश्किल भरा बना हुआ है।
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अधिशासी अभियंता (ग्रामीण) दिनेश यादवेंदु ने बताया कि बिजली बिल जमा करने को उपभोक्ता प्राथमिकता नहीं मानते हैं। मार्च के बाद बकायेदारों के कनेक्शन काटे जाएंगे। बकाएदार सरकारी विभागों के कनेक्शन भी कटेंगे। सरकारी विभागों पर पांच करोड़ बकाया हैं।
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इनसे जुटता है सबसे अधिक राजस्व
विद्युत ग्रामीण कार्यालय से जुड़े बबीना, बरुआसागर, चिरगांव, मोंठ और समथर के अलावा इन कस्बों के आसपास के गांव जुड़े हुए हैं। इन क्षेत्रों से हर माह करीब दस करोड़ का राजस्व प्राप्त होता है, जिसमें अकेले भेल करीब 1.50 करोड़, रेलवे 1.70 करोड़ और स्टोन क्रशर एक करोड़ बिल देते हैं।