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हाय हुसैन की गूंजी सदाएं
ब्यूरो
Updated Fri, 23 Oct 2015 12:50 AM IST
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झांसी। मोहर्रम की गमगीन फिजाओं के बीच बृहस्पतिवार को इमाम हुसैन के सेनापति हजरत अब्बास को समर्पित मजलिस हुई। इस दौरान हिंदू - मुस्लिम एकता की मिसाल देखने को मिली।
इतवारी गंज हसन मंजिल में आयोजित मजलिस में मर्सियाख्वानी हाजी सज्जाद अली, हाजी तकी हसन, इं. काजिम रजा, आबिद रजा, सईदुज्जमां, अस्करी नवाब आदि ने पढ़ी। तीन वर्षीय वजाइम अब्बास ने रुबाई पेश की। इं. अजीज हैदर आब्दी ने सलाम पढ़ा। पेशखानी जैनुल रजा, अब्लाश आब्दी, आबिद रजा व साजिद मेहंदी ने की। इस दौरान दिल्ली से आए मौलाना अली हैदर गाजी ने शिक्षा पर जोर दिया।
उन्होंने अशिक्षा को बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि हम कामयाब तभी होंगे, जब हम शिक्षित होंगे। मौलाना ने हजरत अबूल्फजलिल के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि हमें उनकी बहादुरी और वफादारी से शिक्षा लेकर मुल्क, कौम और समाज का भला करना चाहिए। उन्होंने हजरत अब्बास की मुश्किलों व अत्याचारों भी वर्णन किया। यह सुन माहौल गमगीन हो उठा।
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हाय हुसैन - प्यासे हुसैन, हाय सकीना - हाय प्यास की मातमी सदाओं के बीच अलमे मुबारक की जियारत कराई गई। नौहा ओ मातम अंजुमने सदाये हुसैनी के मातमदारों ने किया। नौहा ख्वानी अली समर, अनवर नक्वी, तशब्बर बेग व आबिद रजा ने की। इस दौरान पं. बसंत विष्णु गोलवलकर, मंजुल पुरोहित व वीरेंद्र अग्रवाल ने अलमे मुबारक को पुष्पांजलि अर्पित कर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की।
इस मौके पर शाकिर अली, रईस अब्बास, सरकार हैदर, नजर हैदर, सलमान हैदर, नज्मुल हसन, जाहिद मिर्जा, मजाहिर हुसैन, आलिम हुसैन, ताहिर हुसैन, जीशान अमजद, राहत हुसैन, जमीर अब्बास, अली जाफर, काजिम जाफर, नाजिम जाफर, नकी हैदर, वसी हैदर आदि मौजूद रहे। संचालन सैयद अता अब्बास आब्दी ने किया। आभार सगीर मेहंदी ने जताया।
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इतवारी गंज हसन मंजिल में आयोजित मजलिस में मर्सियाख्वानी हाजी सज्जाद अली, हाजी तकी हसन, इं. काजिम रजा, आबिद रजा, सईदुज्जमां, अस्करी नवाब आदि ने पढ़ी। तीन वर्षीय वजाइम अब्बास ने रुबाई पेश की। इं. अजीज हैदर आब्दी ने सलाम पढ़ा। पेशखानी जैनुल रजा, अब्लाश आब्दी, आबिद रजा व साजिद मेहंदी ने की। इस दौरान दिल्ली से आए मौलाना अली हैदर गाजी ने शिक्षा पर जोर दिया।
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उन्होंने अशिक्षा को बड़ी समस्या बताते हुए कहा कि हम कामयाब तभी होंगे, जब हम शिक्षित होंगे। मौलाना ने हजरत अबूल्फजलिल के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि हमें उनकी बहादुरी और वफादारी से शिक्षा लेकर मुल्क, कौम और समाज का भला करना चाहिए। उन्होंने हजरत अब्बास की मुश्किलों व अत्याचारों भी वर्णन किया। यह सुन माहौल गमगीन हो उठा।
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हाय हुसैन - प्यासे हुसैन, हाय सकीना - हाय प्यास की मातमी सदाओं के बीच अलमे मुबारक की जियारत कराई गई। नौहा ओ मातम अंजुमने सदाये हुसैनी के मातमदारों ने किया। नौहा ख्वानी अली समर, अनवर नक्वी, तशब्बर बेग व आबिद रजा ने की। इस दौरान पं. बसंत विष्णु गोलवलकर, मंजुल पुरोहित व वीरेंद्र अग्रवाल ने अलमे मुबारक को पुष्पांजलि अर्पित कर सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल पेश की।
इस मौके पर शाकिर अली, रईस अब्बास, सरकार हैदर, नजर हैदर, सलमान हैदर, नज्मुल हसन, जाहिद मिर्जा, मजाहिर हुसैन, आलिम हुसैन, ताहिर हुसैन, जीशान अमजद, राहत हुसैन, जमीर अब्बास, अली जाफर, काजिम जाफर, नाजिम जाफर, नकी हैदर, वसी हैदर आदि मौजूद रहे। संचालन सैयद अता अब्बास आब्दी ने किया। आभार सगीर मेहंदी ने जताया।